- 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद इस वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरी होने की संभावना है
- राफेल एम के लिए भारतीय नौसेना ने 26 विमानों की डील की है जिनकी डिलीवरी 2028 के अंत तक अपेक्षित है
- तेजस एमके 2 की पहली उड़ान अगले साल के मध्य में होगी और इसके बाद वायुसेना उसका मूल्यांकन करेगी
ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने खूब करामात दिखाई. भारतीय वायुसेना ने खुद इसकी तारीफ की. उसके बाद से 114 नये राफेल को लेकर चर्चा है. नेवी के लिए राफेल एम की डील तो उससे पहले ही फाइनल हो गई थी. मगर ये आएंगे कब तक? तो सबसे पहले जान लीजिए हाल ही में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने शनिवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के कार्यकाल में एक साल के विस्तार को मंजूरी दे दी है. अब वह 31 अक्टूबर 2027 तक, या अगले आदेश तक, इस पद पर बने रहेंगे.
अचानक रक्षा सचिव की बात क्यों?
तो जान लीजिए रक्षा खरीद के मामलों में रक्षा सचिव की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है. 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील होने जा रही है. ऐसे में अगर रक्षा सचिव बदल जाते तो खरीद प्रक्रिया धीमी हो सकती थी. इसलिए सरकार ने रक्षा सचिव के कार्यकाल को एक साल का विस्तार दे दिया है. इससे ये बात साबित होती है कि अगले एक साल में काफी कुछ होने की संभावना है.
कब तक 114 राफेल डील होगी
हाल ही में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एएनआई को बताया कि 114 राफेल खरीद प्रोजेक्ट इस वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा होने की संभावना है. भारत इसमें स्वदेशीकरण के उच्च स्तर और भारतीय हथियारों को शामिल करने पर जोर दे रहा है.रक्षा सचिव ने कहा, "वे पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियारों को शामिल करने के लिए सहमत हो गए थे. इस मामले में, हम एक कदम और आगे जा रहे हैं; यह एक 'खरीदें और बनाएं' प्रोग्राम है. इसमें ज्यादातर विमानों की असेंबलिंग भारत में होगी, जिसमें बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण और भारतीय प्रणालियों व हथियारों को शामिल किया जाएगा."

अब भारतीय हथियार भी लगेंगे
रक्षा सचिव की इस बात से ये भी पता चल गया कि वायुसेना वाले राफेल और नेवी वाले राफेल एम दोनों में भारतीय हथियारों को शामिल करने पर फ्रांस राजी हो गया है. इसके साथ ही नये प्रोजेक्ट में भारतीय सिस्टम और स्वदेशीकरण भी शामिल होंगे. मतलब फाइटर प्लेन के कई कल-पुर्जे भारतीय होंगे. रक्षा सचिव ने पुष्टि की कि 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) चरण के तहत जमा की गई बोलियों का औपचारिक मूल्यांकन किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने अपनी बोलियां जमा कर दी हैं, जिनका मूल्यांकन चल रहा है. इसके बाद, हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे. उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हम इस खरीद प्रक्रिया में किसी नतीजे पर पहुंच सकेंगे."
राफेल एम का टेस्ट हो गया
दो दिन पहले ही 29 अक्टूबर को, एक राफेल मरीन विमान ने भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर अपनी पहली ही कोशिश में सफलतापूर्वक लैंडिंग की. यह भारतीय नौसेना में इस विमान को शामिल करने की दिशा में चल रहे परीक्षणों की शुरुआत है. भारतीय नौसेना ने बताया कि यह लैंडिंग INS विक्रांत पर चल रहे परीक्षणों के दौरान हुई. इससे पहले, भारतीय नौसेना गोवा में राफेल मरीन लड़ाकू विमानों का परीक्षण कर रही थी. रक्षा अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि ये परीक्षण विमान में उन बदलावों के लिए किए जा रहे हैं, जो इसे भारतीय विमानवाहक पोत INS विक्रांत से संचालित करने के लिए जरूरी हैं.
राफेल मरीन डील जानिए
अधिकारियों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने 26 राफेल मरीन विमानों के लिए एक समझौता किया है, जिनकी डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक होने की उम्मीद है. राफेल-मरीन (राफेल-M) एक ऐसा लड़ाकू विमान है जिसे समुद्र में विमानवाहक पोतों से संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है. 28 अप्रैल 2025 को, भारत ने फ्रांस के साथ 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमान खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया, जिसकी कीमत लगभग 63,000 करोड़ रुपये है. इसमें 22 सिंगल-सीट (एक सीट वाले) और 4 ट्विन-सीट (दो सीट वाले) विमान शामिल हैं.

तेजस एमके 2 अगले साल भरेगा पहली उड़ान
रक्षा सचिव ने बताया, "रक्षा मंत्रालय घरेलू विमानन कार्यक्रमों के लिए सख्त समय-सीमा का पालन कर रहा है. 'लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (LCA) Mk2 प्रोजेक्ट, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) ढांचे के तहत अगले साल अपनी पहली उड़ान के परीक्षण की ओर बढ़ रहा है. रक्षा सचिव ने कहा, "फिलहाल, LCA Mk2 प्रोजेक्ट चल रहा है और इसकी पहली उड़ान अगले साल के मध्य में तय है. पहले प्रोटोटाइप आने दीजिए और वायु सेना को उनका मूल्यांकन करने दीजिए, उसके बाद हम आगे देखेंगे. मुझे लगता है कि शुरुआत में उन्होंने 120 Mk2 विमानों की जरूरत बताई थी. लेकिन पहले उन्हें प्रोटोटाइप सौंपने दीजिए, उनका मूल्यांकन होने दीजिए, और उसके बाद हम देखेंगे..."
एमका से सरकार को सारी उम्मीदें
राजेश कुमार सिंह ने AMCA पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यह अब ऐसे चरण में पहुंच गया है जहां शॉर्टलिस्ट किए गए वेंडर्स से 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल्स' (RFP) मंगाए गए हैं. उन्होंने कहा, "फिलहाल, हमने किसी वैश्विक या विदेशी 'पांचवीं पीढ़ी' (फिफ्थ-जनरेशन) के फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम में शामिल होने का कोई फैसला नहीं लिया है. हमारा कार्यक्रम AMCA है, और यह अब उस चरण में पहुंच गया है जहां शॉर्टलिस्ट किए गए वेंडर्स से 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल्स' (RFP) मंगाए गए हैं. वेंडर्स ने थोड़ा और समय मांगा है, क्योंकि यह काम काफी जटिल है और वे पहली बार इस क्षेत्र में कदम रख रहे हैं. हम उन्हें कुछ और समय देने जा रहे हैं. लेकिन मेरी समझ से, यह हमारा अपना कार्यक्रम है और फिलहाल हमने अपनी सारी उम्मीदें इसी पर लगा रखी हैं."
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