विज्ञापन

PAK को मिल सकते हैं 5th Gen Fighter Jet, एयर चीफ एपी सिंह बोले- भारत को जल्द फैसला लेना होगा

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शलने शनिवार को कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह क्षमताओं के विकास की प्रक्रिया का हिस्सा हैं.

PAK को मिल सकते हैं 5th Gen Fighter Jet, एयर चीफ एपी सिंह बोले- भारत को जल्द फैसला लेना होगा
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ड्रोन फोर्स बनाने पर कोई बात नहीं चल रही है.
  • एयर चीफ ने कहा कि 5वी पीढ़ी के लड़ाकू विमान शामिल करने के लिए AMCA कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाना होगा
  • तेजस मार्क-1ए विमानों की आपूर्ति में देरी से वायुसेना को नुकसान होगा, स्क्वाड्रनों की संख्या कम हो चुकी है
  • फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद सौदे को वित्त वर्ष के अंत तक अंतिम रूप देने की योजना है

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आज कई बड़ी जानकारियां शेयर की. उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्टें हैं, जिनके मुताबिक पाकिस्तान निकट भविष्य में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल कर सकता है और उसके पायलट चीन में प्रशिक्षण भी ले रहे हैं. उन्होंने माना कि यह चिंता का विषय है, लेकिन साथ ही ये भी जोड़ा कि ये ऐसी स्थिति नहीं है, जिससे भारत निपट न सके. एयर चीफ ने कहा कि सिर्फ किसी एक आधुनिक विमान का होना निर्णायक नहीं होता, बल्कि उसे पूरे सैन्य नेटवर्क और सिस्टम के साथ कितनी प्रभावी तरह से जोड़ा जाता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास पहले भी कई आधुनिक प्लेटफॉर्म रहे हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह उनसे कोई बड़ा असर पैदा नहीं कर पाया.

Latest and Breaking News on NDTV

...तो बड़ा फैसला लेना होगा

एपी सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत को जल्द से जल्द पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान अपनी वायुसेना में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. इसके लिए स्वदेशी AMCA कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि AMCA परियोजना में ज्यादा देरी होती है तो भारत को वैकल्पिक विकल्पों पर भी फैसला करना पड़ सकता है. वायुसेना दिवस से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने यह भी कहा कि अगले कुछ वर्षों तक भारतीय वायुसेना को हर साल कम से कम 36-40 लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की आवश्यकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वदेशी रूप से निर्मित तेजस मार्क-1ए विमानों के साथ-साथ बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) कार्यक्रम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू विमानों को शामिल किए जाने से स्थिति में सुधार होगा.

Latest and Breaking News on NDTV

राफेल पर बड़ा अपडेट

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारत की योजना है कि यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार चलता रहा, तो इसी वित्त वर्ष के अंत तक एमआरएफए सौदे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद पहल के तहत फरवरी में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव को मूल रूप से लगभग दो दशक पहले मंजूरी दी गई थी. परियोजना से संबंधित कीमतों पर बातचीत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर फिलहाल चर्चा जारी है.

तेजस एमके1ए में देरी से चिंता

वायुसेना प्रमुख ने अपनी वायुसेना को तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर भी चिंता जताई. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा इन विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “इससे हमें नुकसान होगा.” रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में भारतीय वायुसेना के लिए 83 तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था. विमानों की पहली खेप मार्च 2024 में सौंपी जानी थी. हालांकि, अब तक भारतीय वायुसेना को एक भी विमान नहीं सौंपा गया है. वायुसेना इन लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है, क्योंकि उसके लड़ाकू विमान स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि आधिकारिक तौर पर स्वीकृत संख्या 42 है. रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में वायुसेना के लिए 97 तेजस एमके-1ए हल्के लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 62,370 करोड़ रुपये का एक और सौदा किया था.

Latest and Breaking News on NDTV

सुखोई 57 पर बड़ा अपटेट

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना को तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान, एमआरएफए कार्यक्रम के तहत विमान, तेजस मार्क-2 और उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम के तहत विकसित किए जा रहे लड़ाकू विमानों के शामिल होने का इंतजार है. उन्होंने कहा कि यदि एएमसीए कार्यक्रम में देरी होती है, तो वायुसेना को किसी अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर विचार करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि रूस ने एसयू-57 लड़ाकू विमानों की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने भारत में ही लड़ाकू विमानों के इंजन का उत्पादन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

ड्रोन फोर्स पर कही बड़ी बात

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शलने शनिवार को कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह क्षमताओं के विकास की प्रक्रिया का हिस्सा हैं. उन्होंने लोइटरिंग एम्युनिशन के लिए अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत से भी इनकार किया. एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि लोइटरिंग एम्युनिशन का इस्तेमाल दुश्मन के बीच भ्रम पैदा करने और कुछ लक्ष्यों को निशाना बनाने में मदद करता है. हालांकि, भारतीय वायुसेना में ड्रोन से जुड़ी क्षमताएं दशकों से मौजूद हैं. उन्होंने कहा, “जहां तक अलग ड्रोन फोर्स की बात है, भारतीय वायुसेना में ये चीजें दशकों से मौजूद हैं. ये क्षमताएं हमारे पास दशकों से हैं. इसलिए मैं कह सकता हूं कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं हैं. हां, ये विकासवादी बदलाव जरूर हैं. मुझे नहीं लगता कि हमें अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत है. हमने अलग फोर्स बनाने के बारे में नहीं सोचा है, बिल्कुल नहीं.” 

यह भी पढ़ें-

शेख हसीना का 2024 में स्वागत करने के अलावा भारत के पास शायद ही कोई विकल्प था: दिनेश त्रिवेदी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Air Force Chief AP Singh, Rafale Deal, Sukhoi 57 Deal, India Drone Army, Tejas MK-1a Fighter Jet
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com