पंजाब में कांग्रेस आलाकमान के अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने के बाद चन्नी के घर पर बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस के 16 में से पांच विधायक शामिल हुए. एक पूर्व उपमुख्यमंत्री भी थे बाकी पूर्व विधायक. इससे पहले दिल्ली में सुखजिंदर सिंह रंधावा जो कि कांग्रेस के सांसद हैं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. हालांकि बैठक के बाद रंधावा ने कहा कि उनकी यह बैठक पहले से तय थी मगर बैठक की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
यही नहीं एक दिन पहले जब पंजाब के विभिन्न कमेटियों की घोषणा की गई तब चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा 'है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसे कोई हुनर आवे.' मनीष तिवारी के इस पोस्ट को उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि तिवारी ने मीडिया में कोई भी बयान नहीं दिया है.
क्या पंजाब कांग्रेस में सब सही नहीं चल रहा?
अब सवाल उठता है कि यह तो सच है कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और आलाकमान के फैसले पर चन्नी अपनी बाहें चढ़ा रहे हैं. अब सबसे बड़ा सवाल है कि चन्नी की बैठक का नतीजा क्या निकला और इससे होगा क्या? कांग्रेस आलाकमान के नजदीकी सूत्रों की मानें तो इसका कोई असर नहीं होने वाला है. वो दिल्ली आएंगे मगर उनकी मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे या राहुल गांधी से नहीं होगी. ज्यादा से ज्यादा वो प्रभारी भूपेश बघेल या संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल से मिलेंगे.
उनको बता दिया जाएगा कि फैसला हो चुका है आप लोग जाएं मिलकर चुनाव लड़ें, जीत कर आएं फिर फैसला किया जाएगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा. कांग्रेस की तरफ से चन्नी को ये भी कहा जाएगा कि मुख्यमंत्री का कोई चेहरा सामने नहीं लाया जाएगा और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव होगा. आलाकमान को चन्नी के बारे में भी पता है, अगर उनकी बात नहीं मानी जाती है तो किस हद तक जाते हैं. कांग्रेस सूत्रों की माने तो राहुल गांधी किसी भी हालत में पंजाब के इन नेताओं के आगे झुकने वाले नहीं हैं क्योंकि ये वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने चन्नी को पिछली बार कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटा कर राज्य की कमान सौंपी थी.
राहुल गांधी नहीं सहेंगे नेताओं की मनमानी
राहुल गांधी के हाल के दिनों में लिए गए फैसलों को देखें तो वे किसी भी राज्य में किसी नेता की मनमानी को सहने वाले नहीं हैं. केरल में जब मुख्यमंत्री बनाने की बात आई तो उन्होंने अपने सबसे करीबी और पार्टी के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल को कमान नहीं सौंपी और वी डी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाया. तमिलनाडु में अपने पुराने सहयोगी डीएमके को छोड़कर टीवीके का दामन थाम लिया और तमिलनाडु में डीएमके के धुर विरोधी मणिकम टैगोर को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया.
इसी तरह उत्तर प्रदेश का प्रभारी दलित राजेन्द्र गौतम को बना दिया जो लखनऊ जाते ही कहते है कि यूपी में बराबर की भागीदारी होगी. मगर पंजाब में बात फंस गई. लेकिन लगता नहीं है कि राहुल गांधी पर इसका कोई असर पड़ेगा. अब गेंद चन्नी की पाले में है कि वो क्या कदम उठाते हैं. राहुल के हाल के फैसले यही संकेत दे रहे हैं कि वो अब पार्टी में किसी की मनमानी नहीं सहने वाले. अब सबकी निगाहें राहुल पर होंगी कि जब वे विदेश यात्रा से वापस लौटते हैं, तो क्या फैसला लेते हैं. क्योंकि इसका असर आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बाकी राज्यों में भी पड़ेगा जहां पार्टी में जमकर गुटबाजी है.
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