पंजाब को लेकर आखिरकार कांग्रेस आलाकमान ने अपना निर्णय सुना दिया है. अगले ही साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और तमाम चर्चाओं के बीच कांग्रेस आलाकमान ने यह तय किया है कि पंजाब प्रदेश के मौजूदा ढांचे से कोई ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. केवल मोहरे इधर उधर बैठाने का काम किया गया है. हालांकि कांग्रेस ने पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट के बावजूद अजय माकन, मीनाक्षी और भजनलाल जाटव की एक समिति बनाई थी. इस समिति ने पंजाब के करीब 75 से अधिक नेताओं से बातचीत करके अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, मगर इनके रिपोर्ट सौंपने के करीब दो हफ्ते बाद निर्णय आया है.
कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग को नहीं बदला है. दरअसल पार्टी एक जट सिख को हटाने का साहस नहीं दिखा पाई. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, जो अपने आप को सबसे तगड़ा दावेदार समझते थे उनको कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि दस जनपथ के नजदीकी विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमिटी का प्रमुख बनाया गया है और मैनिफेस्टो कमिटी का अध्यक्ष अमर सिंह को बनाया है. चन्नी को लेकर कांग्रेस आलाकमान की दुविधा दिखती है, वो 2022 को नहीं दुहराना चाहते हैं.जब चन्नी के नेतृत्व में कांग्रेस बुरी तरह हार गई थी.
दूसरा चन्नी पर केन्द्रीय एजेंसियों का भी शिकंजा है खासकर कर ईडी का मामला.कुछ इन्हीं वजहों से कांग्रेस नेतृत्व चन्नी को आगे लाने से हिचक रहा है. यहां पर भरोसे का मामला बनता दिख रहा है. कांग्रेस ने पंजाब में जातीय समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. जट सिख में से प्रदेश अध्यक्ष वाडिंग के अलावा रंधावा हैं तो प्रताप सिंह बाजवा सदन में नेता प्रतिपक्ष हैं. इसके अलावा सुखपाल सिंह खैहरा,राणा गुरजीत सिंह,पूर्व ओलंपियन प्रगट सिंह को अलग-अलग कमेटी में जगह दी गई है.
दलित सिखों पर भी खेला कांग्रेस ने दांव
कांग्रेस ने दूसरा बड़ा दांव दलित सिखों को लेकर खेला है. चन्नी तो हैं ही साथ में डॉ अमर सिंह को मैनिफेस्टो कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. राजकुमार वेरका और सुखविंदर सिंह डैनी को उपाध्यक्ष रखा गया है. हिंदू वोटरों के लिए विजय इंदर सिंगला को चैयरमैन चुनाव मैनेजमेंट कमेटी बनाया गया और इसी कमेटी में ओपी सोनी और भारत भूषण आशु को भी रखा गया है. मुस्लिम चेहरे के तौर पर रजिया सुल्ताना को भी इसी कमेटी में जगह दी गई है. कांग्रेस ने अपनी सूची में मालवा,माझा और दोआब जैसे तीनों क्षेत्रों में संतुलन बनाने की कोशिश की है.
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क्यों एक नहीं हो पा रहे पंजाब कांग्रेस के टॉप 5 नेता
मगर इस सबके बावजूद कांग्रेस वहीं खड़ी है जहां 2022 में थी यानि आपसी खींचतान. पिछली बार नवजोत सिंह सिद्धू थे, जिनकी किसी से नहीं बनती थी. इस बार कोई सिद्धू तो नहीं हैं मगर पंजाब के पांच बड़े नेता राजा वाडिंग, चन्नी, रंधावा, बाजवा और सिंगला एक नहीं हो पा रहे हैं.पंजाब की इस कमेटी की घोषणा के बाद चंडीगढ़ से कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जता दी.
मनीष तिवारी ने लिखा- है बड़ा कोई अवगुण उसमें जिसे कोई हुनर आवे
उन्होंने लिखा, 'है बड़ा कोई अवगुण उसमें जिसे कोई हुनर आवे'. वहीं पंजाब की इस नई कमेटी की घोषणा के बाद वहां के कांग्रेस नेताओं का भी कोई बयान नहीं आया है, जो अपनी नई जिम्मेदारी दिए जाने पर आलाकमान को धन्यवाद दे रहा हो. अब देखना होगा कि इस कमेटी का कौन वो नेता होगा जो वोटरों में इतना विश्वास पैदा कर पाएगा कि वो कांग्रेस को वोट दें. ये कहना आसान है मगर करना मुश्किल और यही पंजाब कांग्रेस की समस्या है.
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