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प्रतीक यादव की अपर्णा से अनबन के बाद सुधर गए थे रिश्ते, इंस्टा पोस्ट ने मचाया था तहलका, स्कूल में प्यार के बाद हुई थी शादी  

Prateek Yadav Death News: प्रतीक यादव और उसकी पत्नी अपर्णा यादव के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है. समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद भी परिवार में संबंधों में दूरियां दिखी थीं. उसके बाद दोनों के निजी रिश्तों में भी खटास आई थी.

प्रतीक यादव की अपर्णा से अनबन के बाद सुधर गए थे रिश्ते, इंस्टा पोस्ट ने मचाया था तहलका, स्कूल में प्यार के बाद हुई थी शादी  
Prateek Yadav Aparna Yadav: प्रतीक यादव और अपर्णा यादव
नई दिल्ली:

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की 38 साल की उम्र में असमय मौत से सबको धक्का लगा है. उत्तर प्रदेश के सबसे रसूखदार राजनीतिक परिवारों में से एक मुलायम परिवार से प्रतीक यादव जुड़े थे. पत्नी अपर्णा यादव के साथ उनके रिश्ते की कहानी भी उतार-चढ़ाव भरी रही है.मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव और अपर्णा बिष्ट की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी. अपर्णा के पिता एक वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. यह रिश्ता करीब 8-9 साल तक चला, जिसके बाद 2011 में इनकी सगाई हुई और 2012 में एक भव्य समारोह में इनकी शादी हुई. अपर्णा यादव ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था. 

प्रतीक के इंस्टा पोस्ट से मचा था हंगामा

प्रतीक यादव ने कुछ महीनों पहले इंस्टाग्राम पोस्ट से तहलका मचाया था और पत्नी अपर्णा यादव से तलाक लेने की बात कह दी थी. उन्होंने अपर्णा को परिवार तोड़ने वाली, स्वार्थी और सिर्फ अपनी लोकप्रियता पर ध्यान देने जैसे आरोप लगाए थे. लेकिन महीने भर बाद ही प्रतीक ने खुद रिश्तों में सुधार का संकेत देते हुए ऑल इज वेल वाला पोस्ट किया था. प्रतीक ने लिखा, अपर्णा ने उनके हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया है. उसने परिवार के लोगों के बीच दरार पैदा की. उसे परिवार की भावना या परिवार प्रेम से कोई लेना-देना नहीं है. प्रतीक ने उस वक्त खुद को मानसिक परेशानियों से घिरा भी बताया था. उन्होंने बताया कि मुश्किल भरे वक्त में अपर्णा ने उनका साथ नहीं दिया. अपर्णा सिर्फ अपने हितों के बारे में सोचती हैं. 

अपर्णा यादव के राजनीतिक करियर पर चुप्पी

जब अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी की लाइन से हटकर कई मुद्दों पर भाजपा की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की प्रशंसा शुरू की. प्रतीक यादव राजनीति से दूर अपने बिजनेस रियल एस्टेट और जिम चेन पर ध्यान केंद्रित करते रहे, लेकिन अपर्णा की राजनीतिक सक्रियता ने परिवार के भीतर वैचारिक मतभेद पैदा किए. रिश्तों में सबसे बड़ा मोड़ जनवरी 2022 में आया जब अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर आधिकारिक तौर पर भाजपा का दामन थाम लिया. उस वक्त अखिलेश यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उनके रिश्तों में काफी दूरी देखी गई थी. प्रतीक यादव उस दौरान सार्वजनिक रूप से चुप रहे, लेकिन परिवार दो धड़ों में बंटता नजर आया.मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता (प्रतीक की मां) के निधन के बाद परिवार के भीतर उत्तराधिकार और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर जद्दोजहद देखी गई.

पारिवारिक रिश्तों में सुधार

मुलायम सिंह यादव के अक्टूबर 2022 में निधन के बाद पूरा परिवार एकजुट दिखा. अंतिम संस्कार के समय प्रतीक और अपर्णा को अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के साथ दिखे. दुख की इस घड़ी ने रिश्तों में आपसी कड़वाहट को कम करने का काम किया. प्रतीक यादव ने हमेशा खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखा और कभी भी अपर्णा के राजनीतिक फैसलों के खिलाफ बयानबाजी नहीं की. 

देवरानी-जेठानी के रिश्ते

डिंपल यादव और अपर्णा यादव के बीच रिश्तों में सहजता रही.पिछले कुछ समय में पारिवारिक आयोजनों में अपर्णा यादव और डिंपल यादव (जेठानी-देवरानी) के बीच की केमिस्ट्री में सुधार दिखा. अपर्णा ने भी कहा कि राजनीति अपनी जगह है और परिवार के संस्कार अपनी जगह. अपर्णा यादव को साल भर पहले भाजपा ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी. 
 

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