- विधायक प्रशांत किशोर ने ब्राह्मण समाज को उनकी ज्ञान परंपरा से दूर होने और संस्कार छोड़ने पर चेतावनी दी
- उन्होंने ब्राह्मणों से कहा कि उनके पूर्वजों ने रोटी कम खाई लेकिन बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया था
- प्रशांत किशोर ने मुस्लिमों के प्रति दुर्भावना और भाजपा के साथ जुड़ने से वोट बैंक के नुकसान की बात कही
बिहार की बांकीपुर सीट से विधायक प्रशांत किशोर का ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम को संबोधित करने का वीडियो आया है. वह मिथिलांचल कहे जाने वाले क्षेत्र के दरभंगा जिले के महिनाम गांव पहुंचे थे. यहां उन्होंने ब्राह्मणों को संबोधित करते हुए कहा कि आप अपनी ज्ञान परंपरा वाली विरासत से दूर हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि जिस समाज के पास न जन बल, न धन बल और न ही बाहुबल. फिर भी आप लोगों की श्रेष्ठता समाज ने क्यों मानी. इसलिए नहीं क्योंकि आप श्रेष्ठ हैं बल्कि इसलिए क्योंकि आपके पूर्वजों ने दो चीजों का साथ रखा. एक रोटी कम भी खाई, लेकिन बच्चों को पढ़ाया.
इसके आगे उन्होंने कहा कि आप संस्कार से हमेशा जुड़े रहे. संस्कार यह कि अपना पेट भर जाए तो किसी दूसरे भूखे की चिंता करना ही आपका संस्कार था. आपने वह छोड़ दिया और आप भी उसी लड़ाई में लड़ रहे हैं कि हमको क्या मिल जाएगा और हमको क्या मिलेगा. चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने मुस्लिमों से दुर्भावना वाले व्यवहार को भी गलत बताया. उन्होंने कहा, 'आपने सरस्वती का कैसे साथ छोड़ा है. इस पर भी बात कर लीजिए. आप अपने ज्ञानी बता रहे हैं और आपको मालूम है कि चुनाव जीतने के लिए वोट चाहिए. संख्या तो आप अपनी बढ़ा नहीं सकते हैं. लेकिन आपके पुरखों ने व्यवस्था बनाई कि 20 पर्सेंट मुसलमान आपको वोट करता था.'
'भाजपा का झंडा उठाकर घूमने लगे तो मुसलमानों ने अलग रास्ता पकड़ा'
उन्होंने कहा, 'आपने क्या किया कि भाजपा का झंडा उठाकर घूमने लगे तो वह 20 फीसदी छिटक कर चला गया. आप सोचिए कि मुसलमानों से आपकी किस बात की लड़ाई है. न जमीन की लड़ाई है और न ही आरक्षण की. आखिर किस चीज की लड़ाई है. ना आप कभी दंगे में जाते हैं. आपसे तो एक चींटी नहीं मरेगी. आप फेसबुक पर मुसलमानों को गाली दे रहे हैं. नतीजा यह हुआ कि आप जिसके वोट से राजा बनते थे, वह आपको छोड़कर दूसरी जगह पर चला गया. आप अपने को बुद्धिजीवी बता रहे हैं.'
'आपको वोट देते थे और गुरुजी कहते थे, आप उनसे दूर हो गए'
प्रशांत किशोर ने कहा कि यह कौन सा ज्ञान है. जिस अति पिछड़ा समाज की इतनी चर्चा हो रही है और वही राजनीति तय करता है. उन्हें आपके पुरखों ने साथ बिठाया था. ब्राह्मणों को परशुराम बताए जाने पर कहा कि आप गलत रास्ता मत पकड़िए. उन्होंने कहा कि आपकी ताकत कलम और किताब है. आपका काम फरसा चलाना नहीं है. यह एक परिप्रेक्ष्य का मामला है. वह 18 फीसदी वोट जो आपके साथ था और आपको गुरुजी कहता था. उसे यदि आप फेसबुक पर गाली देंगे तो फिर कैसे आगे बढ़ेंगे.
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