
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट के वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य प्रशांत भूषण ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कानूनी नोटिस भेजा हैं। उन्होंने सिसोदिया को यह नोटिस कथित तौर पर अनुबंध शिक्षकों को 'पीछे के दरवाजे से' नियमित करने के लिए भेजा।
इस साल की शुरुआत में AAP से निष्कासित किए गए भूषण ने कहा कि मौजूदा अतिथि शिक्षकों को नियमित करने को लेकर 10 जून का विशेष परिपत्र सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था का उल्लंघन है।
इसमें कहा गया है, 'इस कानूनी नोटिस में यह मांग की गई है कि शिक्षकों के पद पर नियुक्ति के लिए डीएसएसएसबी परीक्षा में शामिल होने वाले सभी पात्र उम्मीदवारों को उचित अवसर मिले। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार इसके लिए अनुबंध (आकस्मिक) शिक्षकों के रूप में उनके पहले के कार्य पर ध्यान नहीं दिया जाए।'
भूषण ने कहा, 'अन्य लोगों को मौका दिए बगैर अतिथि (अनुबंध) शिक्षकों को नियमित करना पिछले दरवाजे से प्रवेश की तरह है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैर कानूनी कहा है।' नोटिस में कहा गया है कि 'अवसर की समानता' सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार की कसौटी है।
इस साल की शुरुआत में AAP से निष्कासित किए गए भूषण ने कहा कि मौजूदा अतिथि शिक्षकों को नियमित करने को लेकर 10 जून का विशेष परिपत्र सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था का उल्लंघन है।
इसमें कहा गया है, 'इस कानूनी नोटिस में यह मांग की गई है कि शिक्षकों के पद पर नियुक्ति के लिए डीएसएसएसबी परीक्षा में शामिल होने वाले सभी पात्र उम्मीदवारों को उचित अवसर मिले। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार इसके लिए अनुबंध (आकस्मिक) शिक्षकों के रूप में उनके पहले के कार्य पर ध्यान नहीं दिया जाए।'
भूषण ने कहा, 'अन्य लोगों को मौका दिए बगैर अतिथि (अनुबंध) शिक्षकों को नियमित करना पिछले दरवाजे से प्रवेश की तरह है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैर कानूनी कहा है।' नोटिस में कहा गया है कि 'अवसर की समानता' सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार की कसौटी है।
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