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This Article is From Sep 16, 2025

UPI से लेकर जन धन योजना, पीएम मोदी की 'डिजिटल क्रांति' का रहा शानदार सफर

कोरोना महामारी का समय देश के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था...जिसे देश ने मिलकर इसे पास किया. स्कूल बंद होने के बावजूद, दीक्षा और स्वयं जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों की पढ़ाई रुकी नहीं.

UPI से लेकर जन धन योजना, पीएम मोदी की 'डिजिटल क्रांति' का रहा शानदार सफर
  • प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में डिजिटल इंडिया मिशन ने देश को आधुनिक डिजिटल युग में तेज़ी से प्रवेश कराया है
  • UPI ने डिजिटल भुगतान में क्रांति लाई, जिससे हर महीने अरबों लेनदेन होते हैं और विदेशी देशों ने भी इसे अपनाया है
  • कोरोना काल में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य और टीकाकरण के लिए विकसित प्लेटफॉर्म ने देश की बड़ी मदद की है

साल 2014 से पीएम मोदी ने प्रधानसेवक के तौर पर सेवा का कार्य शुरू किया, तभी से भारत ने आधुनिकता की तरफ तेजी से कदम बढ़ाते हुए डिजिटल युग में प्रवेश किया. पिछले एक दशक से मोदी सरकार के कई कार्यक्रमों ने देश की तस्वीर बदल दी. भारत में एक ऐसी डिजिटल क्रांति आई है, जो किसी असाधारण से कम नहीं है, जिसने भारतीय जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है—अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वाणिज्य और यहां तक कि देश के दूर इलाकों में रहने वाले किसानों और छोटे उद्यमियों का जीवन इससे बदला है.

बहुत पुरानी बात नहीं है. महज 10 साल पहले तक दूसरे क्षेत्रों की तरह ही भारत में डिजिटल क्रांति भी एक सपना थी. लेकिन डिजिटल इंडिया मिशन ने सरकारी कामकाज से लेकर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को भी बदल दिया. 10 साल पहले भारत में डिजिटल इंडिया मिशन का आगाज हुआ था, जिसका मकसद था टेक्नोलॉजी तक आम आदमी की पहुंच को आसान बनाना. डिजिटल इंडिया कार्यक्रमों ने पिछले कुछ सालों में शानदार सफलता हासिल की है. आज भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक है. 

देश में इंटरनेट कनेक्शन

  • 2014: 25 करोड़
  • 2025: 97 करोड़
  • 42 लाख किलोमीटर से ज्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछीं

भारत में UPI ने बदली तस्वीर

UPI भारत में डिजिटल क्रांति लाया. साल 2016 में लॉन्च हुआ यूपीआई आज दुनिया का सबसे तेज डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म है. हर महीने भरोसेमंद तकनीक की वजह से अरबों ट्रांजैक्शन इसके जरिए किए जा रहे हैं. सिंगापुर, यूएई के साथ फ्रांस ने भी भारत के यूपीआई को अपनाया है. ये डिजिटल भारत के आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. आज भारत में हर महीने 17 अरब से ज्यादा UPI लेनदेन होते हैं, और यहां तक कि सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले भी एक साधारण क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं.

जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) 

जन धन-आधार-मोबाइल लागू होने के साथ ही एक बड़ा मोड़ आया. 55 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए. जहां पहले लाखों लोग बिना बैंक खातों के काम कर रहे थे, उन्हें इसके जरिए बैंकिंग और सीधे तौर पर बैनिफिट्स ट्रांसफर की सुविधा मिल गई. देश के एक छोटे से गांव में एक व्यापारी बिचौलियों से बचकर सीधे फायदा उठाने में सफल हुआ.

भारतनेट, डिजिलॉकर, डिजियात्रा ने सिखाया नया अनुभव

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस दशक में कमाल का काम किया है. भारतनेट जैसी परियोजनाओं ने 2 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाया. डिजिलॉकर ने जरूरी दस्तावेजों को हमेशा साथ रखने वाली परंपरा को तोड़ा. वहीं, डिजियात्रा ने सिखाया हवाई यात्रा पेपरलैस भी हो सकती है, जिसके जरिए फास्ट चेक-इन, बेहतर यात्री अनुभव का फायदा मिला. ये सिर्फ ऐप नहीं थे—ये एक डिजिटल होते देश की नई कहानी थी.

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सपने किए पूरे

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) की शुरुआत के साथ डिजिटल गवर्नेंस ने भी एक बड़ी छलांग लगाई. GeM ने 1.6 लाख से ज्यादा सरकारी खरीदारों को 22 लाख से ज्यादा वैंडर्स से जोड़ा है. इसके जरिए एक आम व्यापारी की पहुंच सरकारी मार्केटप्लेस तक संभव हो पाई.

कृषि क्षेत्र में डिजिटल युग का हुआ आगाज

पीएम मोदी कई सम्मेलन में कह चुके हैं कि अगर अपने एग्रीकल्चर सेक्टर को आगे ले जाना है तो इसमें तकनीक की मदद लेनी ही होगी, और उन्होंने ये करके भी दिखाया. पीएम-किसान जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए इनकम सपोर्ट सीधे किसानों तक पहुच रही है. साथ ही ई-नाम ने राज्यों की कृषि मंडियों को जोड़ा, जिससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिल सके. डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने उन्हें यह समझने में मदद की कि उन्हें कौन सी फसलें उगानी चाहिए.

कोरोना के समय तकनीक से बचाईं करोड़ों जिंदगियां

कोरोना महामारी का समय देश के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था...जिसे देश ने मिलकर इसे पास किया. स्कूल बंद होने के बावजूद, दीक्षा और स्वयं जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों की पढ़ाई रुकी नहीं. इसी समय, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने हेल्थ सेक्टर में क्रांति ला दी, जिससे नागरिकों को एक डिजिटल आईडी के जरिए इलाज लेने में आसानी हुई. वहीं, 140 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाना कोई आसान काम नहीं था पर CoWIN पोर्टल के जरिए ये काम बिना किसी रुकावट के पूरा हुआ.

भारत अभी लगातार डिजिटल हो रहा है. एक नया बदलाव देश की तरक्की की नई कहानी लिख रहा है. ये कहानी अभी जारी है...

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