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BRICS अगर मान ले PM मोदी की बात, तो ऐसे बदल जाएगी दुनिया, 10 बड़े सुधारों पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में बड़े वैश्विक सुधारों का खाका खींचा. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, आईएमएफ, विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में ब्रिक्स देशों की समान भागीदारी की बात कही है.

PM Modi speech at BRICS summit 2026
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में बड़े वैश्विक सुधारों की वकालत की. ब्रिक्स के सदस्य देशों की आवाज को मजबूती देने के लिए उन्होंने 10 बड़े वैश्विक सुधारों का प्रस्ताव रखा. मोदी ने ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप तैयार करने की वकालत करते हुए 3R फॉर्मूला दिया. इस 3R में रिप्रंजेटेशन (समान भागीदारी), रिस्पांसिव (आपात स्थिति में एकजुट होकर प्रतिक्रिया देना) और तीसरा रूल मेकिंग गर्वनेंस यानी दुनिया में निर्णय लेने वाले संस्थानों और एजेंसियों में समान भागीदारी की जोरदार वकालत की बात है. पिरामिड और प्रिविलेज को प्लेटफॉर्म और पार्टनरशिप में बदलना है.जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य के हितों का ध्यान रखा जाए और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो. इस उद्देश्य के लिए ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रस्ताव तैयार किए जाएं, जिसे हम अगले ब्रिक्स समिट तक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप देने का प्रयास कर सकते हैं. 

1. रिप्रंजेटेशन (समान भागीदारी) 

पीएम मोदी ने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रिफॉर्म टाला नहीं जा सकता, इसे निश्चित समयसीमा से जोड़ना होगा. गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में दुनिया के महत्वपूर्ण फैसले लेने वाले यूएन की भागीदारी में असंतुलन की ओर इशारा किया. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों में अपने प्रतिनिधित्व की वकालत करता रहा है. एशियाई देशों में जापान भी के अलावा ऑस्ट्रेलिया भी प्रयास कर रहा है.

आईएमएफ, विश्व बैंक में बढ़े भागीदारी

आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों में भी विकसित देशों के वोटिंग पावर, लीडरशिप और नीति निर्माण में पर्याप्त भागीदारी के मुकाबले भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, रूस जैसे देशों के अधिकारों के बीच असंतुलन का मुद्दा भी उन्होंने उठाया. ऐसी एजेंसियों में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व और अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया. 40 फीसदी जीडीपी और दुनिया की 50 फीसदी आबादी के बावजूद अभी ब्रिक्स की जगह यूरोपीय देशों और अमेरिका का ही प्रभुत्व है. भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, चीन और रूस जैसे देशों की ताकत ऐसी एजेंसियों में बढ़ती है तो उन्हें विकास कार्यों के लिए आसानी से फंडिंग मिल सकती है. उन्हें ऐसी वैश्विक एजेंसियों की मनमानी शर्तों को भी नहीं झेलना पड़ेगा. आतंकवाद को पालने पोसने वाले पाकिस्तान जैसे देशों पर FATF के जरिये शिकंजा कसा जा सकेगा. 

2. कलेक्टिव रिस्पांस यानी सामूहिक प्रतिक्रिया

वैश्विक संस्थानों में मानवता का विश्वास तभी बढेगा, जब इसे समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में सक्षम होंगे. मिडिल ईस्ट जैसे संकटों की इशारा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमें सामूहिक प्रतिक्रिया में तेज गति, मजबूती और हर छोटे देश तक इसका फायदा मिलने की वकालत की. पीएम मोदी ने इसके लिए नौवहन के लिए इमरजेंसी सेफ्टी सिस्टम बनाए जाने और इसमें संबंधित देशों की नौसेनाओं को जोड़ने का प्रस्ताव दिया.

होर्मुज जैसे संकट से निपटने का रास्ता

समुद्री संकट के वक्त नौवहन में इमरजेंसी मेडिकल सिस्टम और इन्फारमेशन सिस्टम बनाने की बात कही. अगर ये प्रस्ताव परवान चढ़ता है तो होर्मुज जैसे संकट या संघर्ष के दौरान भी तेल आपूर्ति, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिलेगी. इससे तेल सप्लाई में संकट के कारण महंगाई से जूझना नहीं पड़ेगा. दुनिया के एक तिहाई नाविक भारतीय हैं, होर्मुज में जहाजों पर हुए हमले में कई भारतीयों ने जान गंवाई हैं, उससे भी बचा जा सकेगा.   

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3. AI जैसे सुधारों में रूल मेकिंग का ध्यान 

पीएम मोदी ने एआई, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, बायो टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी ग्लोबल साउथ के देशों को एक मंच पर आने का आह्वान किया. ग्लोबल साउथ देशों को रूल ब्रेकर (नियम तोड़ने) की जगह से रूल शेपर्स (नियमों को दिशा देने) की भूमिका में आने की बात कही. पीएम मोदी ने यूपीआई जैसे डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका का जिक्र करते हुए ब्रिक्स देशों के बीच सिक्योर डिजिटल डिपॉजिटरी बनाने की बात कही. ब्रिक्स कॉटिन्यूटी मैकेनिज्म का प्रस्ताव दिया.

एकाधिकार की जगह सबका साथ-सबका विकास

अमेरिका और यूरोपीय देशों की एआई कंपनियों के खतरों को लेकर विशेषज्ञ लगातार आगाह कर रहे हैं. जबकि भारत जैसे देश डेटा ट्रांसफर, एआई, बौद्धिक संपदा से जुड़े कानून पर न्यायपूर्ण व्यवस्था की वकालत की है, ताकि भारत के नए नवेले स्टार्टअप भी एआई का इस्तेमाल करने में पीछे न रह जाएं, उन्हें भेदभाव का सामना न करना पड़े. बहुराष्ट्रीय कंपनियां मनमानी न कर सकें. 

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