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प्रधानमंत्री ने PM किसान योजना की 23वीं किस्त की जारी, पश्चिम बंगाल दिवस पर लोगों से पूछा- परिवर्तन पसंद आ रहा है?

पीएम ने कहा कि बंगाल की हवा में अब एक नई ताज़गी है. यहां के कण-कण से एक नई खुशबू आ रही है, ऐसा लग रहा है जैसे बंगाल अब बेड़ियों से आज़ाद हो गया है. जैसे बंगाल का गौरव लौटने का आरंभ हो गया है.

प्रधानमंत्री ने PM किसान योजना की 23वीं किस्त की जारी, पश्चिम बंगाल दिवस पर लोगों से पूछा- परिवर्तन पसंद आ रहा है?
तारकेश्वर (पश्चिम बंगाल):

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को हुगली जिले के तारकेश्वर में पश्चिम बंगाल दिवस समारोह में शामिल हुए. पीएम के साथ गवर्नर आरएन रवि और प्रदेश के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मंच पर मौजूद थे. इस दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम-किसान योजना की 18, 880 करोड़ रुपये की 23वीं किस्त जारी की, जिससे पूरे भारत में 9.44 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं. ‘पश्चिमबंग दिवस' समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं कामना करता हूं कि ऐतिहासिक ‘पश्चिम बंगाल दिवस' राज्य के विकास के लिए प्रेरणा बने.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बंगाल के विकास के लिए बहुत तेज़ी से काम करना शुरू कर दिया है. बंगाल की हवा में एक नयी ताज़गी है, जैसे राज्य अब बेड़ियों से आज़ाद हो गया हो. बंटवारे के समय कांग्रेस ने बंगाल को अनाथ छोड़ दिया था और स्वतंत्रता के बाद तुष्टीकरण की राजनीति की. उन्होंने बंगाली भाषा में लोगों से पूछा- क्या आपको यह परिवर्तन पसंद आ रहा है?

मोदी ने कहा, "इस बार पश्चिमबंग दिवस की यह तारीख और भी खास है. आज़ादी के बाद बंगाल के उज्जवल भविष्य के लिए जो सपना देखा गया था, बंगाल की महान आत्माओं ने जो परिकल्पना की थी. आज पहली बार हम पश्चिमबंग दिवस पर उन सपनों को सच्चाई में बदलते देख रहे हैं. यह ऐतिहासिक तारीख पश्चिम बंगाल के विकास की प्रेरणा बने, हम एक नया और गौरवशाली इतिहास रचे. आज भाजपा-NDA सरकार में विकास के महाअभियान की शुरुआत हो रही है."
 

उन्होंने कहा कि बंगाल में दशकों तक पहले लेफ्ट और फिर TMC ने जो गड्ढे बनाए, उन्हें भरने के लिए डबल इंजन सरकार ने सुपरफास्ट गति से काम करना शुरू कर दिया है. बिजली की रफ्तार से फैसले हो रहे हैं. रुकी हुई योजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में आज यहां सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है.

पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी के दौर में हमारे बंगाल ने क्या कुछ नहीं सहा, कितने बलिदान दिए, कितने त्याग सहे, 1946 में, कोलकाता में हुई हिंसा, कितने निर्दोष बंगाली लोग उसकी भेंट चढ़ गए. बंगाल ने रक्तपात सहा, अपनों को खोया, अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखे लेकिन बंगाल ने अपनी अस्मिता, पहचान को नष्ट नहीं होने दिया. इसी का परिणाम था कि जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश हो रही थी, तब अलग पश्चिम बंगाल बनाकर उन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया. पश्चिमबंग दिवस के रूप में हम केवल एक तारीख को याद नहीं कर रहे, बल्कि पूरे इतिहास को याद कर रहे हैं.
 

उन्होंने कहा कि कल देश, दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना है. इस बार मैं बंगाल में ही योग दिवस का हिस्सा बनूंगा. स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसे योगियों की भूमि से जो संदेश जाएगा उससे पूरे विश्व का मार्गदर्शन होगा. मैं चाहूंगा कि इस बार बंगाल के कोने-कोने में योग दिवस के आयोजन हो.
 

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चंदन वत्स
मुख्य उप संपादक
एनडीटीवी इंडिया डिजिटल में सेवारत... पत्रकारिता में पी7 न्यूज चैनल से सफर की शुरुआत. पीटीएन न्यूज चैनल और ईटीवी भारत डिजिटल से होता हुआ सफर एनडीटीवी त... और पढ़ें
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