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पीएम मोदी की एक साल सोना न खरीदने की अपील, ज्वैलर्स में क्यों बढ़ने लगी हलचल

पीएम मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है. CTI के मुताबिक इससे सोने की मांग घट सकती है और खासकर शादियों के सीजन में कारोबार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

पीएम मोदी की एक साल सोना न खरीदने की अपील, ज्वैलर्स में क्यों बढ़ने लगी हलचल
  • प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद रैली में देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है
  • चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने ज्वैलरी व्यापारियों की चिंता व्यक्त की है
  • भारत में सालाना सोने की खपत लगभग सात सौ से आठ सौ टन है, जो घटकर पांच सौ टन हो सकती है

पीएम मोदी ने हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीददारी से बचने की अपील की. प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद दिल्ली और देशभर के ज्वैलरी और सोने के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और कंपनियों में हलचल देखी जा रही है. इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद ज्वैलरी इंडस्ट्री से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने अपनी चिंता जताई है.

मांग घटने और छंटनी की चिंता

CTI के मुताबिक, भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है और यहां हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. उनका कहना है कि इस अपील के बाद यह खपत घटकर 500 टन तक आ सकती है. ज्वैलर्स का मानना है कि इस तरह के आह्वान से ग्राहकों में डर का माहौल बन सकता है, जिससे खासकर शादियों के सीजन में सोने और गहनों की बिक्री पर असर पड़ सकता है. वहीं छोटे ज्वैलर्स, सुनार और कारीगरों को चिंता है कि यदि लंबे समय तक बिक्री घटती है तो कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत आ सकती है और छंटनी करनी पड़ सकती है.

पीक सीजन में इंडस्ट्री पर दबाव

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब देश में शादियों के सीजन का पीक है, जिससे गहनों की मांग में गिरावट की आशंका है. CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने भी कहा कि सोना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और शादियों में इसे अनिवार्य माना जाता है, ऐसे में यह स्थिति इंडस्ट्री के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है. CTI के मुताबिक, इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है और टाइटन, सेनको गोल्ड, कल्याण ज्वैलर्स जैसी कंपनियों के शेयर प्रभावित हो सकते हैं. बृजेश गोयल का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ा झटका है और कारोबार को बनाए रखने के लिए नई रणनीतियां अपनानी होंगी.

लेखक के बारे में
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रवीश रंजन शुक्ला
Senior Special Correspondent
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