- लोकसभा में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट को वैश्विक आर्थिक स्थिरता और आम जनता के जीवन के लिए गंभीर बताया है
- होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्गों में युद्ध के कारण भारत की तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है
- सरकार ने युद्ध प्रभावित देशों में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा और वापसी के लिए सहायता और संवाद सुनिश्चित किया है
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से दुनियाभर में जो संकट खड़ा हुआ. एशिया समेत तमाम मुल्क उसकी मार झेल रहे हैं. ऊर्जा से लेकर तेल और गैस संकट ऐसा गहराया है कि पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव जैसों देशों की तो हालत खस्ता हो चुकी है. इस बीच लोकसभा में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और उससे पैदा हो रहे वैश्विक संकट पर बिना अमेरिका, इजरायल और ईरान का नाम लिए बेहद साफ और सधा हुआ संदेश दे दिया. उन्होंने एकदम साफ लहजे में कहा कि मौजूदा हालात अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, आम लोगों के जीवन और वैश्विक स्थिरता को झकझोर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि तीन हफ्तों से अधिक समय से जारी यह संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बन चुका है और भारत चाहता है कि इस संकट पर संसद से एकजुट, जिम्मेदार और संतुलित आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे.
भारत के सामने युद्ध से खड़ी हुई कई चुनौतियां
पीएम मोदी ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट ने भारत के सामने कई अप्रत्याशित चुनौतियां लाकर खड़ी कर दी हैं. ये चुनौतियां महज आर्थिक नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दृष्टि से भी बेहद गंभीर हैं. जिस क्षेत्र में संघर्ष चल रहा है, वह भारत के वैश्विक व्यापार का एक अहम रास्ता है. खास तौर पर कच्चा तेल और गैस जैसी आवश्यक जरूरतों की पूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसके अलावा लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिससे इस संकट को लेकर भारत की चिंता स्वाभाविक रूप से और बढ़ जाती है.
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होर्मुज अंतरराष्ट्रीय मार्ग, वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा
पीएम मोदी ने लोकसभा में इशारों ही इशारों में साफ कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्ग किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अहम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्ते हैं. उन्होंने कहा कि कच्चा तेल, गैस और उर्वरक जैसी भारत की कई जरूरी आपूर्तियां इसी मार्ग से आती हैं और युद्ध के बाद यहां जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हुई है. पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में रुकावट अस्वीकार्य हैं. भारत अपने वैश्विक सहयोगियों के साथ लगातार संवाद कर रहा है ताकि मेरिटाइम कॉरिडोर सुरक्षित रहें और जरूरी सामान लेकर आने वाले जहाज बिना बाधा भारत तक पहुंच सकें.

लोकसभा में पीएम मोदी
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हर भारतीय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
लोकसभा में पीएम मोदी ने सदन को बताया कि युद्ध शुरू होते ही सरकार ने प्रभावित देशों में मौजूद हर भारतीय को प्राथमिकता के आधार पर मदद मुहैया करानी शुरू कर दी थी. उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत की और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया. अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है. ईरान से भी करीब एक हजार भारतीय वापस लाए गए हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल की पढ़ाई कर रहे युवा शामिल हैं. बदकिस्मती से कुछ लोगों की जान गई और कुछ घायल हुए, जिनके परिवारों को हर आवश्यक सहायता दी जा रही है.
भारतीय मिशन अलर्ट पर, 24x7 सहायता व्यवस्था
इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि प्रभावित देशों में भारत के सभी मिशन पूरी तरह एक्टिव हैं. वहां काम करने वाले भारतीयों के साथ‑साथ पर्यटकों को भी हर संभव मदद दी जा रही है. मिशनों की ओर से नियमित एडवाइजरी जारी की जा रही हैं ताकि लोग सतर्क रह सकें. साथ ही भारत और विदेशों में 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं. इन माध्यमों से प्रभावित लोगों को त्वरित जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.
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तेल‑गैस सप्लाई पर असर कम रखने की रणनीति
पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के बाद समुद्री मार्गों पर हालात चुनौतीपूर्ण हुए हैं, खासकर उन रास्तों पर जहां से भारत को तेल, गैस और उर्वरक मिलते हैं. इसके बावजूद सरकार का पूरा प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर इसका कम से कम असर पड़े. एक तरफ जहां देश अपनी जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, इसलिए घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी गई है. साथ ही देश में ही एलपीजी उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है ताकि आम परिवारों को परेशानी न हो.
एनर्जी सिक्योरिटी में बीते दशक की तैयारी बनी ढाल
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने संकट के समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया है. एक तरफ जहां पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, आज यह संख्या 41 तक पहुंच चुकी है. इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है. भारत के पास अब 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और इसे 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक बढ़ाने पर काम चल रहा है. इसके अलावा रिफाइनिंग क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है.
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वैकल्पिक ईंधन और रिन्यूएबल एनर्जी से मजबूत होता भारत
पीएम मोदी ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग, रेलवे के बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण, मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने देश की तेल पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया है. साथ ही आज पेट्रोल में करीब 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करोड़ों बैरल तेल आयात की बचत हो रही है. रेलवे के विद्युतीकरण से डीजल की खपत में भी भारी कमी आई है. मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है.
किसानों और खाद आपूर्ति की मजबूत तैयारी
लोकसभा में पीएम मोदी ने ये भी कहा कि युद्ध का असर खेती पर न पड़े, इसके लिए सरकार पूरी तरह तैयार है. देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है और खरीफ सीजन की तैयारी पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है. बीते एक दशक में छह नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी है. डीएपी और अन्य उर्वरकों का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है. इसके साथ‑साथ खाद के आयात को भी विविध देशों से जोड़कर सुरक्षित बनाया गया है.
कूटनीति, शांति और मानवता का पक्ष
पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत ने शुरुआत से ही इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है. नागरिकों, ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले अस्वीकार्य हैं. भारत का मानना है कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का स्थायी समाधान है. भारत हर प्रयास शांति स्थापित करने और मानवता के हितों की रक्षा के लिए कर रहा है. आखिर में पीएम मोदी ने कहा कि यह संकट लंबे समय तक असर डाल सकता है, इसलिए देश को एकजुट और सतर्क रहना होगा. अफवाह फैलाने और जमाखोरी करने वालों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है. सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है.
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