Petrol Diesel Price Hike Rumors: मिडिल ईस्ट में युद्ध और अमेरिका-ईरान टकराव की वजह से तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. इसकी वजह से तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर सोशल मीडिया में अफवाहों के चलते कुछ खुदरा दुकानों पर अफरा-तफरी मच गई और लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं.नपेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के मुताबिक, इस साल फरवरी महीने में देश में पेट्रोल की खपत 3369 हज़ार मीट्रिक टन थी, जो मार्च महीने में युद्ध के दौरान 12.16% तक बढ़कर 3779 हज़ार मीट्रिक टन तक पहुच गई.
फरवरी महीने में बढ़ी खपत
इस दौरान डीजल की बिक्री में ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज़ की गई. पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार इस साल फरवरी महीने में देश में डीजल की खपत 7661 हजार मीट्रिक टन थी, जो मार्च महीने में मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान 13.90% बढ़कर 8726 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गई.
पेट्रोलियम मंत्रालय की स्थिति साफ
अब 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधान सभा चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सोशल मीडिया पर अटकलें बढ़ती जा रही हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा, "अफवाहों के चलते कुछ खुदरा दुकानों पर अफरा-तफरी मची हुई है और लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं. सूचित किया जाता है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है."
दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कार्गो जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है, जिसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत काफी बढ़ गई है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल, 60% एलपीजी और करीब 50% नेचुरल गैस का आयात करता है. ऐसे में पिछले करीब दो महीनों के दौरान महंगे तेल और गैस के आयात पर खर्च भी काफी बढ़ चुका है.
कच्चे तेल पर सरकारी रिपोर्ट
पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी अनिश्चितता की वजह से 29 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल की कीमत बढ़कर US$ 116.52/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. सरकारी आकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानी, कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 29 अप्रैल, 2026 को 47.51 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ, मतलब 68.84 % की बढ़ोतरी. अप्रैल, 2026 के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 29 अप्रैल तक 114.25 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर थी.
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार वित्तीय साल 2024-25 में राज्यों की POL (Petroleum, Oil, and Lubricants) प्रोडक्ट्स पर सेल्स टैक्स से कुल कलेक्शन 3,02,058.5 करोड़ रुपया था, जो वित्तीय साल 2025-26 के पहले 9 महीने में टोटल कलेक्शन 2,29,168.5 करोड़ रुपया रहा. जाहिर है, पेट्रोल-डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी से राज्यों का राजस्व बढ़ा है, और उन्हें इस संकट के दौर में काफी फायदा मिल रहा है.
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