"नरेंद्र मोदी क्लास के उन छात्रों में था जो चीजें जल्दी समझ लेते थे और हमेशा कुछ नया करने को तैयार रहते थे."....ये कहना है कि स्कूल में उनके टीचर रहे एसची पटेल का. NDTV से Exclusive बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित कई दिलचस्प यादें साझा कीं. शिक्षक पटेल के मुताबिक रेंद्र मोदी शुरू से ही तेज दिमाग, जल्दी सीखने वाले और हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले छात्र थे. कभी वे स्वामी विवेकानंद पर भाषण देते, कभी स्कूल के नाटक में तलवार लेकर मंच पर छा जाने वाला कलाकार बन जाते तो भी तालाब से मगरमच्छ का बच्चा उठाकर घर ले आने वाला शरारती छात्र...इस रिपोर्ट में जानिए पीएम मोदी के शिक्षक ने उनके बारे में क्या-क्या बताया?
हर गुरुवार मंच पर नजर आता थे मोदी
एचसी पटेल ने बताया कि उन्होंने जून 1965 से मई 1967 के बीच वडनगर के बीएन हाई स्कूल में कक्षा 10 और 11 में नरेंद्र मोदी को गणित और विज्ञान पढ़ाया था. उन दिनों स्कूल में हर गुरुवार सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते थे. जैसे ही मंच सजता, नरेंद्र मोदी वहां जरूर दिखाई देते. पटेल के मुताबिक, वह स्वामी विवेकानंद जैसे नेताओं पर भाषण दिया करते थे. कम उम्र में भी उन्हें लोगों के सामने बोलने में झिझक नहीं थी और यही वजह थी कि वह स्कूल के कार्यक्रमों का अहम हिस्सा बन गए थे.
जब तलवार लेकर मंच पर उतरे और 10 मिनट तक बजी तालियां
पटेल को आज भी स्कूल का वह नाटक याद है, जिसे स्कूल की चहारदीवारी बनाने के लिए धन जुटाने के मकसद से आयोजित किया गया था. उस नाटक में नरेंद्र मोदी ने लोकनायक जोगीदास खुमाण का किरदार निभाया था. हाथ में तलवार, काठियावाड़ी बोली में संवाद और मंच पर पूरा आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था. शिक्षक पटेल बताते हैं कि कार्यक्रम देखने करीब 10 हजार लोग पहुंचे थे. नाटक खत्म हुआ तो दर्शकों ने लगभग 10 मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाईं. उनके मुताबिक, उस दिन नरेंद्र मोदी ने पूरे कार्यक्रम की महफिल लूट ली थी.
एक चीज छोड़कर हर गतिविधि में हिस्सा लेते थे
पटेल बताते हैं कि स्कूल में खेलकूद हो, सांस्कृतिक कार्यक्रम हों या कोई अन्य गतिविधि, नरेंद्र मोदी लगभग हर जगह शामिल होना चाहते थे. हालांकि एक अपवाद जरूर था. अगर किसी कार्यक्रम का समय स्थानीय आरएसएस शाखा से टकरा जाता, तो वह वहां नहीं पहुंच पाते थे. शिक्षक के अनुसार, उस समय वह 20 से 25 अन्य युवाओं के साथ नियमित रूप से शाखा में भी जाते थे.
मुस्लिम दोस्त को घर ले जाकर साथ खाना खाते थे
पूर्व शिक्षक ने मोदी के छात्र जीवन का एक और पहलू साझा किया. उन्होंने बताया कि कक्षा 11 के दौरान नरेंद्र मोदी कभी-कभी अपने एक मुस्लिम सहपाठी को घर लेकर आते थे. दोनों साथ बैठकर खाना खाते थे. पटेल कहते हैं कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के प्रति सम्मान और सहज व्यवहार उनमें स्कूल के दिनों से दिखाई देता था. यही वजह थी कि उनके दोस्त अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते थे.
तैराकी का शौक और मगरमच्छ वाला किस्सा
वडनगर का शर्मिष्ठा तालाब नरेंद्र मोदी की पसंदीदा जगहों में शामिल था. पटेल बताते हैं कि तालाब सालभर पानी से भरा रहता था और वह अक्सर वहां तैरने जाते थे. इसी तालाब से जुड़ा एक किस्सा शिक्षक आज भी याद करते हैं. उनके मुताबिक, एक बार नरेंद्र मोदी तालाब से मगरमच्छ का एक छोटा बच्चा उठाकर घर ले आए थे. घर पहुंचते ही मां हीराबेन परेशान हो गईं. बाद में परिवार ने उसे वापस तालाब में छोड़ दिया.
स्कूल से फुर्सत मिलते ही नरेंद्र वहां पहुंच जाते थे. शिक्षक बताते हैं कि वह दिन में दो बार वडनगर रेलवे स्टेशन जाते और यात्रियों को चाय बेचने में पिता की मदद करते थे. दुकान स्कूल के पास एक बरगद के पेड़ से करीब 50 फीट की दूरी पर थी. पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारी, दोनों को वह साथ लेकर चलते थे.
ये भी पढ़ें: PM Modi @25: भारतीय राजनीति के रिकॉर्ड बुक में मोदी कहां खड़े हैं ? नेहरू, इंदिरा और राजीव के ये कीर्तिमान बाकी
पुराने शिक्षकों को पांच सितारा होटल में ठहराया
साल 2001 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब भी एचसी पटेल उनसे मिले थे. शिक्षक बताते हैं कि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उन्होंने भीड़ के बीच से आवाज लगाई, "ओ नरेंद्र भाई...". लेकिन आसपास मौजूद लोगों और शोरगुल की वजह से मोदी उन्हें सुन नहीं पाए. बाद में किसी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके शिक्षक उन्हें बुला रहे हैं. यह सुनकर मोदी सीधे उनके पास पहुंचे, उनसे मुलाकात की और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया. पटेल बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी अपने शिक्षकों को नहीं भूले. उन्होंने याद किया कि मोदी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपने पुराने प्रिंसिपल रसवैद्य मणियार का भी जिक्र किया था. बाद में 2005 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपने प्राथमिक और हाई स्कूल के 26 शिक्षकों का सम्मान किया. पटेल और उनकी पत्नी को अहमदाबाद लाने के लिए गाड़ी भेजी गई. सभी शिक्षकों को पांच सितारा होटल में ठहराया गया और उन्हें व्यक्तिगत उपहार भी दिए गए.
ये भी पढ़ें: नरेंद्र मोदी ने अपनी मां से किए थे दो वादे, इन वादों ने बदल दी भारत की तस्वीर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं