- संसद का सबसे लंबा 'साइन डाई' दौर; 41 दिन बाद भी खत्म नहीं हुआ मानसून सत्र
- संसद का अनोखा रिकॉर्ड: 1975 का भी टूटा आंकड़ा, 41 दिन से सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
- महिला आरक्षण या कोई और बड़ा दांव, दुर्गा पूजा पर क्या है सरकार का प्लान
संसद की बैठक पिछले पांच हफ़्तों में नहीं हुई है मगर मानसून अभी भी जारी है. कहने को तो मानसून सत्र की आखिरी बैठक 13 अगस्त को हुई थी मगर उसके बाद से ये सत्र Sine Die है, जिसका मतलब होता है बिना किसी तिथि के अनिश्चित काल के लिए. इसलिए आप तकनीकी तौर पर कह सकते हैं कि मानसून सत्र अभी भी जारी है. सरकार ने मानसून सत्र को खत्म करने की कोई तारीख नहीं दी है और ना ही Prorogue यानि सत्रावसान किया है.
संसद का अनोखा रिकॉर्ड: 1975 का टूटा आंकड़ा
एनडीटीवी ने भारतीय संसद की रीति और कार्यविधि की जानकारी के जरिए जानने की कोशिश की है कि आखिर में संसदीय परंपरा क्या कहती है. इससे ये जानकारी मिलती है कि अमूमन किसी भी सत्र के खत्म होने के कुछ दिनों तक सत्र को Sine Die रखा जाता है और फिर उसका सत्रावसान कर दिया जाता है ना कि पांच हफ्ते तक.
उसी तरह 1993 में 26 दिन, 1988 में 25 और 20 दिन, 1979 में 16 दिन और 1984 में 15 दिनों के बाद सत्र का सत्रावसान किया गया था. मगर कोई भी सत्र 40 दिनों का आंकड़ा नहीं छू पाया है सिवाय मौजूदा मानसून सत्र के. इसके नजदीक पहुंचने वाला सत्र 2015 का है और वो भी मानसून सत्र ही था जब 28 दिनों तक सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया था.
अभी भी जिंदा है मानसून सत्र
अब सबसे बड़ा सवाल है कि Sine Die क्यों? आप इसको समझे कि मौजूदा मानसून सत्र को विराम दिया गया है. उसको फिर से बुलाने की कोई तारीख नहीं दी गई है और यह कभी भी बुलाई जा सकती है. संविधान की नजर में संसद का मानसून सत्र अभी भी जिंदा है क्योंकि किसी भी सत्र का सत्रावसान राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है वो भी सरकार के सिफारिश पर धारा 85(2) के तहत. यह पहले भी हो चुका है सदन को Sine Die रखा गया है और कुछ दिनों बाद उसे फिर बुलाया गया है.
दुर्गा पूजा पर सरकार कर सकती है बिलों पर बड़ा ऐलान
सरकार की मंशा साफ है कि उसके पास कुछ प्लान है जो अभी तक बाहर नहीं आया है. अभी तक इस बात की चर्चा थी कि सरकार परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को पास कराने की कोशिश करेगी क्योंकि अप्रैल के विशेष सत्र में ये बिल गिर गए थे. मगर अब राजनीति में बहुत कुछ बदल गया है, डीएमके अभी भी परिसीमन बिल के पक्ष में नहीं है. लेकिन अब सरकार परिसीमन को छोड़कर महिला आरक्षण पर फोकस करना चाहती है और लुटियंस के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि सरकार महिला आरक्षण बिल इसी नवरात्रि में ले आए.
यदि ऐसा हुआ तो ये बिल दोनों सदनों में पास हो जाएगा और इसको मुद्दा बनाकर बीजेपी उत्तरप्रदेश और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव में जाना चाहेगी.
यही वजह है कि सरकार ने अभी तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है. वरना नया सत्र बुलाने के लिए कम से कम तीन हफ्ते का नोटिस सांसदों को देना पड़ता है ऐसी परंपरा है. यही वजह है कि पिछले 41 दिनों से मानसून सत्र जारी है.
यह भी पढ़ें : हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र, राज्यसभा में 39% तो लोकसभा में 19% ही हुआ काम
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं