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परिसीमन और FCRA पर मोदी सरकार का क्या है प्लान? समझिए

सरकार परिसीमन के प्रोसेस के लिए संसद की मंजूरी लेने की नई कोशिश करने से पहले डीएमके की चिंताओं को दूर करके उसे साथ लाना चाहती है.

परिसीमन और FCRA पर मोदी सरकार का क्या है प्लान? समझिए
सरकार डीएमके और एनसीपी(एसपी) को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है. (File Photo)
  • एफसीआरए और परिसीमन विधेयकों को लेकर कांग्रेस और सरकार में ठनी हुई है.
  • सोमवार के एजेंडे में चार बिल पेश करने की योजना है, लेकिन इसमें FCRA का कोई जिक्र नहीं है.
  • सरकार परिसीमन बिल पर पहले डीएमके की चिंताओं को दूर करके उसे साथ लाना चाहती है.
नई दिल्ली:

संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सोमवार को लोकसभा के एजेंडा में FCRA यानी 'फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' शामिल नहीं है. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकार इस विवादित कानून को लेकर थोड़ी नरमी बरत रही है, जिससे DMK और NCP(SP) जैसी पार्टियों को खुश किया जा सके. ये पार्टियां इस कानून के प्रावधानों का विरोध कर रही हैं, लेकिन सत्ताधारी गठबंधन इन्हें परिसीमन की प्रक्रिया में संभावित समर्थक के तौर पर देख रहा है. सोमवार यानी आज लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में तस्वीर और साफ हो जाएगी. इस मीटिंग में आगे के एजेंडे पर फैसला लिया जाता है.

दरअसल एफसीआरए और परिसीमन विधेयकों को लेकर कांग्रेस और सरकार में ठनी हुई है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस पर कुछ ईसाई संगठनों का दबाव है. वे चाहते हैं कि कांग्रेस एफसीआरए का विरोध करे और इसे किसी भी सूरत में पारित न होने दे. सरकारी सूत्रों का दावा है कि परिसीमन विधेयक का विरोध करने के मुद्दे पर कांग्रेस में एक राय नहीं है. यही वजह है कि संसद का गतिरोध दूर करने के लिए वह सरकार के साथ सहमति नहीं बना पा रही है.

अगले तीन दिनों में सरकार की क्या योजना?

अगर संसद के 13 अगस्त को खत्म होने वाले मॉनसून सत्र के बचे हुए चार दिनों में बिल को पास कराने के लिए पेश करना है, तो उस पर चर्चा का वक्त तय करना होगा. सोमवार के एजेंडे में चार बिल पेश करने की योजना है, लेकिन इसमें FCRA का कोई जिक्र नहीं है.

सरकार विधेयक के खिलाफ आलोचना को संबोधित करने के लिए एफसीआरए पर पूर्ण बहस को प्राथमिकता दे सकती है. विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक समूहों, विशेष रूप से ईसाई निकायों के भारी विरोध के बीच, इसे अभी तक चर्चा के लिए नहीं लिया गया है.

विदेशी फंडिंग के प्रमुख प्राप्तकर्ता ईसाई समूह ने प्रस्तावित संशोधनों की निंदा करते हुए कहा है कि इससे उनके धर्मार्थ कार्यों को खतरा है और अगर उनका एफसीआरए लाइसेंस वापस ले लिया जाता है या रिन्यू नहीं किया जाता है, तो सरकार को उनकी संपत्ति जब्त करने की अनुमति मिल जाएगी.

हालांकि, जिस वजह ने बीजेपी के लिए चीजों को सियासी तौर पर पेचीदा बना दिया है, वह है गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में कई संप्रदायों के चर्चों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक डेलिगेशन की मांग को डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन द्वारा दिया गया समर्थन, कि विधेयक को या तो वापस ले लिया जाए या संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाए.

वहीं, सरकार का कहना है कि अगर किसी संस्था का FCRA लाइसेंस खत्म होता है, तो उसकी संपत्तियों की देखभाल के लिए एक अंतरिम  व्यवस्था रहेगी, जिससे किसी भी व्यवधान की स्थिति में संपत्तियों का दुरुपयोग न हो. जब मूल संस्था को नया लाइसेंस मिल जाएगा, तो संपत्ति उन्हें वापस सौंप दी जाएगी. सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस विधेयक का मकसद ईसाई समुदाय या किसी खास वर्ग को निशाना बनाना नहीं बल्कि विदेशी चंदे का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है.

यह बिल पिछले सत्र में 25 मार्च को लोक सभा में रखा गया था. सरकार अगले हफ्ते इसे चर्चा और पारित कराने के लिए लाएगी. खुद गृह मंत्री अमित शाह इस पर होने वाली चर्चा का जवाब देंगे. माना जा रहा है कि अपने जवाब में वे इस बिल को लेकर व्यक्त की जा रही सभी आशंकाओं का जवाब भी देंगे.

डीएमके की चिंताएं दूर करने में लगी सरकार!

सरकार परिसीमन के प्रोसेस के लिए संसद की मंजूरी लेने की नई कोशिश करने से पहले डीएमके की चिंताओं को दूर करके उसे साथ लाना चाहती है. इसके साथ ही, 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू होने वाला है, इसलिए कुछ सांसदों का कहना है कि सरकार FCRA बिल लाकर इस क्षेत्रीय पार्टी को मुश्किल स्थिति में नहीं डालना चाहेगी.

सरकार के कुछ मंत्रियों का मानना है कि डीएमके परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है. यह एक बड़ा घटनाक्रम होगा क्योंकि ऐसे में दक्षिण भारतीय दलों के हाथ से विरोध का मुद्दा खत्म हो सकता है. डीएमके ने सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है. पचास फीसदें सीटें बढ़ाने का प्रावधान बिल में रखने की बात गृह मंत्री कह चुके हैं. जबकि परिसीमन को जनगणना से अलग करने का प्रस्ताव भी है. ऐसे में डीएमके को बिल का समर्थन करने में परेशानी नहीं आनी चाहिए.

NCP (SP) की सुप्रिया सुले ने भी FCRA बिल का विरोध किया है. सरकार संशोधन बिल के लिए उनकी पार्टी का समर्थन पाने की उम्मीद कर रही थी.

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को अमित शाह के साथ मीटिंग के लिए अपने राज्य के चर्च संगठनों के एक समूह के साथ शामिल होने के बाद मीडिया को बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस बिल पर 12 अगस्त को बहस होने की उम्मीद है.

विपक्ष के विरोध की वजह से संसद में जारी गतिरोध ने अनिश्चितता बढ़ा दी है, क्योंकि सरकार पूरी तरह से बहस चाहती है, जिससे गृह मंत्रालय बिल को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब दे सके.

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