पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रोटेस्ट हो रहा है. PoJK में नागरिकों ने पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई क्रूर हिंसा में मारे गए लोगों के शवों को बाहर निकाला और उन्हें प्रोटेस्ट वाली जगहों पर रख दिया, जहां हजारों लोग जमा हुए. शवों के चारों ओर जमा भीड़ ने जोर-जोर से 'इंक़लाब' के नारे लगाए. वे पाकिस्तानी सेना के आतंक के सामने पीछे हटने से इनकार कर रहे हैं. तनाव के बीच, गुरुवार सुबह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने रावलकोट में एक बड़ा अभियान चलाया, जिसमें मुख्य प्रदर्शन स्थलों को निशाना बनाया गया. यह अभियान सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ. इसमें पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवानों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की.
ऑपरेशन के पहले दो घंटों यानी सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच कम से कम 7 आम नागरिकों की मौत हो गई और 23 अन्य लोग घायल हो गए. इन मौतों के बाद, 7 जून से PoK में चल रही अशांति के दौरान मरने वालों की कुल तादाद 153 हो गई है. खबरों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और आम नागरिकों के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया. एक हमले में स्थानीय निवासी वसीम शकील का घर नष्ट हो गया.
उमर फारूक चौक के आसपास झड़पें और टकराव जारी रहा, जहां हजारों प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे. बताया जा रहा है कि सुरक्षाकर्मियों के साथ हुए टकराव में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. वहीं, मस्जिदों के लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल करके लोगों को उस इलाके में बुलाया गया और उनसे इस कार्रवाई का विरोध करने की अपील की गई.
रावलकोट में क्यों हो रहा प्रोटेस्ट?
हालिया कार्रवाई जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) से जुड़े महीनों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद हुई है. इस कमेटी ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक अधिकारों और अधिकारियों द्वारा किए गए वादों को लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं. इस आंदोलन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर अपने समर्थकों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है. वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहले JAAC और उसके समर्थकों पर हिंसा करने और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगाया है.
इससे पहले भी इसी तरह की घटनाओं सामने आ चुकी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि जुलाई में सुरक्षा बलों और JAAC समर्थकों के बीच हुई झड़पों में नौ लोगों की मौत हो गई थी. यह हिंसा तब भड़की, जब JAAC के एक प्रस्तावित मार्च को लेकर तनाव पैदा हो गया और क्षेत्र में चुनावी व्यवस्थाओं का विरोध किया गया.
लगातार चल रहे इस विरोध-प्रदर्शन के बीच, इलाके में संचार सेवाओं पर भी पाबंदियां लगा दी गईं.
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