विज्ञापन

ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: अचूक, अद्वितीय, आत्मनिर्भर भारतीय सैन्यबल बेमिसाल

Operation Sindoor First Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर का एक साल हो गया है और भारतीय सेना के शौर्य पराक्रम को आज पूरा देश याद कर रहा है, जिन्होंने पहलगाम हमले के गुनहगारों को सबक सिखाने के लिए बेहद कम वक्त में सटीक ढंग से हमला किया.

ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: अचूक, अद्वितीय, आत्मनिर्भर भारतीय सैन्यबल बेमिसाल
India's Operation Sindoor 1st Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर का एक साल
  • भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत बिना सीमा पार किए 23 मिनट में पाक के 9 आतंकी लॉन्चपैड सटीक तरीके से नष्ट किए
  • लश्कर-ए-तैबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख आतंकी ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया
  • भारत ने 10 मई को पाक के 11 एयरबेस पर हमला कर उसकी वायु सेना की क्षमता 20 प्रतिशत कम कर दी
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025) के जवाब में 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने दुश्मन और दुनिया को ये दिखा दिया कि अब वो छद्म युद्ध के जरिये आतंकवादी हमलों को और नहीं सहेगा. 7 मई को 23 मिनट के भीतर भारतीय वायुसेना ने सीमापार किए बिना जिस सटीक ढंग से बहावलपुर, मुरीदके में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. सीमा पार किए बिना की गई ये कार्रवाई अचूक, अद्वितीय, आत्मनिर्भर भारतीय सैन्यबल की बेमिसाल रणनीति का उदाहरण है. 

Operation Sindoor: 9 आतंकी 23 मिनट में ध्वस्त

भारत ने पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में भयानक हमला किया. भारत ने पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर में फैले 9 महत्वपूर्ण आतंकी लॉन्चपैड नष्ट कर दिए. इसमें लश्कर-ए-तैबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख ठिकाने ध्वस्त हो गए. पीओके में आतंकी ठिकानों से लेकर पंजाब की मुख्य भूमि में सियालकोट और बहावलपुर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों तक भारत ने अपनी पहुंच, सटीक पोजीशन और मजबूत इरादे का प्रदर्शन किया.

नूर खान एयरबेस और सरगोधा एयरबेस समेत महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हमले की सीमा में आ गए. संदेश स्पष्ट था कि पाकिस्तान कोई भी सुरक्षित ठिकाना पहुंच से बाहर नहीं है. 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया. इनमें आईसी-814 अपहरण से जुड़ा यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और पुलवामा हमले से जुड़ा मुदस्सिर अहमद जैसे बड़े आतंकी शामिल थे. ऑपरेशन सिंदूर ने परमाणु ब्लैकमेल को असरदार तरीके से नाकाम कर दिया.

दुश्मन का अधिकतम नुकसान, देश में न्यूनतम असर

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश युद्धों में नुकसान कभी सीमित नहीं रहता. यह सीमाओं, अर्थव्यवस्थाओं और आम आबादी तक फैल जाता है. दोनों पक्षों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने इस पैटर्न को तोड़ दिया. भारत ने पाकिस्तानी आतंकी और सैन्य बुनियादी ढांचे को टारगेट करके उसे गंभीर चोट पहुंचाई. जबकि भारत के भीतर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. पाकिस्तानी मिसाइलों से कोई नुकसान नहीं हुआ, क्षेत्रीय अस्थिरता नहीं फैली और न ही कोई लंबे वक्त तक असर करने वाला आर्थिक नुकसान हुआ. कम वक्त में गहरी चोट करने वाली ये स्ट्राइक सुनियोजित योजना और उसे बेहतरीन तरीके से लागू करने का परिणाम थी. भारतीय वायु सेना ने राफेल जेट, स्कैल्प मिसाइलों और हैमर बमों का उपयोग करके मात्र 23 मिनट में पाकिस्तान की चीनी एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को चकमा दिया और मिशन को पूरा किया जो भारत की तकनीकी बढ़त को दर्शाता है.

ये भी पढ़ें - ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान में कैसे मची थी घबराहट? ऑस्ट्रिया के वॉर एक्सपर्ट ने बताया एक साल पहले क्या हुआ था

पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह किए गए 

भारत ने 10 मई को हमले का दायरा बढ़ाते हुए नूर खान एयरबेस, रफीकी एयरबेस, मुरीद एयरबेस, सुक्कुर एयरबेस, सियालकोट एयरबेस, पसूर एयरबेस, चुनियन एयरबेस, सरगोधा एयरबेस, स्कार्दू एयरबेस, भोलारी एयरबेस और जैकबबाद एयरबेस सहित 11 महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान की महत्वपूर्ण हवाई और परिचालन क्षमताएं कमजोर हो गईं. भारत एक ही अभियान में परमाणु हथियार संपन्न देश के 11 एयरबेस पर हमला करने वाला पहला देश बन गया.इसने पाकिस्तान की वायु सेना की 20 फीसदी संपत्तियों को नष्ट कर दिया. भोलारी एयरबेस पर भारी नुकसान हुआ.इसमें स्क्वाड्रन लीडर उस्मान यूसुफ की मृत्यु और महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों को नष्ट करना शामिल था.

पाकिस्तान मिसाइल और ड्रोन अटैक नाकाम

स्वदेशी आकाश कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, एस-400 आदि के जरिये  भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम ने सैकड़ों पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को रोककर निष्क्रिय कर दिया. इस प्रदर्शन ने न केवल भारतीय आकाश को सुरक्षित किया बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की परिचालन परिपक्वता को भी प्रदर्शित किया. इसने वैश्विक स्तर पर हाईटेक डिफेंस सिस्टम के निर्यातक के रूप में इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया. ऑपरेशन सिंदूर ने आधुनिक युद्ध में एक नया मानक स्थापित किया.

ये भी पढ़ें - रूस-यूक्रेन, मिडिल ईस्ट के अंतहीन संघर्षों के बीच ऑपरेशन सिंदूर क्यों है मिसाल, समझिए भारत की युद्धनीति का कमाल

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

आयातित प्लेटफार्मों पर निर्भरता से स्वदेशी क्षमता में विश्वास तक ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र की ताकत का प्रदर्शन किया. ब्रह्मोस, आकाश, आकाशतीर, तेजस, लोइटरिंग मुनिशन्स, स्काईस्ट्राइकर और डीआरडीओ की डी-4 एंटी-ड्रोन प्रणाली जैसी प्रणालियों ने सशस्त्र बलों को वायु, भूमि और समुद्र में सटीकता, सुरक्षा और प्रभुत्व प्रदान किया. इन हथियारों ने न केवल आतंकी ढांचे और दुश्मन के खतरों को निष्क्रिय किया, यह भी साबित किया कि भारतीय प्रौद्योगिकी निर्णायक युद्धक्षेत्र में परिणाम दे सकती है. ऑपरेशन सिंदूर ने मेड फॉर इंडिया से मेड बाय इंडिया की ओर एक बदलाव का प्रतीक था, जिसमें स्वदेशी हथियारों ने भारत की सफलता सुनिश्चित की.
 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com