अब जरूरतमंद को ऑर्गन के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं, सरकार ने बदले ये नियम

ऑर्गन डोनेशन को प्रोस्साहित करने के लिए सरकार ने 'वन नेशन वन पॉलिसी ऑफ आर्गन डोनेशन' के नियम लागू कर दिए हैं. अभी तक ऑर्गन लेने के लिए डोमिसाइल की जरूरत होती थी. व्यक्ति केवल अपने ही राज्य में ऑर्गन लेने के लिए रजिस्टर कर सकता था. सरकार ने इस नियम को बदल दिया है.

नई दिल्ली:

पश्चिमी देशों की तरह भारत में ऑर्गन डोनेशन का चलन बढ़ रहा है, लेकिन आबादी के हिसाब से यह अभी भी कम है. अब भारत सरकार ने इस दिशा में वन नेशन, वन पॉलिसी लागू की है. इससे ऑर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांटेशन आसान हो सकेगा. भारत सरकार ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जरूरत को हटाने का निर्णय लिया है. सभी राज्यों को इसके बारे में सूचित किया गया है. अब जरूरतमंद व्यक्ति देश के किसी भी राज्य में जाकर ऑर्गन प्राप्ति के लिए रजिस्टर कर सकेगा और ट्रांसप्लांट भी करवा पाएगा. अभी तक राज्यों की ऑर्गन अलॉटमेंट पॉलिसी में ज़रूरतमंद व्यक्ति को ऑर्गन लेने के लिए डोमिसाइल की जरूरत होती थी. वह केवल अपने ही राज्य में ऑर्गन लेने के लिए रजिस्टर कर सकता था.


नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NATTO) की गाइडलाइन के अनुसार, 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के ऑर्गन लेने पर पाबंदी थी. लेकिन भारत सरकार ने इस आयु सीमा को खत्म करने का फैसला किया है. यह निर्णय जीवन जीने के अधिकार को ध्यान में रखते हुए भी लिया गया है. अब किसी भी उम्र का व्यक्ति ऑर्गन लेने के लिए खुद को रजिस्टर कर सकेगा. 

यह सामने आया की कुछ राज्य रजिस्ट्रेशन के दौरान ऑर्गन के जरूरतमंद व्यक्ति से 5,000-10,000 रुपये फीस के लिए लेते थे. सरकार ने सभी राज्यों को इसस वाकिफ कराया है. जहां भी ऑर्गन के लिए पैसे लिए जा रहे थे, वहां इसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाएगा.

ऑर्गन डोनेशन से मरीजों को जरूरत पड़ने पर ट्रांसप्लांटेशन में आसानी होती है. मसलन, सर्जिकल टेक्नीक्स, ऑर्गन प्रिजर्वेशन और फार्माको-इम्युनोलॉजिक जैसी सुविधाओं में इम्प्रूवमेंट्स से यह आसान हुआ है.  इस बारे में जागरूकता लाने को लेकर स्कूल के पाठक्रम में ऑर्गन डोनेशन का पाठ जोड़ा जा सकता है. 

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