- उमर अब्दुल्ला ने 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव मिलने का आरोप लगाया
- भाजपा के नेता रविंदर रैना ने उमर अब्दुल्ला के आरोपों को बेबुनियाद और गुमराह करने वाला करार दिया और सबूत मांगे
- उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी के कारणों का जवाब मांगा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि जम्मू के नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के एक विधायक को पाला बदलने के लिए मनाने की कोशिश में ₹20 से ₹30 करोड़, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था. श्रीनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने दावा किया कि यह ऑफर विधायक के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान BJP से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने दिया था. उन्होंने कहा कि विधायक ने उन्हें इस कथित ऑफर के बारे में खुद बताया था.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कथित कोशिश चुनी हुई सरकार को कमजोर करने के प्रयासों को दर्शाती है. मगर नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी के विधायक बिकने वाले नहीं हैं और वे जनता से मिले जनादेश के साथ खड़े रहेंगे.
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#WATCH | Srinagar, Jammu and Kashmir: Chief Minister Omar Abdullah says, "Where your (BJP) greed for money and ministries failed, you're telling my MLA in a closed room, "Come with us. When you come, we'll give you a statehood." A Supreme Court lawyer, a BJP official, tells one… pic.twitter.com/yG7rlbt82H
— ANI (@ANI) July 11, 2026
अब्दुल्ला ने केंद्र से पूछे सवाल
अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी को लेकर भी केंद्र से सवाल किया. उन्होंने कहा कि केंद्र को अब यह बताना चाहिए कि चुनी हुई सरकार के सत्ता में आने के लगभग 18 महीने बाद भी उसका वादा क्यों पूरा नहीं हुआ है. अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार ने टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुना—भले ही इसके लिए उन्हें राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी—और केंद्र को लोगों से किए गए वादे को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया. उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र ने J&K में हालात सामान्य करने के लिए तीन चरणों वाली प्रक्रिया तय की थी, जिसकी शुरुआत परिसीमन से होनी थी.
वादा पूरा करने की मांग की
उस कवायद पर सवाल उठाते हुए अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि यह तब की गई जब देश के ज्यादातर हिस्सों में ऐसी कोई कवायद नहीं हुई थी, और दावा किया कि इसे एक खास राजनीतिक पार्टी और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था. इन आपत्तियों के बावजूद, उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने इस प्रक्रिया को नेक नीयत से स्वीकार किया, यह उम्मीद करते हुए कि इसके बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा. अब्दुल्ला ने कहा, "लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग अभी भी केंद्र से अपना वादा पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं." मुख्यमंत्री ने फिर कहा कि राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह बिना किसी और देरी के अपना वादा पूरा करे.
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