भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. भोपाल स्थित अरबों रुपये की 522 एकड़ पुश्तैनी जमीन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में जबलपुर हाईकोर्ट ने मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला की याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट के इस फैसले से 51 साल पुरानी पारिवारिक जमीनी विवाद खत्म हो गया. अब इस पुश्तैनी जमीन खत्म पर उनके रिश्ते के भाई वीएम सिंह का अधिकार होगा. कोर्ट के फैसले के बाद भोपाल में जमीन नामांतरण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है.
1975 से चल रहा था यह विवाद
यह मामला भोपाल के हुजूर तहसील में आने वाले बहेटा, बोरबन और लाऊखेड़ी क्षेत्र की 522 एकड़ बेशकीमती जमीन से जुड़ा है. कानूनी रूप से इस विवाद की शुरुआत साल 1975 में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक बंटवारे के मुकदमे से हुई थी.

maneka Gandhi case 522 acre land dispute mp high court decision. मेनका गांधी अपने बेटे वरुण गांधी के साथ.
कोर्ट ने क्या कहा?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मेनका गांधी और उनकी अंबिका शुक्ला बहन की याचिका को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि जब समझौते के तहत अधिकार पहले ही समाप्त हो चुके थे, तो अब आपत्ति जताने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता.
आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका
हाईकोर्ट में दायर याचिका में मेनका गांधी की ओर से आरोप लगाया गया था कि उनके भाई वीएम सिंह ने बिना उन्हें पक्षकार बनाए पूर्व में नामांतरण का आदेश हासिल कर लिया था. इसके जवाब में वीएम सिंह की ओर से तर्क दिया गया कि जिन आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है, उन्हें ही बार-बार अदालत में लाया जा रहा था. अब जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद विवादित जमीन का नामांतरण आधिकारिक रूप से वीएम सिंह के नाम पर दर्ज करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
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