ओडिशा के गंजाम जिले से सामने आया एक वीडियो लोगों को झकझोर रहा है. समुद्र किनारे बने एक पक्के मकान को तेज लहरों ने कुछ ही पलों में निगल लिया. यह घटना केवल एक घर के ढहने की नहीं, बल्कि तटीय इलाकों में बढ़ते समुद्री कटाव के उस खतरे की कहानी है, जो अब पूरे गांवों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर रहा है. पॉडमपेटा गांव में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्थानीय लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है.
कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर
शुक्रवार सुबह गंजाम जिले के पॉडमपेटा गांव में समुद्र की तेज लहरों ने एक पक्के मकान को अपनी चपेट में ले लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लहरें लगातार मकान की नींव को कमजोर कर रही थीं. देखते ही देखते पूरी इमारत ढह गई और समुद्र में समा गई. यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसे देखकर लोग हैरान हैं.
जहां कभी बस्ती थी, वहां अब समुद्र
ग्रामीण बताते हैं कि कुछ साल पहले तक समुद्र गांव से काफी दूर था. समुद्र और आबादी के बीच करीब एक किलोमीटर का फासला हुआ करता था. लेकिन लगातार हो रहे तटीय कटाव के कारण समुद्र धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ता गया. हालात यह हैं कि अब समुद्र सीधे लोगों के घरों तक पहुंच चुका है और कई परिवारों को मजबूरन अपना घर छोड़ना पड़ा है.
500 मकानों वाला गांव सिमटता जा रहा
स्थानीय लोगों के अनुसार, पॉडमपेटा गांव में कभी करीब 500 मकान थे. समुद्री कटाव बढ़ने के साथ कई घर खत्म हो गए और बड़ी संख्या में लोगों ने दूसरे इलाकों में पलायन कर लिया. अब गांव में बहुत कम मकान बचे हैं और उन पर भी खतरा मंडरा रहा है. लोगों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में पूरा गांव प्रभावित हो सकता है.
17 गांवों पर मंडरा रहा खतरा
समुद्री कटाव का असर केवल पॉडमपेटा तक सीमित नहीं है. पालीबंधा और रामागड़ा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले करीब 17 तटीय गांव इस समस्या से जूझ रहे हैं. यहां रहने वाले लोगों को डर है कि कटाव की रफ्तार इसी तरह बढ़ती रही तो उनके घर, खेत और आजीविका के साधन भी खतरे में पड़ जाएंगे.
ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार
प्रभावित ग्रामीणों ने राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि सिर्फ अस्थायी राहत से समस्या का समाधान नहीं होगा. लोग चाहते हैं कि समुद्र के कटाव को रोकने के लिए मजबूत तटीय सुरक्षा दीवार बनाई जाए, प्रभावित परिवारों का सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास किया जाए और क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा योजना तैयार की जाए.
विशेषज्ञ पहले ही जता चुके हैं चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से पूर्वी तटीय क्षेत्रों में बढ़ते समुद्री कटाव को लेकर चेतावनी देते रहे हैं. उनका मानना है कि समुद्र के जलस्तर में बदलाव, तेज लहरों और बदलती जलवायु परिस्थितियों के कारण तटीय इलाकों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. यदि समय रहते प्रभावी संरक्षण उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में कई और तटीय बस्तियां इसी तरह के संकट का सामना कर सकती हैं.
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