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This Article is From Oct 16, 2020

'कोई गोली नहीं मारेगा' : जम्मू-कश्मीर आतंकी के सरेंडर का नाटकीय वीडियो आया सामने

कश्मीर में हुए मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के सामने एक आतंकी ने आत्मसमर्पण किया है उसका वीडियो सेना की तरफ से जारी किया गया है

श्रीनगर:

Jammu Kashmir Terrorist Encounter : जम्मू कश्मीर में हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के सामने एक आतंकी के आत्मसमर्पण का वीडियो सामने आय़ा है. ये वीडियो सेना की तरफ से जारी किया गया है. करीब बीस साल का ये युवक हाल में ही आतंकी बना था, उसके पास से एके -47 असॉल्ट राइफल बरामद हुई है. आतंकी की पहचान जहांगीर भट के रूप में हुई है.

सेना द्वार जारी किए गए वीडियो में एक सैनिक को दिखाया गया है जिसने लड़ाकू सुरक्षा गियर पहना हुआ है. वह एक बाग से आते हुए शख्स से बात रहा है.  जल्द ही, आतंकवादी, हवा में अपने हाथों के साथ, सिपाही से संपर्क करता हुआ दिखाई देता है, जो उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाने का आश्वासन देता है.

"कोई गोली नहीं चलेगा (कोई भी गोली मारेगा)," वह अपने सहयोगियों को बताता है. "तुम्हें कुछ नहीं होगा बेटा," सैनिक वीडियो में यह कहते हुए सुनाई दे रहा है आतंकवादी सिर्फ पैंट पहने है, बाग की मिट्टी की पर उसे बैठाया जाता है, "उसे पानी दो," सैनिक आगे कहता है.

यह भी पढ़ें- जम्मू कश्मीर: शोपियां में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को किया ढेर

सेना द्वारा जारी एक अन्य वीडियो क्लिप में, इस शख्स का पिता अपने बेटे को बचाने के लिए सुरक्षा बलों का आभार व्यक्त कर रहा हैं,  "उसे फिर से आतंकवादियों के पास मत जाने दो" सुरक्षाकर्मियों ने पिता को कहा.

NDTV से बात करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू, जीओसी 15 कोर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सुरक्षा बलों ने उसे जीवित छोड़ दिया और एक जान बचाई. 

सेना ने एक बयान में कहा,“13 अक्टूबर को, यह बताया गया कि एक एसपीओ (विशेष पुलिस अधिकारी) दो एके -47 (राइफल) के साथ फरार हो गया है. उसी दिन, चौराहा से जहांगीर आह भट के भी लापता होने की खबर मिली. परिवार व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश कर रहा था. आज सुबह एक संयुक्त ऑपरेशन में इस शख्स का पता चला. प्रोटोकॉल के अनुसार, भारतीय सेना ने व्यक्ति को आत्मसमर्पण के लिए मनाने के प्रयास किए. व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया. "

बयान में आगे कहा गया है, "इस शक्स के पिता उस वक्त वहां मौजूद थे और युवाओं को आतंक के रास्ते से वापस लाने के प्रयासों का असर दिखाई दे रहा था. भारतीय सेना आतंकी भर्ती को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और युवाओं के आतंक में शामिल होने के मामले में वापस पाने के लिए विकल्प प्रदान कर रही है."

केंद्रशासित प्रदेश में यह सबसे दुर्लभ आतंकवाद-रोधी अभियानों में से एक है, जिसका समापन आत्मसमर्पण में हुआ है. इससे पहले अगस्त में एक मुठभेड़ के दौरान एक आतंकवादी ने जम्मू और कश्मीर के शोपियां जिले के किलौरा गांव में आत्मसमर्पण कर दिया था. हालांकि उसके चार सहयोगी बंदूक की गोली से मारे गए थे.

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