- विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है.
- अविश्वास प्रस्ताव पास होने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है और बहुमत से पारित होना चाहिए.
- लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अब तक 3 अविश्वास प्रस्ताव आए हैं, सभी प्रस्ताव सदन में बहस के बाद खारिज किए गए हैं.
No-Confidence Motion Against Lok Sabha Speaker: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटा है. अविश्वास प्रस्ताव पर सांसदों ने हस्ताक्षर करना शुरू कर दिया गया है. कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि कल वो अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नोटिस देंगे. विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है. स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है. सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे. सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की. इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है."
लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया
नियम: लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा में कार्यप्रणाली और कामकाज के नियमों के अनुच्छेद 200 द्वारा नियंत्रित होती है.
प्रक्रिया: जो सदस्य स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस देना चाहता है, वह महासचिव को लिखित में ऐसे प्रस्ताव का पूरा टेक्स्ट देगा. प्रस्ताव मंज़ूर होने के लिए, उसे नीचे दी गई शर्तों को पूरा करना होगा-
- इसमें आरोपों के बारे में साफ़-साफ़ बताया गया हो. साफ़ और सटीक शब्दों में आरोप व्यक्त किए गए हो.
- इसमें तर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक बातें, आरोप या मानहानिकारक बयान नहीं होने चाहिए.
- उप-नियम (1) के तहत नोटिस मिलने पर, प्रस्ताव पेश करने की अनुमति के लिए एक प्रस्ताव संबंधित सदस्य के नाम पर कामकाज की सूची में दर्ज किया जाएगा.
- प्रस्ताव के लिए दिन तय किया जाएगा. यह प्रस्ताव के नोटिस मिलने की तारीख से चौदह दिन बाद का कोई भी दिन होगा.
- इस प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन मिलना चाहिए (नहीं तो प्रस्ताव गिर जाएगा)
आम तौर पर प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिनों के अंदर चर्चा और वोटिंग की जाती है. जब स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो वे अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं. लोकसभा का प्रस्ताव सदन के उस समय के सदस्यों के बहुमत से पारित होना चाहिए.
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ कब-कब आए अविश्वास प्रस्ताव, क्या हुआ अंजाम
अब तक लोकसभा स्पीकर के खिलाफ 3 प्रस्ताव आए हैं.
पहलाः 18 दिसंबर, 1954
तत्कालीन लोकसभा स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया.
नतीजा - बहस के बाद सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया
दूसराः 24 नवंबर, 1966
तत्कालीन लोकसभा स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया.
नतीजा - इसे खारिज कर दिया गया, क्योंकि प्रस्ताव के समर्थन में 50 से कम सदस्य खड़े हुए.
तीसराः 15 अप्रैल, 1987
तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ.
नतीजा- बहस के बाद सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.
हालांकि इसके अलावा 1967 में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. नीलम संजीव रेड्डी, 2001 में तत्कालीन अध्यक्ष जी.एम.सी बालयोगी, 2011 में तत्कालीन स्पीकर मीरा कुमार, 2020 में ओम बिरला के खिलाफ नोटिस लाए जाने की बात बड़ी जोर-शोर से चली थी. लेकिन ये चर्चाओं फलीभूत नहीं हुई.

स्पीकर ओम बिरला से कांग्रेस की नाराजगी की 4 बड़ी वजहें
- राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी को नियमों का हवाला देकर अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया. राहुल गांधी पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशित संस्मरण के एक हिस्से को सदन में बोलना चाहते थे.
- नरवणे की किताब का जिक्र करने राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोका गया, लेकिन बीजेपी सांसद निशिकांत ने सदन में नेहरू, इंदिरा गांधी जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों के ख़िलाफ़ किताबों के हवाले से आपत्तिजनक बातें कहीं.
- हंगामे के कारण कांग्रेस के 7 सांसद समेत कुल 8 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिए गए. सस्पेंड किए गए सांसदों में हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पाडोले, एस. वेंकटेशन और डीन कुरियाकोस शामिल हैं.
- कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष की उन टिप्पणियों से बेहद नाराज है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई सदस्य PM के आसन के पास पहुंच कर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. इसलिए उन्होंने PM से सदन में ना आने का आग्रह किया.

यहां यह भी साफ कर दें कि यदि ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आ भी गया तो उसका पास होना बेहद मुश्किल हैं. क्योंकि कांग्रेस समेत विपक्ष के पास कुल 220 से ज्यादा सांसद हैं. ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विपक्ष को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. लेकिन लोकसभा में इसको पास कराना मुश्किल होगा, क्योंकि वहीं एनडीए को बहुमत है.
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रिसर्चः अमोद प्रकाश सिंह
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