- बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन ने बंगाल चुनाव में अपना पहला कड़ा इम्तिहान अच्छे से पास किया
- इससे पहले नितिन नवीन ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त करने में भी अहम भूमिका निभाई थी.
- नितिन के नेतृत्व में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की अपराजेय मानी जाने वाली सियासी ताकत को चुनौती दी
राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिनकी पहली पारी ही उनकी काबिलियत का नया पैमाना निर्धारित कर देती है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है. अध्यक्ष पद संभालने के बाद बंगाल चुनाव उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था क्योंकि ममता के गढ़ में सेंध लगाना आसान नहीं था. ऐसे में आज बंगाल चुनाव में बीजेपी जिस तरह से टीएमसी से आगे निकली है, उसका श्रेय यकीनन नितिन नवीन को जरूर जाएगा. क्योंकि अध्यक्ष पद संभालने के बाद ये उनकी पहला कड़ा इम्तिहान था, जिसमें वो अच्छे नंबरों से पास हुए. अध्यक्ष पद संभालते ही नितिन नवीन जिस पहले बड़े इम्तिहान से गुज़रे, उसमें वे न सिर्फ सफल रहे, बल्कि ऐसा रिजल्ट दिलाया जिसे लंबे समय तक असंभव माना जाता था. उनके अध्यक्ष बनने के पहले ही कार्यकाल में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के उस किले को भेद दिया, जिसे ममता बनर्जी की अपराजेय सियासी ताकत का प्रतीक समझा जाता था. यही वजह है कि पार्टी के भीतर नितिन नवीन को अब बीजेपी के लिए “लकी ” कहा जाने लगा है.
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छत्तीसगढ़ से बंगाल तक: नितिन नवीन का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड
नितिन नवीन का नाम आज अचानक नहीं चमका है, इससे पहले वे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त करने में बेहद ही अहम भूमिका निभा चुके हैं. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में, जहां भूपेश बघेल सरकार की वापसी तय मानी जा रही थी, वहां नितिन नवीन की रणनीति, माइक्रो‑मैनेजमेंट, बूथ‑लेवल फोकस और संगठनात्मक पुनर्गठन ने बाजी पूरी तरह पलट कर रख दी थी. विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 11 में से 10 सीटें जीतकर अपनी ताकत साबित की. उसी अनुभव और भरोसे का विस्तार अब बंगाल में दिखा, जहां नितिन नवीन के अध्यक्ष रहते बीजेपी ने ममता बनर्जी के अभेद माने जाने वाले किले में सेंध लगा दी.
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उम्र नहीं, संगठन की प्रक्रिया है बीजेपी की ताकत
एनडीटीवी के एडिटर‑इन‑चीफ राहुल कंवल से एक्सक्लूसिव बातचीत में नितिन नवीन ने हाल ही में नेतृत्व, संगठन और राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव को लेकर अहम बातें कहीं थी. जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष उनसे उम्र में कहीं बड़े हैं, तो नितिन नवीन ने साफ कहा कि “उम्र राजनीति में निर्णायक नहीं होती, संगठन की प्रक्रिया निर्णायक होती है.” उनके मुताबिक बीजेपी एक ऐसी पार्टी है, जहां स्ट्रक्चर्ड पॉलिटिक्स के तहत हर किसी को आगे बढ़ने का मौका मिलता है और जनरेशन शिफ्ट भी बेहद सिस्टमेटिक तरीके से होता है. राहुल कंवल के इस सवाल पर कि देश भर में 18 करोड़ कार्यकर्ताओं वाली पार्टी में उन्हें ही अध्यक्ष क्यों चुना गया, नितिन नवीन ने बेहद संयमित जवाब दिया. उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष की उपलब्धि नहीं, बल्कि पार्टी की सामूहिक निर्णय‑प्रक्रिया का नतीजा है. “अगर सभी नेताओं के मन में एक मत बनता है, तो वही सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है.”
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