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"भगोड़ों के लिए पनाहगाह नहीं बनेगा ब्रिटेन": नीरव मोदी-विजय माल्या के मसले पर ब्रिटिश मंत्री का भारत को भरोसा

नीरव मोदी और विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर UK के मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि ब्रिटेन न्याय से बचने वालों की पनाहगाह नहीं बनना चाहता. उन्होंने भारतीय टैलेंट, वीजा और भारत-ब्रिटेन सुरक्षा सहयोग पर भी बात की.

"भगोड़ों के लिए पनाहगाह नहीं बनेगा ब्रिटेन": नीरव मोदी-विजय माल्या के मसले पर ब्रिटिश मंत्री का भारत को भरोसा

कई भगोड़े कारोबारियों और अपराधियों के लिए 'सुरक्षित ठिकाना' माने जाने वाले ब्रिटेन के रुख में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी यानी व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने साफ कर दिया है कि उनका देश किसी भी कीमत पर भगोड़ों की पनाहगाह नहीं बनेगा. एनडीटीवी (NDTV) के फॉरेन अफेयर्स एडिटर आदित्य राज कौल को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रेनॉल्ड्स ने कहा कि यूनाइटेड किंगडम कभी नहीं चाहेगा कि उसकी पहचान एक ऐसी जगह के रूप में हो जहां लोग कानून और इंसाफ से बचने के लिए आकर छिप सकें. भारत द्वारा विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे बड़े भगोड़ों के प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए की जा रही कोशिशों के बीच ब्रिटिश मंत्री का यह बयान मायने रखता है.NDTV को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाबंदियों के संदर्भ में कहा कि ब्रिटेन प्रतिभाओं के लिए हमेशा खुला है.  

नीरव मोदी और विजय माल्या पर क्या बोले ब्रिटिश मंत्री?

जोनाथन रेनॉल्ड्स से नीरव मोदी और विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर सवाल किया गया था. इस पर उन्होंने दोनों के मामलों के ब्यौरे में जाने से इनकार कर दिया, लेकिन ब्रिटेन के रुख को लेकर महत्वपूर्ण बात कही.रेनॉल्ड्स ने कहा, "हम कभी नहीं चाहेंगे कि ब्रिटेन के बारे में यह समझा जाए कि यह ऐसी जगह है, जहां लोग न्याय से बचने के लिए जा सकते हैं." उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच गृह मामलों में बहुत अच्छा सहयोग है. दोनों देशों के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि वे मुश्किल मुद्दों को भी स्थापित माध्यमों के जरिए एक-दूसरे के सामने उठा सकते हैं.

'मुश्किल मुद्दों पर भी बात कर सकते हैं भारत और ब्रिटेन'

ब्रिटिश मंत्री ने भारत और ब्रिटेन के रिश्तों की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि साझेदारी की खासियत केवल आसान मुद्दों पर सहमति नहीं, बल्कि कठिन विषयों को भी सामने रखकर उन पर बातचीत करना है.उनके मुताबिक, दोनों देश साझेदारी और व्यापक हित में सहयोग की भावना के साथ मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. भारत नीरव मोदी और विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए प्रयास करता रहा है. हालांकि रेनॉल्ड्स ने साफ किया कि व्यक्तिगत मामलों को उनसे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना होगा. 

ब्रिटेन का संदेश, 'हम टैलेंट के लिए हमेशा खुले'

इंटरव्यू में अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के तहत विदेशी कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स को प्रभावित करने वाली पाबंदियों का मुद्दा भी उठा. इसमें ग्रीन कार्ड और रोजगार आधारित इमिग्रेशन से जुड़ी चिंताओं पर सवाल किया गया. यह पूछे जाने पर कि क्या अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को लेकर ब्रिटेन की नीति अमेरिका से अलग है, रेनॉल्ड्स ने कहा, "ब्रिटेन में हम टैलेंट के लिए हमेशा खुले हैं." रेनॉल्ड्स ने ब्रिटेन में भारतीय समुदाय की भूमिका का खास तौर पर जिक्र किया. उन्होंने करीब 19 लाख सदस्यों वाले ब्रिटिश भारतीय समुदाय को भारत और ब्रिटेन के बीच एक 'लिविंग ब्रिज'  बताया.

भारतीयों को लेकर कही बड़ी बात

ब्रिटिश मंत्री ने माना कि ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन ने कानूनी और अवैध, दोनों तरह के इमिग्रेशन पर ज्यादा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की है. इसके बावजूद उन्होंने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रोफेशनल्स के योगदान पर जोर दिया.रेनॉल्ड्स ने कहा कि ब्रिटेन के टैलेंट के प्रति खुलेपन और जारी किए जाने वाले वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारत को मिलता है. उन्होंने भारत-ब्रिटेन रिश्ते को केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं बताया. उनके मुताबिक, इस रिश्ते का एक महत्वपूर्ण पहलू ऐसे लोग भी हैं जो ब्रिटेन जाकर काम करते हैं, इनोवेशन करते हैं और उसकी अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं.

सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं भारत-ब्रिटेन की साझेदारी

रेनॉल्ड्स के पूरे इंटरव्यू से भारत-ब्रिटेन रिश्तों की एक व्यापक तस्वीर सामने आती है. एक तरफ प्रत्यर्पण जैसे संवेदनशील मामलों पर ब्रिटेन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उसका इस्तेमाल न्याय से बचने की जगह के तौर पर नहीं होना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उसने भारतीय प्रतिभाओं के लिए अपने दरवाजे खुले रखने की बात कही.लोकतंत्र, शांतिपूर्ण विरोध, सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले जैसे मुद्दों पर भी ब्रिटिश मंत्री ने दोनों देशों की साझेदारी पर जोर दिया. कुल मिलाकर उनका संदेश यही रहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल व्यापार समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों, सुरक्षा और राजनीतिक संवाद तक फैले हुए हैं.

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