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हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर बवाल, देहरादून जाने पर क्यों अड़े निहंग? पैरामिलिट्री फोर्स तक करनी पड़ी तैनात

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 16 जून से शुरू हुआ विवाद अब तक खत्म नहीं हुआ है. गुरुवार को निहंग सिखों का एक जत्था देहरादून कूच करने के लिए आया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिमाचल बॉर्डर पर ही रोक दिया.

हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर बवाल, देहरादून जाने पर क्यों अड़े निहंग? पैरामिलिट्री फोर्स तक करनी पड़ी तैनात
हिमाचल बॉर्डर पर हाई अलर्ट है.
PTI
देहरादून:

उत्तराखंड में निहंग सिखों और पुलिस के बीच शुरू हुआ टकराव अभी खत्म नहीं हुआ है. रुद्रप्रयाग में नगरासू के गुरुद्वारे की छत पर डटे निहंग बुधवार को नीचे आ गए थे. इससे गतिरोध खत्म हो गया था. लेकिन गुरुवार को बड़ी संख्या में निहंग सिखों ने देहरादून कूच कर दिया है. हालांकि, इन्हें हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर रोक लिया गया है. बॉर्डर पर पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स तैनात है.

इस सारे विवाद की शुरुआत 16 जून को तब हुई थी, जब कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच मामूली विवाद के दौरान कथित तौर पर तलवार से किए गए हमले में कुछ लोग घायल हो गए थे. घटना में एक निहंग सिख भी घायल हुआ था. पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था.

इसके बाद 20 जून को दोपहर में निहंग सिखों ने एक सिख श्रद्धालु को बंधक बना लिया और नगरासू स्थित गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए थे. 23 जून को गतिरोध खत्म हो गया था और निहंग छत से नीचे उतर आए थे. 

लेकिन अब देहरादून कूच की तैयारी

कर्णप्रयाग और नगरासू में चल रहे विवाद को लेकर निहंगों का एक जत्था आज मोहाली स्थिति गुरुद्वारा सिंह शहीदान से उत्तराखंड के देहरादून की ओर जा रहा था. हालांकि, उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर रोक दिया.

निहंग सिखों ने गुरुवार को तीन मांगें रखी हैं. अकाली जसदीप सिंह ने कहा, 'हमारी 3 मुख्य मांगें हैं. पहली, जिस पुलिस अधिकारी ने सिंहों के खिलाफ केस दर्ज किया, उसने गलत किया. यह बिल्कुल साफ है कि मामला किसने शुरू किया था. जांच अधिकारी को नौकरी से निकाला जाना चाहिए. दूसरी, दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. और तीसरी, जिन पुलिस अधिकारियों ने हमारे लोगों को कोर्ट के सामने पेश किया और बिना किसी केस के पुलिस स्टेशन में रखा, उन्हें नौकरी से निकाला जाना चाहिए.'

उन्होंने कहा कि 'हमारी मांग है कि ऐसा करने वाले सभी पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए. हम यहां से तभी वापस जाएंगे जब हमारे 4 सिंह हमारे साथ जाएंगे. हमें रोका नहीं जाना चाहिए, हमें रुद्रप्रयाग जाने की इजाजत मिलनी चाहिए.

यह भी पढेंः उत्तराखंड में निहंगों पर क्यों मचा है विवाद, कर्णप्रयाग से नगरासू तक आखिर क्या-क्या हुआ?

हिमाचल बॉर्डर पर पूरी तरह अलर्ट मोड

निहंग सिखों के उत्तराखंड कूच के ऐलान के बाद उत्तराखंड-हिमाचल बॉर्डर पूरी तरह अलर्ट मोड पर पहुंच गया है. विकासनगर का कुल्हाल चेक पोस्ट पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की छावनी में तब्दील हो गया है. जिले के कई थानों की फोर्स, भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों ने बॉर्डर पर मोर्चा संभाल लिया है, जबकि इलाके की हर गतिविधि पर ड्रोन कैमरों से पैनी नजर रखी जा रही है.

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उत्तराखंड कूच एलान के बीच भारी संख्या में उत्तराखंड से सटे हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे पहुंचे निहंग प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच कूंच स्थगित करने के लिए पिछले कई घंटों से बातचीत जारी है. लेकिन पूरा दिन बीत जाने के बाद प्रशासन की तरफ से उत्तराखंड में निहंगो की कूच की स्थिति लेकर को बात साफ नहीं की जा सकी है.

सूत्रों के मुताबिक कभी भी निंहगो का हुजूम उत्तराखंड में एंट्री मार सकता है जिसके चलते इलाके में चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को अभेद किले में तब्दील कर दिया गया है.

कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में 16 जून को मत्था टेककर वापस आ रहे कुछ निहंग सिखों का कर्णप्रयाग बाजार में वाहन खड़ा करने को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हो गया था, जिसके बाद उन्होंने कथित रूप से तलवार से हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया.

घटना के संबंध में पंजाब के मोहाली जिले के रहने वाले चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया गया था. 

इसके बाद 20 जून को निहंगों ने नगरासू स्थित गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया था. इस गुरुद्वारे से जुड़े सरदार बेअंत सिंह ने बताया कि मोहाली से ये निहंग शनिवार शाम करीब चार बजे गुरुद्वारे पहुंचे और कर्णप्रयाग में हुई घटना के विरोध में प्रदर्शन के लिए सिख प्रदर्शनकारियों के ठहरने के लिए 50-60 कमरों की व्यवस्था करने को कहा.

उन्होंने बताया था कि इसमें असर्मथता व्यक्त किए जाने पर निहंगों ने मारपीट और हंगामा शुरू कर दिया. बाद में वे उपर चढ़ गए और तीसरी मंजिल के दरवाजे को बंद कर उस पर कब्जा कर लिया. उन्होंने अपने साथ एक सिख श्रद्धालु को भी बंधक बना लिया था.

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23 जून को खत्म हो गया था टकराव

72 घंटे से ज्यादा समय तक चले टकराव के बाद निहंग 23 जून को गुरुद्वारे की छत से नीचे उतर आए थे. 

पुलिस ने बताया था कि निहंग सिखों की मांग पर कर्णप्रयाग घटना में दूसरे पक्ष के खिलाफ भी FIR दर्ज कर ली गई है और साथ ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दोनों मुकदमों को हरिद्वार जिले में ट्रांसफर कर दिया गया.

इसके बाद अगले दिन 24 जून को निहंग सिखों के पांच सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की और बाद में पुलिस मुख्यालय में डीजीपी से मिलकर कर्णप्रयाग घटना की जल्द से जल्द जांच कराने की मांग रखी थी.

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