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उत्तराखंड में पुरानी पेंशन बहाली और TET में छूट की मांग तेज, हजारों शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

उत्तराखंड के देहरादून में टीईटी अनिवार्यता में छूट और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले हजारों शिक्षकों ने सचिवालय कूच किया. शिक्षकों का विरोध है कि दशकों से सेवा दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों पर इस उम्र में टीईटी परीक्षा पास करने का दबाव डालना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं है.

उत्तराखंड में पुरानी पेंशन बहाली और TET में छूट की मांग तेज, हजारों शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
देहरादून में राज्य के प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तराखंड के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सचिवालय कूच कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

TET Protest :  उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले आज सैकड़ो शिक्षक परेड मैदान में सुबह इकट्ठा हुए वहां से मार्च करते हुए सचिवालय कूच किया.  इस दौरान शिक्षकों में उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षा संघ के बैनर तले आए सभी शिक्षकों ने कहा कि सरकार को टीईटी की अनिवार्यता में शिक्षकों को छूट देनी चाहिए इसके अलावा पुरानी पेंशन को भी बहाल करना चाहिए. इसको लेकर शिक्षक पिछले लंबे समय से लगातार आंदोलन कर रहे हैं. 

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क्या है पूरा मामला

इस आंदोलन की वजह यह है कि सभी टीचरों को टीईटी और सीटीईटी को 2 साल के अंदर पास करना होगा. हालांकि जिन शिक्षकों के इसमें 5 साल रिटायरमेंट के रह गए हैं उनको छूट दे दी गई है. लेकिन 55 साल तक के उम्र के शिक्षकों को 2 साल के अंदर टीईटी और सीटीईटी की परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही ऐसा न करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी.

शिक्षकों का विरोध है कि 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को इस नियम यानी टीईटी और सीटीईटी क्या अनिवार्यता में छूट दी जाए. क्योंकि इससे पहले टीईटी और सीटीईटी अनिवार्य नहीं था. शिक्षक संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक दशकों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं यानी अपनी सेवाएं दे रहे हैं वह अब इस उम्र में टीईटी कैसे पास करेगा और इसको पास करने का दबाव व्यावहारिक और नए संगत नहीं है.

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शिक्षक संगठन ऑन का कहना है कि 2011 के बाद जो भी शिक्षक बने उन्होंने टीईटी परीक्षा पास की थी लेकिन सरकार ने 2017 में आर टी एक्ट में संशोधन कर बहुत ही चालाकी से टीईटी को अनिवार्य कर दिया.

रिटायरमेंट के करीब पहुंचे लोगों को छूट देनी चाहिए

इस दौरान डीईसी बीटीसी प्रदेश संयोजक नरेंद्र मैठाणी ने कहा कि शिक्षकों का मुख्य विरोध टीईटी की अनिवार्यता को लेकर है और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों को इसमें छूट दी जानी चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. प्रदर्शन में पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई.

मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन होगा तेज

मैठाणी ने कहा कि जब मंत्री स्वयं पुरानी पेंशन का लाभ ले रहे हैं तो शिक्षकों पर नई पेंशन प्रणाली थोपना दोहरा मापदंड है. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे से देशभर में करीब 25 लाख शिक्षक प्रभावित हैं और यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

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लेखक के बारे में
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किशोर कुमार रावत
स्पेशल करेस्पांडेंट
मुझे करीब 18 साल पत्रकारिता करते हो गए हैं  वर्तमान में एनडीटीवी उत्तराखंड में स्पेशल कॉरस्पॉडेंट के पद हूं। मैंने HNB गढ़वाल यूनिवर्सिटी से एमए मास कम... और पढ़ें
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