अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में अब ताबड़तोड़ एक्शन शुरू हो गया है. गुरुवार को ही इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर चोरों के खिलाफ पहली FIR दर्ज की गई थी और अब आरोपियों की गिरफ्तारी भी शुरू हो गई है. पुलिस ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई FIR में आठ आरोपियों को नामजद किया गया है. इनमें से दो आरोपी- अनुकल्प मिश्रा और लवकुछ मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव की तलाश जारी है. बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है.
सूत्रों के मुताबिक, CCTV में कुछ चोर चढ़ावे से चोरी करते दिखे थे, जिनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है. इस पूरे मामले में यह पहली FIR है. यह FIR ऐसे समय दर्ज हुई है, जब राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला गरमाया गया है और हाल में ही SIT ने इस मामले में शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपी है.
🔴#BREAKING | राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ी कार्रवाई, 2 आरोपी गिरफ्तार... टिन्नू यादव की तलाश में जुटी पुलिस
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8 नामजद आरोपियों पर FIR
अब सूत्रों ने बताया कि CCTV में चोरी करते दिखे और उनकी करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है. FIR में आठ नामजद आरोपी हैं, जबकि कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. FIR में रमाकांत यादव उर्फ टिन्नू यादव, लव कुश और अनुकल्प मिश्रा का नाम भी है. ये सारे नाम वे हैं, जिनका सीधे तौर पर कैश से लेना-देना था. हालांकि, इसमें चंपत राय का नाम नहीं है.
🔴#BREAKING | राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में FIR: टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्र आरोपी
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FIR में किस-किसका नाम?
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
- लवकुश मिश्रा, (गिरफ्तार)
- अनुकल्प मिश्रा, (गिरफ्तार)
- अविनाश शुक्ला
- मनीष यादव
- रमाशंकर मिश्र
- सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
- करुणेश पांडे
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6 धाराओं में दर्ज हुई FIR
बताया जा रहा है कि यह FIR श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुई है. बताया जा रहा है कि यूपी सरकार के निर्देश पर इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है.
- धारा 3(5): जब कई लोग मिलकर कोई आपराधिक काम करते हैं और उनका मकसद एक ही होता है, तो उस काम के लिए हर व्यक्ति वैसे ही जिम्मेदार होता है जैसे कि उसने वह काम अकेले किया हो.
- धारा 61: जब दो या उससे ज्यादा लोग किसी गैर-कानूनी काम को करने या करवाने के लिए, या किसी ऐसे काम को गैर-कानूनी तरीकों से करने या करवाने के लिए, जो खुद गैर-कानूनी नहीं है, एक आम मकसद के साथ सहमत होते हैं, तो ऐसे समझौते को आपराधिक साजिश कहा जाता है.
- धारा 306: जो कोई व्यक्ति क्लर्क या नौकर है, या क्लर्क या नौकर के तौर पर काम कर रहा है, और अपने मालिक या नियोक्ता के कब्जे में मौजूद किसी संपत्ति की चोरी करता है, तो उसे सात साल तक की किसी भी तरह की जेल की सजा और जुर्माना हो सकता है.
- धारा 316 (5): जो कोई भी, जिसे किसी भी तरह से कोई संपत्ति सौंपी गई हो, या जिसे किसी संपत्ति पर अधिकार दिया गया हो- चाहे वह सरकारी कर्मचारी के तौर पर हो या बैंकर, व्यापारी, फैक्टर, ब्रोकर, वकील या एजेंट के तौर पर अपने काम के दौरान- और वह उस संपत्ति के मामले में विश्वासघात करता है, तो उसे आजीवन कारावास या दस साल तक की किसी भी तरह की जेल की सजा और जुर्माना हो सकता है.
- धारा 317 (4): जो कोई भी आदतन ऐसी संपत्ति प्राप्त करता है या उसका लेन-देन करता है, जिसके बारे में उसे पता हो या यह मानने का कारण हो कि वह चोरी की संपत्ति है, तो उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि दस साल तक हो सकती है, और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा.
- धारा 317 (5): जो कोई भी जानबूझकर ऐसी संपत्ति को छिपाने, ठिकाने लगाने या हटाने में मदद करता है, जिसके बारे में उसे पता हो या यह मानने का कारण हो कि वह चोरी की संपत्ति है, तो उसे किसी भी तरह की जेल की सजा हो सकती है जो तीन साल तक बढ़ सकती है, या जुर्माना हो सकता है, या दोनों हो सकते हैं.
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दो दिन पहले SIT ने सौंपी थी रिपोर्ट
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं और गबन के आरोप सामने आने के बाद 13 जून को सरकार ने तीन सदस्यों की SIT बनाई थी.
लगातार 6 दिन तक SIT ने मंदिर का दौरा किया था और कई लोगों से पूछताछ की थी. जांच के दौरान SIT ने मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मियों, ट्रस्ट से संबद्ध लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित पांच दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ की. टीम ने चढ़ावे की गिनती, उसके रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की.
SIT के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह एक गोपनीय जांच है और फिलहाल केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है. उन्होंने साफ किया कि जांच अभी जारी है और कई बिंदुओं पर पड़ताल की जा रही है. अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे सरकार को सौंपा जाएगा.
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राम मंदिर में बदली व्यवस्था
SIT की जांच के बाद मंदिर परिसर में दान राशि की काउंटिंग और कलेक्शन से जुड़े कई बदलाव किए गए हैं. जिन कर्मचारियों पर पहले यह जिम्मेदारी थी, उन्हें फिलहाल दूसरे कामों में लगाया गया है.
अब दान पत्र के कैश काउंटिंग काम में मंदिर परिसर में कार्यरत विश्वसनीय कर्मचारियों के साथ-साथ बैंक के नए कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रक्रिया को और ज्यादा पारदर्शी बनाया जा सके. पैसों की गिनती प्रक्रिया पर निगरानी के लिए नया CCTV सिस्टम लगाया गया है. सभी कैश काउंटिंग क्षेत्रों की कैमरों से निगरानी की जा रही है और इसके लिए अलग कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है.
दान राशि की गिनती और काउंटिंग रूम में प्रवेश को लेकर अब नियम और कड़े कर दिए गए हैं. पूरी तलाशी के बाद ही कर्मचारियों को काउंटिंग रूम में प्रवेश दिया जाएगा. काउंटिंग रूम से बाहर निकलने के समय भी शत-प्रतिशत जांच की व्यवस्था की गई है.
सूत्रों के अनुसार, अब बैंक में कैश जमा करते समय तीन व्यक्ति क्रॉस वेरिफिकेशन करेंगे. सभी के हस्ताक्षर भी अनिवार्य किए गए हैं, ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे.
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