- MP के सिंगरौली में न्याय की उम्मीद में कलेक्ट्रेट के बाहर रात बिताने वाले परिवार के साथ पुलिस ने हिंसा की.
- परिवार के एक युवक को महिलाओं और बच्चों के सामने पुलिस ने बेरहमी से पीटा और जबरन पुलिस वाहन में ठूंस दिया.
- गांव में जेसीबी द्वारा फसल नष्ट करने और सड़क निर्माण की शिकायत पर परिवार ने कलेक्टर से मिलने की कोशिश की थी.
मध्यप्रदेश के सिंगरौली कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार सुबह की एक घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. न्याय की उम्मीद में पूरी रात कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर बैठी एक गरीब परिवार पर पुलिस ने कथित तौर पर ऐसा कहर ढाया कि देखने वालों के रौंगटे खड़े हो जाएं. परिवार के एक पुरुष सदस्य को महिला-बच्चों के सामने बेरहमी से पीटा गया और घसीटकर पुलिस वाहन में ठूंस दिया गया. इस अमानवीय घटना का वीडियो अब वायरल है.
यह मामला कसार गांव निवासी संतराम शाह के परिवार का है. संतराम के अनुसार, 28 नवंबर की रात को गांव के सरपंच ने जेसीबी मशीन भेजकर खेत में लगी गेंहू की फसल को उखाड़ दिया और बिना अनुमति सड़क निर्माण का काम चलने लगा.
न्याय की उम्मीद में गुजारी रात, सुबह मिली हिंसा
बेबस परिवार रातोंरात गांव से निकल पड़ा और सिंगरौली जिला मुख्यालय पहुंचा. इस परिवार में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे. रात उन्होंने कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर फुटपाथ पर इस उम्मीद में गुजार दी कि सुबह उन्हें न्याय मिलेगा. हालांकि सुबह मदद नहीं बल्कि कथित तौर पर हिंसा मिली.
सुबह जैसे ही संतराम का परिवार अपनी शिकायत लेकर कलेक्टर से मिलने पहुंचा, पुलिस मौके पर आ गई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे पुलिसकर्मी परिवार के एक युवक को जमीन पर पटकते हैं, उसे दबोचकर घसीटते हैं और जबरदस्ती वाहन में डाल देते हैं. महिलाएं रोते-गिड़गिड़ाते हुए उसे बचाने की कोशिश करती हैं, बच्चे चीख रहे हैं, लेकिन पुलिस किसी की सुनने को तैयार नहीं है.
बरगवां थाने में दर्ज की गई FIR
चौंकाने वाली बात यह है कि जब यह परिवार अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहा था तो ठीक उसी समय उनके ही खिलाफ बरगवां थाने में FIR दर्ज की जा रही थी.
शनिवार सुबह 10:46 बजे केशरीलाल साहू नाम के व्यक्ति ने शिकायत दी कि पिछली रात करीब 11 बजे वह जगजीवन राम वैश्य के खेत में सड़क बना रहा था, तभी संतराम साहू, सतीश साहू और सुरेश साहू आए और उन्होंने रास्ता रोककर धमकी दी.
शिकायत में कहा गया, “वे मेरे ट्रैक्टर के सामने खड़े हो गए, गंदी गालियां दीं और कहा कि यदि काम जारी रखा तो जान से मार देंगे.”
इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कलेक्टर परिसर में परिवार पर कार्रवाई की.
ज्वाइंट कलेक्टर से सवाल, जवाब में टालमटोल
जब अधिकारियों से सवाल पूछा गया कि शिकायत देने आए परिवार को क्यों पुलिस गाड़ी में डालकर ले गई तो ज्वाइंट कलेक्टर संजीव पांडे ने टालमटोल जवाब दिया. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि ये लोग रातभर यहां थे. साहब (कलेक्टर) मीटिंग में थे, मीटिंग के बाद तुरंत मिले. एसडीएम चित्रांगी भी यहां हैं. मुझे नहीं पता कि इन्हें थाने क्यों ले जाया गया. एसडीएम चित्रांगी मौके पर जा रहे हैं और वहीं मामले का समाधान होगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन परिवार को विवादित भूमि पर जांच के लिए ले जा रहा है.
कलेक्टर बोले - कोई बर्बरता नहीं की गई
उधर, सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने इस बात को गलत बताया कि प्रशासन ने पीड़ित परिवार से मिलने से इनकार किया था. उन्होंने कहा कि यह परिवार शुक्रवार को उनसे मिल चुका था और जिस जमीन को वे अपना बता रहे हैं, वह अवैध कब्जे में थी. कलेक्टर के अनुसार, सरपंच के साथ विवाद के दौरान पीड़ित पक्ष ने गालियां दी थीं. इसी आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई.
उन्होंने बताया कि जब परिवार अगली सुबह फिर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा तो पुलिस उन्हें थाने ले जाने का प्रयास कर रही थी क्योंकि उन पर पहले से मामला दर्ज था, लेकिन जैसा दावा किया जा रहा है, कोई बर्बरता नहीं की गई. कलेक्टर ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी.
इस घटना की सबसे मार्मिक बात यह है कि परिवार ने पूरी रात फुटपाथ पर बिताई ये सोचकर कि कोई उनकी बात सुन ले, लेकिन जवाब में उन्हें मिला डर, धक्का, मारपीट और अपमान.
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