देशभर के ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों और रिक्त पदों को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह ट्रिब्यूनल सुधारों से संबंधित नया कानून लाने की तैयारी कर रही है. सरकार ने संकेत दिया है कि प्रस्तावित ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल संसद के वर्तमान माॅनसून सत्र में पेश किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में ट्रिब्यूनलों में खाली पदों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने यह जानकारी दी. सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब सर्वोच्च न्यायालय ट्रिब्यूनलों की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और प्रभावी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार चिंता जता चुका है.
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दी जानकारी
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ट्रिब्यूनलों में रिक्त पदों और उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े मामले की सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक तैयार करने का काम अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा माॅनसून सत्र के दौरान इस विधेयक को संसद में पेश करने का प्रयास करेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने पहले जताई थी चिंता
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याद दिलाया कि ट्रिब्यूनलों को निष्क्रिय या अप्रभावी नहीं बनने दिया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट पहले भी केंद्र सरकार से देशभर के ट्रिब्यूनलों के संचालन के लिए एक समान और व्यापक नीति तैयार करने को कह चुका है. अदालत का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था में ट्रिब्यूनल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी प्रभावशीलता बनाए रखना जरूरी है.
2025 में रद्द की गई थीं कुछ कानूनी धाराएं
नवंबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 की कुछ धाराओं को रद्द कर दिया था. इन धाराओं का संबंध ट्रिब्यूनल सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल से था. अदालत ने कहा था कि ये प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों की भावना के विपरीत हैं और न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि जिन प्रावधानों को पहले असंवैधानिक घोषित किया गया था, उन्हें मामूली बदलाव के साथ फिर से लागू करने की कोशिश की गई.
राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग (National Tribunals Commission) गठित करने का भी निर्देश दिया था. अदालत के अनुसार यह आयोग ट्रिब्यूनलों की नियुक्तियों, प्रशासनिक कार्यों और संचालन में पारदर्शिता तथा एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. कोर्ट का मानना है कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों को केवल छोटे-छोटे सुधारों से दूर नहीं किया जा सकता. इसके लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचे की आवश्यकता है.
खाली पदों पर भी चिंता
देश के कई ट्रिब्यूनलों में लंबे समय से सदस्यों और न्यायिक अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं. इसके कारण मामलों के निपटारे में देरी हो रही है और न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. सुप्रीम कोर्ट लगातार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करता रहा है. नए विधेयक से नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने की उम्मीद की जा रही है.
क्या कुछ बदल सकता है नए बिल से?
हालांकि प्रस्तावित विधेयक का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें ट्रिब्यूनलों की संरचना, नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल, प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं. यदि यह बिल संसद में पेश होकर पारित होता है, तो देशभर के विभिन्न ट्रिब्यूनलों के संचालन में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. फिलहाल सभी की नजरें संसद के मानसून सत्र और केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले इस संभावित ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पर टिकी हैं.
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