भारतीय नौसेना अपनी एंटी-ड्रोन और एंटी-मिसाइल क्षमता को और मजबूत करने के लिए हाई-स्पीड मानव रहित टारगेट ड्रोन खरीदने की तैयारी में है. रक्षा मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के खर्च होने वाले हवाई लक्ष्य यानी Expendable Aerial Target (NG) के लिए जानकारी मांगी है. इन ड्रोन को तेज रफ्तार एंटी-शिप मिसाइलों जैसा डिजाइन किया जाएगा, ताकि समुद्र में युद्धपोतों को वास्तविक खतरों जैसी ट्रेनिंग दी जा सके. इससे पहले Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित ‘Abhyas' सफल परीक्षणों के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन के चरण में पहुंच चुका है.
कैसा होगा नया EAT (NG)?
नेक्स्ट जेनरेशन हवाई लक्ष्य को अभ्यास के दौरान असली फायरिंग में नष्ट किया जाएगा. इससे नौसेना के जवानों को समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ने वाली आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से निपटने की वास्तविक ट्रेनिंग मिलेगी.
प्रमुख तकनीकी मानक
- कम ऊंचाई पर न्यूनतम रफ्तार 300 मीटर प्रति सेकंड (करीब मैक 0.87)
- कम से कम 60 मिनट की उड़ान क्षमता
- समुद्र की सतह से केवल 5 मीटर ऊपर उड़ान
- 20 मीटर प्रति सेकंड की दर से ऊपर चढ़ने की क्षमता
- 2G की लगातार मोड़ लेने की क्षमता
- 100 किलोमीटर तक रेडियो कंट्रोल रेंज
- एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से कम से कम छह ड्रोन एक साथ नियंत्रित करने की सुविधा
- डेटा लिंक फेल होने पर रिकवरी की व्यवस्था
- जरूरत पड़ने पर रडार सिग्नेचर बढ़ाने के लिए ट्रांसपोंडर/रिफ्लेक्टर की सुविधा
- 20 मिमी तोप से लेकर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल की फायरिंग को 10 मीटर के दायरे में रिकॉर्ड करने की क्षमता
ड्रोन को जहाज या तट से रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जा सकेगा. यह समुद्र की स्थिति 3 और 30 नॉट तक की हवा में भी काम करने में सक्षम होगा. पानी में गिरने के बाद यह इतना तैरता रहेगा कि नाव या हेलीकॉप्टर से इसे वापस लाया जा सके. इसकी अनुमानित सेवा आयु 15 वर्ष तय की गई है.
स्वदेशीकरण पर खास जोर
रक्षा मंत्रालय ने कंपनियों से पूछा है कि क्या वे रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 के तहत “Buy Indian-IDDM” (50% से अधिक स्वदेशी सामग्री) या “Buy Indian” (60% से अधिक स्वदेशी सामग्री) श्रेणी में आपूर्ति कर सकती हैं. यह पहल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को और मजबूती देती है.
यह कदम क्यों अहम है?
भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर कई अत्याधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां तैनात हैं, जिनमें इजराइल की Barak 8 भी शामिल है. इन प्रणालियों की समय-समय पर असली लक्ष्य के खिलाफ फायरिंग कर जांच जरूरी होती है.अब जबकि INS Vikrant और INS Vikramaditya पूरी तरह ऑपरेशनल हैं और नौसेना तेजी से अपनी समुद्री क्षमता का विस्तार कर रही है, ऐसे में मजबूत और यथार्थवादी एंटी-मिसाइल ट्रेनिंग सिस्टम की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है.
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