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नीट-पीजी काउंसलिंग: कट-ऑफ को लेकर 'टीम संकल्प' ने सरकार को लिखा लेटर, नीतिगत सुधारों की मांग

NEET PG दाखिले में हुए बड़े बदलाव का विरोध हो रहा है. इसी बीच टीम संकल्प ने मिनिस्ट्री को लेटर लिखा है, जिसमें क्वालिटी और पॉलिसी चेंज पर अपनी राय रखी गई है.

नीट-पीजी काउंसलिंग: कट-ऑफ को लेकर 'टीम संकल्प' ने सरकार को लिखा लेटर, नीतिगत सुधारों की मांग

नीट-पीजी (NEET-PG) काउंसलिंग प्रोसेस में कट-ऑफ नंबर्स और सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही अनिश्चितता के बीच, टीम संकल्प ने अधिकारियों को एक लेटर लिखकर अपनी चिंताएं बताईं हैं. यह लेटर मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ और फैमिली वेलफेयर के सेक्रेटरी को लिखा गया है, जिसमें काउंसलिंग प्रोसेस को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी और छात्रों के भविष्य के हिसाब से बनाने की बात कही गई है.

टीम संकल्प के इस लेटर में कट-ऑफ में कमी के साथ क्वालिटी, स्टेकहोल्डर्स से बातचीत और पॉलिसी चेंज के मुद्दे पर अपनी राय रखी है.

SANKALP NEET-PG Representation by

कट-ऑफ में गिरावट और क्वालिटी 

लेटर में हाल के सालों में काउंसलिंग के दौरान कट-ऑफ को जीरो या बहुत कम करने की नीति पर सवाल उठाए गए हैं. टीम का मानना है कि इससे मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है.

पॉलिसी चेंज 

लेटर में सुझाव दिया गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया को इस तरह से सुधारा जाए कि सीटें भी खाली न रहें और मेरिट से भी समझौता न हो. टीम ने काउंसलिंग के राउंड्स और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बदलाव के लिए ठोस सुझाव दिए हैं.

टीम संकल्प ने लेटर में कहा कि देश के भविष्य के विशेषज्ञों का चयन एक पारदर्शी व्यवस्था के तहत हो. हमने डेटा और जमीनी हकीकत के आधार पर सरकार को सुझाव दिए हैं, जिससे काउंसलिंग में होने वाली देरी और कमियों को दूर किया जा सके.

कई देशों का दिया उदाहरण

टीम संकल्प ने अपने इस लेटर में कई दूसरे देशों के प्रोसेस के बारे में जिक्र किया गया है. अमेरिका में USMLE परीक्षा के सभी स्टेज को पास करना जरूरी है. अगर कोई कैंडिडेट फेल होता है, तो वह बाहर हो जाता है. यहां सीटें खाली रह सकती हैं, लेकिन क्वालिटी से समझौता नहीं किया जाता. यूनाइटेड किंगडम में अगर सीटें खाली रहती हैं, तो सरकार उन्हें भरने के लिए अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों को बुलाती है या सिस्टम में सुधार करती है, लेकिन पासिंग मार्क्स को कभी कम नहीं किया जाता. वहीं,  कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में ट्रेनिंग की क्वालिटी, सीटों की संख्या भरने से कहीं ज्यादा जरूरी है. यहां सीट यूटिलाइजेशन से पहले क्वालिटी को रखा जाता है.

बता दें नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने NEET PG दाखिले में बड़ा बदलाव करते हुए कटऑफ में भारी कटौती कर दी है. मेडिकल पीजी कोर्सेज में खाली पड़ी करीब 18 हजार से ज्यादा सीटों को भरने के लिए ये फैसला लिया गया है.

कितना कम हुआ कटऑफ?

सामान्य और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए कटऑफ 50 परसेंटाइल से घटाकर 7 परसेंटाइल किया गया है. यानी क्वालीफाइंग स्कोर 276 से घटकर अब 103 हो चुका है. वहीं, एससी, एसटी और ओबीसी कैटेगरी के लिए कटऑफ 40 से घटाकर 0 परसेंटाइल किया गया है. यानी अब माइनस 40 स्कोर वाले उम्मीदवार भी तीसरे राउंड की काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं.इसके अलावा जनरल पीडब्ल्यूडी के लिए कटऑफ को 45 से घटाकर 5 परसेंटाइल किया गया है. यानी 255 की बजाय 90 क्वालीफाइंग स्कोर हो गया है. 

अब इस फैसले को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं और जानकारों का कहना है कि इससे हर किसी को नीट-पीजी में एडमिशन मिल जाएगा, जो काफी खतरनाक हो सकता है.  

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