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NEET PG देने वाले पहले से डॉक्टर, काबिलियत का सवाल ही नहीं; सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दिया तर्क

NEET PG Cut-Off Supreme Court: नीट पीजी कटऑफ में गिरावट से मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी खराब होगी या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. अब इस मामले को लेकर 24 मार्च को अगली सुनवाई होगी.

NEET PG देने वाले पहले से डॉक्टर, काबिलियत का सवाल ही नहीं; सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दिया तर्क
NEET PG कटऑफ मामला

NEET PG Cut-Off: भारत में डॉक्टरी करने के बाद MD, MS और पीजी डिप्लोमा सीटों के लिए NEET PG परीक्षा का आयोजन किया जाता है. इस बार पीजी की हजारों सीटें खाली रहने के चलते कटऑफ में काफी ज्यादा कमी कर दी गई. इसके चलते तीसरे राउंड की काउंसलिंग में 800 में से 100 से कम नंबर लाने वालों को भी सीट मिल गई. अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बारे में विचार किया जाएगा कि क्या वाकई NEET-PG 2025-26 के लिए कटऑफ में कमी से मेडिकल एजुकेशन की क्वालिटी पर असर पड़ेगा. इसे लेकर सरकार की तरफ से भी तर्क दिया गया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी कटऑफ मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि क्या कट-ऑफ बहुत कम करने से मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी खराब होगी? सरकार को यह साबित करना होगा कि इससे पढ़ाई के स्तर पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने यह भी माना कि नीट-पीजी और नीट-यूजी (MBBS के लिए) में अंतर है. पीजी में शामिल होने वाले छात्र पहले से ही डॉक्टर (MBBS) होते हैं, इसलिए यह मामला थोड़ा अलग है. 

सरकार ने क्या तर्क दिया?

सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ASG ऐश्वर्या भाटी अपना तर्क रखते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हर साल कई सीटें खाली रह जाती हैं, इसलिए कट-ऑफ कम करना पड़ता है, ताकि सीटें भरी जा सकें. नीट-पीजी सिर्फ एक रैंक लिस्ट है, इसका मकसद यह चेक करना नहीं है कि डॉक्टर काबिल है या नहीं, क्योंकि वे पहले से ही डॉक्टर हैं. इसका मकसद उपलब्ध सीटों के लिए डॉक्टरों के बीच एक मेरिट लिस्ट तैयार करना है. सरकार ने कहा कि 2017 से ही सीटें भरने के लिए कट-ऑफ कम की जाती रही है. 2023 में तो इसे घटाकर 'जीरो' तक कर दिया गया था. 

इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार का यह कहना उचित है कि नीट-पीजी परीक्षा एमबीबीएस में प्रवेश का माध्यम नहीं है और अभ्यर्थी पहले से ही डॉक्टर हैं, फिर भी कोर्ट ‘कट-ऑफ' कम करने के प्रभाव पर विचार करना चाहेगा. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी. 

सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती

याचिकाकर्ताओं ने ‘नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज' (एनबीईएमएस) की तरफ से 13 जनवरी को जारी किये गए नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें नीट-पीजी 2025-26 के तीसरे दौर की काउंसलिंग के लिए कट-ऑफ को कम कर दिया गया था. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने मामले में दाखिल किये गए अपने हलफनामे में कहा कि याचिकाकर्ताओं की तरफ से दी गई चुनौती राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम 2019 के तहत सक्षम वैधानिक प्राधिकारों द्वारा जनहित में और विशेषज्ञ संबंधी विनियमन के दायरे में लिये गए एक शैक्षणिक और नीतिगत निर्णय से संबंधित है. 

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