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साइकिल से 200 करोड़ की 'कोचिंग फैक्ट्री' तक... NEET पेपर लीक में गिरफ्तार शिवराज मोटेगावकर की पूरी कहानी

NEET पेपर लीक मामले में नाम सामने आने और गिरफ्तारी के बाद अब इस कोचिंग नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की नजर है. ‘RCC’ के जिन 28 जिलों में केंद्र चल रहे हैं, वहां CBI की जांच की संभावना जताई जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई हैं.

साइकिल से 200 करोड़ की 'कोचिंग फैक्ट्री' तक... NEET पेपर लीक में गिरफ्तार शिवराज मोटेगावकर की पूरी कहानी
  • लातूर जिले में पुराने उद्योग क्षेत्र की जगह अब बड़े प्राइवेट कोचिंग संस्थानों का नेटवर्क विकसित हो चुका है.
  • मोटेगावकर ने एक छोटे गोदाम से शुरू किया था कोचिंग व्यवसाय, जो बाद में करोड़ों रुपये के कारोबार में बदल गया.
  • मोटेगावकर ने कोटा मॉडल अपनाकर अलग-अलग विषयों के लिए शिक्षकों को नियुक्त कर कोचिंग नेटवर्क का विस्तार किया.

महाराष्ट्र के लातूर जिले में प्राइवेट कोचिंग संस्थानों का नेटवर्क तेजी से फल-फूल रहा है. कभी उद्योगों के बंद होने के कारण वीरान पड़ा यह इलाका अब करोड़ों रुपये के कारोबार का केंद्र बन चुका है. डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के सपने दिखाकर कोचिंग संचालक बड़ी आर्थिक ताकत खड़ी कर चुके हैं. हाल ही में NEET पेपर लीक मामले में शिवराज मोटेगावकर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मॉडल पर फिर से सवाल उठने लगे हैं.

पुरानी MIDC से ट्यूशन हब बनने की कहानी

साल 2000 के आसपास, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने नई एमआईडीसी बसाने का फैसला लिया, तो पुराने इलाके से उद्योग हटकर नए स्थान पर चले गए. इसके बाद पुरानी एमआईडीसी खाली हो गई और धीरे-धीरे यहां कोचिंग क्लासेस का जमावड़ा लगने लगा. इसी दौरान शिवराज मोटेगावकर ने एक छोटे से गोदाम से अपनी ट्यूशन क्लास शुरू की, जो आगे चलकर बड़े नेटवर्क में बदल गई.

NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में CBI ने महाराष्ट्र के लातूर से रेणुकाई केमेस्ट्री क्लासेस (RCC) चलाने वाले शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है.

छोटे बैच से हजारों छात्रों तक विस्तार

शुरुआत में मोटेगावकर केवल केमिस्ट्री पढ़ाते थे और उनके पास गिने-चुने छात्र थे. धीरे-धीरे उनकी क्लास में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी. साल 2016 तक हालात यह हो गए कि एक-एक बैच में करीब 1500 छात्र बैठने लगे और दिन में 3 से 4 बैच चलाए जाने लगे. फीस भी बढ़कर 15,000 रुपये से 25,000 रुपये तक पहुंच गई.

कोटा मॉडल अपनाया, बना कॉर्पोरेट कोचिंग नेटवर्क

साल 2018 के बाद, बढ़ती मांग को देखते हुए मोटेगावकर ने कोचिंग को बड़ा रूप देना शुरू किया. फिजिक्स, बायोलॉजी और अन्य विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की नियुक्ति की गई. राजस्थान के कोटा और देश के अन्य हिस्सों से नामी शिक्षकों को मोटे पैकेज पर बुलाया गया. यहीं से यह संस्थान एक छोटे ट्यूशन सेंटर से बड़े कॉर्पोरेट कोचिंग मॉडल में बदल गया.

RCC का विस्तार: 5 साल में 28 जिलों तक पहुंच

साल 2020 के बाद ‘राधे कोचिंग क्लासेस (RCC)' का नेटवर्क तेजी से फैलने लगा. पिछले पांच साल में यह संस्थान महाराष्ट्र के करीब 28 जिलों तक पहुंच गया. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हर साल 25 हजार से ज्यादा छात्र यहां एडमिशन लेते हैं. प्रति छात्र फीस 75,000 रुपये से लेकर 1,25,000 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच गई है.

कोचिंग से खड़ा हुआ इमारतों का साम्राज्य

जिस एक गोदाम से इस कोचिंग की शुरुआत हुई थी, आज उसी स्थान पर 4 से 5 मंजिला इमारतें खड़ी हैं. मोटेगावकर ने लातूर के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में भी जमीन लेकर बड़े कोचिंग सेंटर्स स्थापित किए हैं.

CBI की जांच में आया कोचिंग नेटवर्क

NEET पेपर लीक मामले में नाम सामने आने और गिरफ्तारी के बाद अब इस कोचिंग नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की नजर है. ‘RCC' के जिन 28 जिलों में केंद्र चल रहे हैं, वहां CBI की जांच की संभावना जताई जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई हैं.

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लेखक के बारे में
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पूजा भारद्वाज
Associate Editor -Current Affairs
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