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NEET पेपर लीक के बाद कटघरे में NTA, युवा अधिकारी और टेक्नोलॉजी पर जोर; कई पद अब भी खाली

NEET Paper Leak NTA: मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट के पेपर लीक के बाद से ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA सवालों के घेरे में है. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है, वहीं एजेंसी में कई तरह के बदलाव भी किए जा रहे हैं.

NEET पेपर लीक के बाद कटघरे में NTA, युवा अधिकारी और टेक्नोलॉजी पर जोर; कई पद अब भी खाली
NEET Paper Leak NTA: नीट पेपर लीक के बाद एनटीए पर उठ रहे सवाल

NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद ने NEET परीक्षा का आयोजन करने वाली संस्था 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है. यह विवाद NEET-UG 2024 पेपर लीक के ठीक दो साल बाद सामने आया है. इस स्थिति को देखते हुए, सरकार NTA में बड़े बदलाव कर रही है और संगठन में अपेक्षाकृत युवा अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है. हालांकि सवाल ये है कि क्या ये सुधार काफी तेजी से हो रहा है?  नीट पेपर लीक के बाद से ही एनटीए सवालों के घेरे में है और अब आगे तमाम बड़ी परीक्षाएं ठीक से करवाने की चुनौती है. 

संसदीय कमेटी ने NTA चीफ को किया तलब 

शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति अब NEET-UG 2026 पेपर लीक और के. राधाकृष्णन कमेटी के सुझाए गए सुधारों को लागू किए जाने की समीक्षा करने वाली है. समिति की बैठक 21 मई को होगी, जिसमें शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और NTA अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी से जवाब मांगा जाएगा.

यह नई जांच 3 मई को 22 लाख से ज्यादा छात्रों की दी गई NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने के बाद शुरू हुई है. पेपर लीक के आरोपों के बाद इस हफ्ते की शुरुआत में परीक्षा रद्द कर दी गई थी. अब 21 जून को दोबारा परीक्षा (रीटेस्ट) कराने का फैसला लिया गया है, जबकि सीबीआई (CBI) इस मामले की जांच कर रही है. 

युवा अधिकारियों की नियुक्ति

कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने हाल ही में NTA में चार नए वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है, जिनमें दो संयुक्त सचिव (Joint Secretaries) और दो संयुक्त निदेशक (Joint Directors) शामिल हैं. खास बात ये है कि दोनों ही अधिकारी युवा हैं और तेज तर्रार बताए जाते हैं. 

  1. अनुजा बापट: 1998 बैच की भारतीय सांख्यिकी सेवा अधिकारी, (संयुक्त सचिव) 
  2. रुचिता विज: 2004 बैच की सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर से आईआरएस अधिकारी, (संयुक्त सचिव) 
  3. आकाश जैन: 2013 बैच के आईआरएस-आयकर अधिकारी, (संयुक्त निदेशक)
  4. आदित्य राजेंद्र भोजगढिया: 2013 बैच के भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा सेवा अधिकारी, (संयुक्त निदेशक) 

NTA में हुई इन नई भर्तियों का मकसद एजेंसी में एक ऐसा युवा और तकनीक-प्रेमी प्रशासनिक ढांचा तैयार करना है, जो बड़े पैमाने पर डिजिटल परीक्षाएं, डेटा सिस्टम, सुरक्षा और निगरानी को संभाल सके.  केंद्र सरकार ने पहले ही ये ऐलान कर दिया है कि अगले साल से NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) होगी. इसे कागज-पेन वाले मोड से थोड़ा बेहतर और लीक प्रूफ माना जाता है. 

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अब तक खाली पड़े हैं कई पद

NTA को बदलने की ये पूरी तैयारी अक्टूबर 2024 में शुरू हुई थी, जब केंद्र सरकार ने संगठन में 16 नए वरिष्ठ प्रशासनिक पदों को मंजूरी दी थी. लेकिन सुधारों की तात्कालिकता के बावजूद, नियुक्तियों की रफ्तार धीमी रही है. अब तक इन 16 नए पदों में से केवल 8 पद ही भरे जा सके हैं. 

डायरेक्टर स्तर के 5 पदों पर अभी भी कोई नियुक्ति नहीं हुई है. यह 50% खाली पद चिंता का विषय बने हुए हैं, क्योंकि ये पद विशेष रूप से उन प्रशासनिक और परिचालन कमियों को दूर करने के लिए बनाए गए थे, जो NEET विवाद में खुलकर सामने आई हैं.

कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं ज्यादातर कर्मचारी

योजना के अनुसार, NTA में 10 वर्टिकल्स बनाए जाने थे, जिनके प्रमुख डायरेक्टर स्तर के अधिकारी होंगे और दो एडिशनल डायरेक्टर जनरल स्तर के अधिकारी जवाबदेही तय करेंगे. राधाकृष्णन कमेटी ने एक बड़ी चिंता यह भी जताई थी कि NTA कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) के कर्मचारियों पर बहुत अधिक निर्भर है. पिछले साल संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद खाली होने के बावजूद एजेंसी में 43 कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे थे.

NTA के प्रशासनिक ढांचे में संयुक्त निदेशक का पद पहले नहीं था, जिससे पता चलता है कि संगठन को बदलने के लिए कितने बड़े प्रयास किए जा रहे हैं. संयुक्त निदेशक के पदों पर पहले अर्चना शुक्ला (भारतीय सांख्यिकी सेवा), अमित कुमार (भारतीय आपूर्ति सेवा) और शिवानी (भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा) की नियुक्ति की गई थी. अब आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगढिया के आने से 8 में से 5 पद भर गए हैं, जबकि 3 पद अब भी खाली हैं.

डायरेक्टर स्तर पर अब तक केवल तीन नियुक्तियां हुई हैं. संदीप कुमार मिश्रा (IRS-आयकर), पवन कुमार शर्मा (भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियर्स सेवा), और विजयकुमार विनायकराव पाटिल (भारतीय आयुध कारखाना सेवा).

राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें

इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति ने केवल परीक्षा की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उससे कहीं आगे के सुधारों की सिफारिश की थी. 

  • अलग-अलग विभागों (वर्टिकल्स) के जरिए NTA का पूरी तरह से नया ढांचा तैयार किया जाए.
  • एक स्थायी लीडरशिप सिस्टम और मजबूत आंतरिक प्रशासन हो.
  • बाहरी एजेंसियों (आउटसोर्सिंग कंपनियों) पर सख्त निगरानी रखी जाए.
  • NTA, राज्यों, पुलिस और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल हो.

'लीडर सही होना चाहिए'

समिति के सदस्य पंकज बंसल ने एनडीटीवी (NDTV) को बताया कि 2026 का पेपर लीक भी उन्हीं पुरानी कमियों को दर्शाता है, जो 2024 के संकट के बाद सामने आई थीं. उन्होंने कहा, "हमने लगभग 37,000 सुझाव लिए और आखिरकार करीब 95 सिफारिशों वाली 185 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी.
हमारी एक प्रमुख सिफारिश यह थी कि एडिशनल सचिव स्तर या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी को NTA का महानिदेशक (DG) होना चाहिए. नेता का सही होना जरूरी है और अब अभिषेक सिंह को एजेंसी का प्रमुख बनाकर हमें सही लीडर मिल गया है."

बंसल ने अभिषेक सिंह के 'डिजीयात्रा' (DigiYatra) के काम का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि उम्मीदवारों की पहचान और परीक्षा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए परीक्षाओं में भी इसी तरह की तकनीक-आधारित वेरिफिकेशन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा सकता है. उनके अनुसार, समिति के सुझावों में पेपर की छपाई, उसके स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की सुरक्षित कस्टडी से जुड़े कड़े प्रोटोकॉल भी शामिल थे.

कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा सुधार का मुद्दा

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NTA के पुनर्गठन या उसकी जगह किसी नई संस्था को लाने की मांग की है. साथ ही, NEET-UG 2026 परीक्षा को अदालत की निगरानी में दोबारा कराने की मांग की है. याचिका में पेपर्स की डिजिटल लॉकिंग, केंद्र-वार परिणाम जारी करने और कंप्यूटर-आधारित परीक्षा मॉडल अपनाने की बात कही गई है.

इसके अलावा यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए तर्क दिया है कि NTA वर्तमान में केवल 'सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट' के तहत रजिस्टर्ड एक सोसाइटी है, जिससे जवाबदेही की कमी पैदा होती है. याचिका में NTA को भंग करने और एक नई सरकारी एजेंसी बनाने की बात कही गई है. 

भरोसा कायम रखना है बड़ी चुनौती

फिलहाल, केंद्र सरकार प्रशासनिक बदलावों, तकनीकी सुधारों और बाकी तमाम तरीकों से संस्था को मजबूत करने में जुटी है. लेकिन शीर्ष पदों पर खाली पड़े पदों, परीक्षा में गड़बड़ी की जांच और बार-बार होने वाले विवादों के बीच, NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा आयोजित कराना नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था पर जनता का भरोसा दोबारा कायम करना है.

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