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बाबा नीम करौली का चमत्कारी किस्सा: हार्वर्ड से नशे की गोलियां लेकर कैंची धाम आए साइंटिस्ट रिचर्ड कैसे बने 'रामदास'

रिचर्ड उत्तराखंड के कैंची धाम जब पहुंचे तो उनको लगा कि वह कहां ही आ गए हैं, उनको वापस अमेरिका चले जाना चाहिए. किताबों की दुनिया में जीने वाले अल्बर्ट भारतीय साधु-संतों को ढोंगी और अंधविश्वासी मानते थे.

बाबा नीम करौली का चमत्कारी किस्सा: हार्वर्ड से नशे की गोलियां लेकर कैंची धाम आए साइंटिस्ट रिचर्ड कैसे बने 'रामदास'
Neem Karoli Baba Harvard Professor Richard Alpert story: नीम करौली बाबा के चमत्कार से जुड़ी कहानी.

बाबा नीम करौली पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों काफी चर्चा में है. फिल्म में बाबा से जुड़े चमत्कारों के बारे में बताया गया है. इस बीच बाबा नीम करौली के कई भक्त एक बार फिर से चर्चा में हैं. एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स  के बारे में तो सभी जानते हैं, जिन्होंने नीम करोली बाबा से प्रेरणा लेकर ही बड़ा बिजनेस खड़ा कर दिया. लेकिन बहुत ही कम लोग बाबा के दूसरे विदेशी शिष्य रिचर्ड अल्बर्ट के बारे में जानते होंगे.रिचर्ड अल्बर्ट अमेरिका की फेमस हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थे.

ये किस्सा है 1967 का, जब रिचर्ड इंसानी दिमाग की गहराई को समझने के लिए अमेरिका से भारत आ पहुंचे. वह उत्तराखंड के कैंची धाम जब पहुंचे तो उनको लगा कि वह कहां ही आ गए हैं, उनको वापस अमेरिका चले जाना चाहिए. किताबों की दुनिया में जीने वाले अल्बर्ट भारतीय साधु-संतों को ढोंगी और अंधविश्वासी मानते थे. फिर उनकी मुलाकात बाबा नीम करौली से हुई. उनसे मिलते ही रिचर्ड का पूरा जीवन ही बदल गया. उन्होंने 1971 में लिखी ऐतिहासिक किताब 'बी हियर नाउ' (Be Here Now) में बाबा से जुड़े एक चमत्कारी किस्से का जिक्र किया था. 

बाबा नीम करौली से जुड़ा चमत्कारी किस्सा

 दरअसल रिचर्ड ड्रग्स लेते थे. भारत आने से पहले उन्होंने अपने एक साथी संग मिलकर एलएसडी जैसे साइकेडेलिक पदार्थों पर काफी रिसर्च की थी. अल्बर्ट को लगता था कि एलएसडी का सेवन करने से इंसान उच्च चेतना जैसा अनुभव करता है. उनके मन में सवाल था कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना किसी दवा के हमेशा के लिए इस उच्च चेतना की स्थिति में रह सके? 

रिचर्ड ने देखी नीम करौली बाबा की महिमा

बाबा से मिलते ही अल्बर्ट की मन की वैज्ञानिक जिज्ञासाएं भी शांत हो गईं. उनको जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनके पास जो गोलियां हैं बाबा उनके बारे में पहले से जानते हैं. बाबा ने उनसे अचानक पूछा कि क्या तुम्हारे पास दवा है? ये सुनते ही रिचर्ड चौंक गए.क्यों कि उस वक्त उनके पास बहुत ही हैवी एलएसडी की एक खुराक थी. बाबा ने उनसे 3 गोलियां लेकर अपने मुंह में रख लीं. ये दखते ही रिचर्ड घबरा गए. 900 माइक्रोग्राम की मात्रा किसी इंसान को मानसिक रूप से बीमार कर सकती थी. शख्स इसे लेकर कोमा में भी जा सकता था. 

एलएसडी दवा का बाबा पर नहीं हुआ असर

रिचर्ड को डर था कि बाबा को कुछ हो न जाए. वह टकटकी बांधे उनके मुंह की तरफ देखते रहे कि तबीयत बिगड़ते ही उनको कुछ करना होगा. लेकिन पूरा दिन निकल गया बाबा तो एकदम ठीक थे. उन पर तो एलएसडी को कोई असर ही नहीं हुआ. वह तो बिल्कुल नॉर्मल थे. लेकिन रिचर्ज अंदर से विचलित थे, उनके ये भाव बाबा को समझ आ गए थे. 

बाबा नीम करौली ने समझाया आनंद की असली मतलब

बाबा ने रिचर्ड से हंसते हुए कहा कि ये गोलियां इंसान को कुछ वक्त के लिए उच्च चेतना में ले जा सकती हैं लेकिन हमेशा के लिए नहीं. हमेशा उच्च चेतना में रहने का असली तरीका प्रेम, भक्ति और ध्यान है. किसी बाहरी चीज से ये संभव नहीं. बाबा ने कहा कि अगर नशा करना ही है तो राम नाम का करो. बस तभी रिचर्ड को समझ आ गया कि कोई भी बाहरी चीज परम आनंद नहीं दे सकती. अब उनको अपने सवालों का जवाब मिल चुका था. बाबा ने रिचर्ड को नया नाम रामदास दिया, मतलब ईश्वर की सवा करने वाला.इस घटना के बाद रामदास ने ड्रग्स छोड़ दीं और भक्ति, योग और ध्यान के रास्ते पर चल पड़े. 

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