
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में रक्षा उत्पादन 1 लाख तेरह हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है
- आत्मनिर्भर भारत के तहत IIT और IISC जैसे संस्थान रक्षा क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.
- रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करके भारत ने रक्षा निर्यात को चौबीस हजार करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है.
एनडीटीवी के डिफेंस समिट में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आने वाली चुनौतियों और उसके लिए भारत के डिफेंस सिस्टम की तैयारियों और इसके खर्च पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि पहले डिफेंस को जरूरी खर्च कहा जाता था, आज हम डिफेंस इकोनॉमिक्स की बात करते हैं. उन्होंने कहा कि हम भारत में 1.3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन कर रहे हैं. भारत डिफेंस में आत्मनिर्भर बने, इसके लिए IIT, IISC काम में जुटे हुए हैं.
रक्षा मंत्री ने कहा लोगों को लगता है कि डिफेंस सेक्टर सिर्फ सीमाओं की रक्षा और सैन्य बल की मजबूती तक ही सीमित है. लेकिन ऐसा नहीं है. आज रक्षा क्षेत्र हमारी इकॉनमी को सशक्त बनाने और उसके भविष्य को सुरक्षित रखने वाला स्तंभ बन गया है. यह क्षेत्र हमारे देश की पूरी इकॉनमी के संरक्षण और सुरक्षा का भी जिम्मेदार बन रहा है. आज के समय में डिफेंस सिस्टम जॉब क्रिएशन, मेन्युफेक्चरिंग और हाई इन टेक्नोलॉजी इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण और बड़ा जनरेटर है.
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नई चुनौतियां आने पर पुरानी का पता चलता है
उन्होंने कहा कि NDTV के डिफेंस समिट आयोजन के लिए इससे अच्छा समय कोई और हो ही नहीं सकता. एक तरफ भारतीय सेनाओं ने कुछ ही दिन पहले ऑपरेशन सिंदूर के जरिए अपने शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया. वहीं दूसरी तरफ पूरी दुनिया में कई जगहों पर आज ट्रेड को लेकर युद्ध की स्थिति बनी हुई है.
हम 21 सेंचुरी का पहला क्वार्टर पूरा कर चुके हैं ऐसे में हमको इतिहास की तरफ भी देखना होगा. हमें अपने अतीत से सीख लेकर वर्तमान की परिस्थितियों को व्यापक तरीके से समझने की जरूरत है. जब दुनिया 1999 से 2000 में प्रवेश कर रही थी तब पूरी सेंचुरी का ट्रांजेशन था. चुनौतियां क्या होती हैं ये हमको तब समझ में आता है जब हम नई चुनौतियों की तरफ बढ़ते हैं. समय के साथ हमको पुरानी चुनौतियां छोटी लगने लगती हैं.
इकॉनमी के लिए आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी
डिफेंस के क्षेत्र में बाहरी निर्भरता अब हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है.वर्तमान स्थिति में हमारी इकॉनमी के लिए आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है. हमको और विकल्प चाहिए भी नहीं. सरकार का यही मानना रहा है कि आत्मनिर्भर भारत के जरिए हम अपनी स्ट्रैटिजिक इकॉनमी को मजबूत रख सकें. आने वाले समय में यही दृष्टिकोण हमको सुरक्षित रखेगा और दुनिया की उभरती हुई शक्तियों में हरमको अग्रणी स्थान दिलवाएगा.
देश का रक्षा मंत्री होने के नाते मैं यह सह सकता हूं कि देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सिद्धांत क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है. हमने सेना को रीऑर्गजाइज और इंटिग्रेट करने का साहसिक फैसला लिया. यह कोई सुधार नहीं बल्कि एक रणनीतिक वजह थी. शसस्त्र बलों में महिला बलों को शामिल करना का साहिक निर्णय भी लिया गया.
हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 24 हजार करोड़ तक पहुंचा
सरकार ने 10 साल पहले ही यह समझ लिया था कि बिना आत्मनिर्भर हुए हम कभी भी वास्तविक रूप से सुरक्षित नहीं हो सकते. हालांकि उस समय हमारे पास बहुत सी चुनौतियां थीं. उस समय हमारा जरूरी फिडेंस हार्डवेयर के लिए दूसरों पर निर्भर थे. हमारा डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम में प्राइवेट इंडस्ट्रियल सेक्टर की भी कोई खास भागीदारी नहीं थी. हम सिर्फ पब्लिक सेक्टर पर ही निर्भर थे. इसके साथ ही डिफेंस प्लानिंग, एडवांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर पर्याप्त फोकस नहीं था. इसीलिए हमको बाहरी देशों की तरफ देखना पड़ता था.
हमने डिफेंस एक्सपोर्ट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. 2014 में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 100 करोड़ से भी कम था वहां अब बढ़कर 24 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लेवल तक पहुंच गया है.भारत अब सिर्फ वायर नहीं इंपोर्टर भी बन चुका है.
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