- दिल्ली-एनसीआर में अवैध पार्किंग पर NDTV की मुहिम जारी है.
- लक्ष्मी नगर से लेकर निर्माण विहार तक के इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था अब भी बदहाल.
- अवैध पार्किंग के बीच ई-रिक्शा भी बढ़ा रहे हैं दबाव
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में अवैध पार्किंग के खिलाफ NDTV की मुहिम लगातार जारी है. उत्तर दिल्ली में रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए कई स्थानों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की. हालांकि, पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर से लेकर निर्माण विहार तक के इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था अब भी बदहाल नजर आती है. सड़कों पर अव्यवस्था, अवैध पार्किंग और अनियंत्रित यातायात लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं. इलाके में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि लक्ष्मी नगर और निर्माण विहार के बीच पूरे क्षेत्र में केवल चार पुलिसकर्मी तैनात हैं. दो शिफ्टों में ड्यूटी होने के कारण संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. पुलिसकर्मियों का कहना था कि जब कार्यभार बढ़ जाता है, तब स्थिति संभालने के लिए होमगार्ड की मदद लेनी पड़ती है.
(दिल्ली-एनसीआर में आप गाड़ी लेकर कहीं भी जाएं,…मार्केट, कॉमर्शियल बिल्डिंग, ऐतिहासिक स्थल, मंदिर, बड़े पार्क या फिर रेस्टोरेंट, वहां पहुंचते ही सबसे पहले जो व्यक्ति आपसे मुखातिब होता है वो है पार्किंग की पर्ची काटता कर्मचारी. कई जगहों पर ये कर्मचारी नगर निगम या विकास प्राधिकरणों द्वारा अधिकृत भी होते हैं लेकिन राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के जिलों की अधिकतर जगहों पर पार्किंग शुल्क के नाम पर पर्ची माफिया काम कर रहा है. ये वो लोग हैं जिन्हें ना तो किसी ने पार्किंग के लिए अधिकृत किया है और ना ही जिस जगह पर ये गाड़ियां पार्क करवाकर पैसे वसूलते हैं वहां पार्किंग का कोई शुल्क तय है. अगर आप इनसे सवाल-जवाब करें या पैसे देने से मना करें तो दबंगई दिखाने को भी ये तैयार रहते हैं. ndtv.in ऐसे ही पार्किंग माफिया के खिलाफ चला रहा है मुहिम. इस सीरीज की तीसरी किस्त में पढ़िए, पूर्वी दिल्ली में कैसे चल रहा है अवैध पार्किंग का खेल.)

कम निगरानी का असर, दुकानों के सामने खड़े मिलते हैं वाहन
स्टाफ की कमी का असर सड़कों पर भी साफ दिखाई देता है. लक्ष्मी नगर और आसपास के बाजारों में कई स्थानों पर लोगों को दुकानों के सामने बिना किसी अनुमति के वाहन खड़े कर चले जाते देखा गया. इससे न केवल ट्रैफिक प्रभावित होता है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
अवैध पार्किंग के बीच ई-रिक्शा भी बढ़ा रहे हैं दबाव
सड़कों पर अव्यवस्था केवल पार्किंग तक सीमित नहीं दिखाई दी. इलाके में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चलते नजर आए. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ई-रिक्शा चालक मनमाने ढंग से वाहन चलाते हैं, जिससे जाम की समस्या और बढ़ जाती है. हालांकि, ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था स्पष्ट नजर नहीं आती.

'नो पार्किंग' बोर्ड लगे, लेकिन नियमों की खुली अनदेखी
व्यवस्था पर सवाल तब और गहरे होते हैं जब नियमों के उल्लंघन के उदाहरण खुलेआम दिखाई देते हैं. रिपोर्टिंग के दौरान कई ऐसे स्थान भी मिले जहां स्पष्ट रूप से 'नो पार्किंग' के बोर्ड लगे थे, लेकिन इसके बावजूद वहां कारें खड़ी थीं. नियमों की इस खुलेआम अनदेखी से ट्रैफिक प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं.
सिर्फ जाम नहीं, सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी सामने आईं
ट्रैफिक अव्यवस्था के बीच सुरक्षा संबंधी खतरे भी दिखाई दिए. निर्माण विहार के पास दिल्ली जल बोर्ड का कार्य चल रहा है. इस दौरान एक स्थान पर लोहे का जंग लगा रॉड सड़क की ओर निकला हुआ दिखाई दिया. उसकी स्थिति काफी खराब थी और रात के समय वहां से गुजरने वाले लोगों को यह आसानी से दिखाई नहीं दे सकता. स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते इसे सुरक्षित नहीं किया गया तो यह दुर्घटना का कारण बन सकता है.

लक्ष्मी नगर मेट्रो के आसपास दिनभर ट्रैफिक का भारी दबाव
पूर्वी दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन के आसपास दिनभर भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिला. सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
शकरपुर में भी पार्किंग व्यवस्था को लेकर भ्रम की स्थिति
लक्ष्मी नगर से आगे बढ़ने पर शकरपुर इलाके की तस्वीर भी अलग नहीं दिखी. यहां की सर्विस लेन में बड़ी संख्या में बाइक खड़ी दिखाई दीं. जब स्थानीय लोगों और वाहन चालकों से पूछा गया कि पार्किंग वैध है या अवैध, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका. इससे पार्किंग व्यवस्था को लेकर भ्रम और अनियमितता की स्थिति सामने आई.

निर्माण विहार मेट्रो के नीचे भी अव्यवस्था बरकरार
शकरपुर के बाद निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन के नीचे और आसपास भी वाहनों की अवैध पार्किंग देखी गई. मेट्रो स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान के आसपास ऐसी स्थिति ट्रैफिक प्रबंधन और यात्री सुविधाओं पर सवाल खड़े करती है.
शिकायत के लिए नंबर जारी, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं
पार्किंग व्यवस्था की निगरानी को लेकर एक और सवाल निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन के बाहर सामने आया. यहां एक पार्किंग स्थल मिला, जहां लगे बोर्ड पर इसे MCD के अधीन पार्किंग बताया गया था. बोर्ड पर यह भी लिखा था कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर नागरिक दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं. सत्यता जानने के लिए दिन में करीब 4 बजे 011-23227505 पर कॉल किया गया. हालांकि, फोन की घंटी लगातार बजती रही लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की. ऐसे में सवाल उठता है कि नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए जारी किए गए संपर्क नंबर कितने प्रभावी हैं?

कार्रवाई के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फासला
उत्तर दिल्ली में कार्रवाई के बाद जहां कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले, वहीं पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, निर्माण विहार और शकरपुर जैसे इलाकों में अवैध पार्किंग, ट्रैफिक अव्यवस्था और निगरानी की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. सवाल यह है कि क्या संबंधित एजेंसियां इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाएंगी, या फिर दिल्लीवासियों को इसी अव्यवस्था के बीच रोजाना सफर करना पड़ेगा.
अगर आप भी हैं पार्किंग माफिया के शिकार तो अपनी शिकायत, सुझाव हमें मेल करें- edit.blogs@ndtv.com
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