- महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों गुटों के बीच अजित पवार पर लिखे लेख को लेकर विवाद हो गया है
- एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने लेख में अजित पवार की छवि खराब करने का आरोप लगाकर माफी की मांग की है
- शरद पवार गुट के शशिकांत शिंदे ने कहा कि विलय का मुद्दा अब उनके लिए पूरी तरह खत्म हो चुका है
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों गुटों के बीच कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है. एनसीपी के दिवंगत नेता अजित पवार पर लिखे गये एक लेख को लेकर दोनों गुटों ने शनिवार को एकदूसरे पर निशाना साधा. एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने जहां लेख के लिए माफी की मांग करते हुए दावा किया कि इसमें अजित पवार के निधन के बाद भी उन्हें बदनाम किया गया है. वहीं एनसीपी (शरद पवार) के महाराष्ट्र प्रमुख शशिकांत शिंदे ने कहा कि विलय का मुद्दा उनके लिए अब क्लोज चैप्टर है.
बदनामी का आरोप, माफी की मांग
शरद पवार गुट के नेता शशिकांत शिंदे ने पार्टी के मुखपत्र ‘राष्ट्रवादी' में यह लेख लिखा था. एनसीपी के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने लेख की निंदा करते हुए शिंदे से माफी की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि लेख में अजित पवार द्वारा अविभाजित एनसीपी को छोड़ने की परिस्थितियों के बारे में झूठे और भ्रामक दावे किए गये हैं. परांजपे ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद भी उनकी छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके परिवार से माफी मांगी जानी चाहिए. पार्टी कार्यकर्ता इन आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देंगे.
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विलय पर पवार गुट ने क्या कहा?
उधर, शशिकांत शिंदे ने पत्रकारों से कहा कि एनसीपी के दोनों गुटों में विलय पर अंतिम निर्णय स्थानीय निकाय चुनावों के बाद लिया जाना था और इसका ढांचा चर्चाओं के जरिए तय होना था.अब अजित पवार के निधन के बाद इस संभावित विलय पर चर्चा का कोई मतलब नहीं है.
शिंदे ने कहा कि ऐसी धारणा बनाई जा रही थी कि उनका गुट विलय के लिए दबाव डाल रहा है, जो सही नहीं है. हमारे लिए यह मुद्दा अब खत्म हो चुका है. पार्टी ने अब खुद को फिर से संगठित करने पर फोकस करने का फैसला किया है. अपने लेख का हवाला देते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने यह दावा नहीं किया था कि अजित पवार ने गलती की है. मैंने केवल इतना कहा था कि वह पार्टी में व्याप्त विभाजन को दूर करना चाहते थे.
लेख में ऐसा क्या लिखा था?
एनसीपी शरद पवार गुट की पत्रिका राष्ट्रवादी के फरवरी अंक में एक लेख में शशिकांत शिंदे ने दावा किया था कि अदृश्य शक्तियों की चालों, धमकियों और झूठे आरोपों के जाल ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी जिसने अजित पवार को मूल संगठन से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया और इससे शरद पवार द्वारा स्थापित पार्टी में विभाजन हो गया.
एनसीपी ने क्या आरोप लगाया?
अजित पवार द्वारा ‘षड्यंत्र या दबाव' के कारण पार्टी छोड़ने के दावों को खारिज करते हुए परांजपे ने कहा कि उन्होंने वर्षों से आंतरिक चर्चाओं के दौरान लगातार बीजेपी से गठबंधन की वकालत की थी. परांजपे ने अजित पवार की मृत्यु के तुरंत बाद शरद पवार गुट द्वारा शुरू की गई विलय वार्ता की टाइमिंग की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक रूप से असंवेदनशील बताया.
भुजबल ने भी दिया बयान
उन्होंने दोहराया कि पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले ही साफ कर चुके हैं कि विलय का मुद्दा फिलहाल पार्टी के एजेंडे में नहीं है. एनसीपी के वरिष्ठ नेता व राज्य मंत्री छगन भुजबल ने हैरानी जताई कि हर रोज विलय पर चर्चा करने की क्या जरूरत है. उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार अब उपमुख्यमंत्री हैं और जल्द ही एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी. वह इस मामले पर चर्चा करेंगी और फैसला लेंगी.
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