NEET पेपर लीक के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों को लेकर बनाई गई हाई पावर कमेटी के चीफ नंदन नीलेकणि ने एक इंटरव्यू में परीक्षा में सुधारों पर बातचीत की है. उन्होंने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में खुलकर बात की और कहा कि कैसे पेपर लीक से बचा जा सकता है. इस दौरान नीलेकणि ने नीट में एक ही परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया. इसके अलावा नीलेकणि ने कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी सीबीटी को लेकर भी बात की, उन्होंने बताया कि भारत में कितने सेंटर्स पर ऐसी सुविधा मौजूद है.
पेपर लीक को रोकने का तरीका
नंदन नीलेकणि ने कहा कि "हमें एक ही क्वेश्चन पेपर रखने की जरूरत क्यों है? आपके पास अगर एक ही क्वेश्चन पेपर होता है तो वैसे ही उसे बेचने या आर्थिक फायदा लेने के चांस बढ़ जाते हैं. इसीलिए इस समस्या से निपटने के लिए हमारे पास क्वेश्चन्स का एक बड़ा बैंक होना जरूरी है. परीक्षा वाले दिन आखिरी मिनट पर उस परीक्षा का क्वेश्चन पेपर तैयार किया जाना चाहिए. इससे लीक होने का खतरा काफी कम हो जाएगा और पेपर बेचने का कोई लालच भी नहीं रहेगा. क्योंकि ऐसे में लीक या फिर बेचने का वक्त ही नहीं होगा."
CBT मोड पर क्या बोले नीलेकणि?
नीट परीक्षा को सीबीटी मोड यानी कंप्यूटर आधारित बनाने की मांग हो रही है. इस पर हाई पावर कमेटी के चीफ नंदन नीलेकणि ने कहा, "दूसरी बात है कि ये कैसे सुनिश्चित किया जाए कि सभी परीक्षाएं कंप्यूटर-आधारित (CBT) हों, इसके लिए कई जगहों पर सेंटर्स के नेटवर्क की जरूरत होगी. अभी हमारे पास ऐसी 150000 जगहें हैं, जहां कोई भी छात्र आकर परीक्षा दे सकता है. इसे और ज्यादा बढ़ाने की जरूरत है. मुझे लगता है कि ये सिस्टम से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें हम अपनी कमेटी में सुलझाएंगे और प्रधानमंत्री हमारे फैसलों को लागू करने के लिए बेहद गंभीर हैं."
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