- महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी में राज्य सभा की एक सीट को लेकर सहयोगी दलों के बीच सहमति नहीं बन सकी है
- कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की ताकत बढ़ाने के लिए राज्य सभा की यह सीट अपने लिए जरूरी बताई है
- शरद पवार गुट ने वरिष्ठ नेता के अनुभव और राष्ट्रीय प्रभाव को देखते हुए उम्मीदवार उनके खेमे से होने का पक्ष रखा
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर महाविकास आघाड़ी (मविआ) के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है. राज्य सभा की एक सीट को लेकर हुई बैठक में सहयोगी दलों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी. खासतौर पर शरप पवार की एनसीपी और कांग्रेस के बीच सीट को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जबकि शिवसेना (Uddhav Balasaheb Thackeray) की अनुपस्थिति ने सियासी अटकलों को और तेज कर दिया है.
कांग्रेस का दावा: राष्ट्रीय राजनीति में मजबूती जरूरी
बैठक में कांग्रेस ने साफ किया कि राज्य की राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण इस समय राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है. पार्टी का ये भी तर्क है कि राज्य सभा में उसकी संख्या बढ़ना आवश्यक है, ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष की आवाज और भी मजबूत हो सके. कांग्रेस के नेताओं ने एकदम साफ कहा कि यह सीट उन्हें मिलनी चाहिए ताकि संसद के उच्च सदन में पार्टी की प्रभावशीलता बढ़े.
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शरद पवार गुट का रुख: अनुभव और राष्ट्रीय उपस्थिति
दूसरी ओर, शरद पवार गुट के नेताओं का मत है कि वरिष्ठ नेता शरद पवार का अनुभव और राष्ट्रीय कद देखते हुए उम्मीदवार उसी खेमे से होना चाहिए. उनका कहना है कि इससे पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रभाव कायम रहेगा. सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की व्यक्तिगत इच्छा जानने के बाद ही गुट अपनी औपचारिक भूमिका तय करेगा. इस बीच जयंत पाटिल ने शरद पवार से मुलाकात की है और आगे की रणनीति पर चर्चा की है.
ठाकरे गुट की नाराजगी?
बैठक को लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा आदित्य ठाकरे की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दो बार बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए. बताया जा रहा है कि ठाकरे गुट राज्य सभा की यह सीट अपने हिस्से में चाहता है. उनका मानना है कि गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने के लिए यह सीट उन्हें मिलनी चाहिए. हालांकि, महाविकास आघडी की औपचारिक बैठक में ठाकरे गुट के किसी भी वरिष्ठ नेता की मौजूदगी नहीं रही.
विधान परिषद सीट पर अभी चुप्पी
बैठक में विधान परिषद की सीट को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई. फिलहाल पूरा फोकस राज्य सभा की सीट पर ही केंद्रित है.
क्या गठबंधन में दरार गहरी हो रही है?
मविआ के भीतर यह मतभेद ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्षी एकता की बात राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है. एक ही सीट के लिए तीनों घटक दलों का अलग-अलग दावा यह संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर असहजता बनी हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द सहमति नहीं बनी, तो यह मुद्दा केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावों में सीट बंटवारे और नेतृत्व के सवाल पर भी असर डाल सकता है. फिलहाल, बातचीत जारी है, लेकिन स्पष्ट है कि राज्य सभा की इस एक सीट ने महाविकास आघाड़ी के भीतर की रणनीतिक चुनौतियों को उजागर कर दिया है.
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