विज्ञापन

क्या एक दिन समुद्र के नीचे होगी मुंबई ? UN रिपोर्ट में बड़ा अलर्ट, 1.4 करोड़ लोगों के घरों पर खतरा

क्या एक दिन मुंबई के कुछ हिस्से समुद्र के नीचे चले जाएंगे? संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट में मुंबई, कोलकाता और ढाका को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र का बढ़ता जलस्तर दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोगों के घरों के लिए खतरा बन सकता है.

क्या एक दिन समुद्र के नीचे होगी मुंबई ? UN रिपोर्ट में बड़ा अलर्ट, 1.4 करोड़ लोगों के घरों पर खतरा
AI की सहायता से ली गई सांकेतिक तस्वीर

क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मुंबई के कुछ हिस्सों का पता तो वही रहे, लेकिन जमीन समुद्र के नीचे चली जाए? यह सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट का है.  UN महासचिव की रिपोर्ट में  मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले दशकों में इन शहरों के निचले इलाकों को हमेशा के लिए पानी में डूबो (Permanent Inundation) सकता है. हालात अगर इसी दिशा में बढ़ते रहे तो लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग इस खतरे की जद में हैं 

आखिर यह रिपोर्ट है क्या और किसने जारी की?

यह चेतावनी UN महासचिव की रिपोर्ट"Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address it" में दी गई है. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा के दस्तावेज़ A/81/74 के रूप में दर्ज है. रिपोर्ट में दुनिया भर में बढ़ते समुद्री जलस्तर और उससे पैदा होने वाले खतरों का आकलन किया गया है.रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यहां सबसे बड़ा खतरा आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के घरों और बस्तियों पर पड़ सकता है.

क्या सचमुच डूब सकते हैं मुंबई और कोलकाता?

यहां एक बात समझना जरूरी है. रिपोर्ट यह नहीं कहती कि पूरा मुंबई, पूरा कोलकाता या पूरा ढाका समुद्र में समा जाएगा. लेकिन रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर इन शहरों के निचले इलाकों में Permanent Inundation यानी ऐसा जलभराव पैदा कर सकता है जो अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बना रहे. इसी वजह से लाखों लोगों के घर प्रभावित होने की बात कही गई है.यानी कहानी केवल बाढ़ की नहीं है. चिंता इस बात की है कि अगर समुद्र लगातार आगे बढ़ता रहा तो कुछ इलाकों में लोगों के लिए रहना मुश्किल हो सकता है.

मुंबई के लिए खतरा दूसरों से ज्यादा क्यों माना जा रहा?

रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र किनारे बसे लगभग सभी बड़े शहर खतरे में हैं, लेकिन UN रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के सामने कुछ अतिरिक्त चुनौतियां भी हैं.रिपोर्ट में जमीन धंसने (Land Subsidence), भूजल में खारे पानी के प्रवेश और समुद्री तूफानों से आने वाली ऊंची लहरों का जिक्र किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब ये सभी कारक समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ जुड़ते हैं, तब खतरा और बढ़ जाता है.

आसान भाषा में समझें तो अगर समुद्र का पानी लगातार आगे बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ समुद्र किनारे की जमीन तक सीमित नहीं रहेगा. खारा पानी पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंच सकता है, कई इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है और समुद्री तूफानों के दौरान होने वाला नुकसान भी पहले से ज्यादा बढ़ सकता है.

UN रिपोर्ट यह भी कहती है कि मुंबई जैसे शहरों में बढ़ता समुद्री जलस्तर ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और सैनिटेशन जैसे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट में मुंबई को सिर्फ एक तटीय शहर नहीं, बल्कि उन बड़े महानगरों में गिना गया है जिन्हें आने वाले दशकों में सबसे ज्यादा तैयारी करने की जरूरत पड़ सकती है.मुंबई को लेकर इससे पहले भी कई रिपोर्टें चिंता जता चुकी हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की क्लाइमेट एक्शन प्लान रिपोर्ट में भी समुद्र के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन के असर का जिक्र किया गया था.

UN को अचानक इतनी चिंता क्यों हुई?

दरअसल समुद्र अब पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्री जलस्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ रहा था. लेकिन 2024 में यह बढ़ोतरी 5.9 मिलीमीटर रही, जो रिकॉर्ड स्तर है.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 2100 तक कम से कम 0.5 मीटर समुद्री जलस्तर वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है. वहीं कुछ रिसर्च में यह बढ़ोतरी 2 मीटर तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है.
ये भी पढ़ें: कितने अमीर हैं भगवान जगन्नाथ ? बैंक में ₹1912 करोड़, जमीन इतनी कि बस जाए नोएडा जैसा शहर

सिर्फ मुंबई नहीं, दुनिया के सैकड़ों शहरों पर खतरा

UN रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की करीब 77 करोड़ आबादी ऐसे तटीय इलाकों में रहती है जो ऊंचे ज्वार के स्तर से 5 मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं. रिपोर्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका का विशेष रूप से जिक्र किया गया है.इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी का असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहने वाला. दुनिया के कई बड़े तटीय शहरों और निचले इलाकों को भी आने वाले सालों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. रिपोर्ट में न्यूयॉर्क, मियामी और चीन के ग्वांगझोउ जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां सबसे बड़ा खतरा अरबों डॉलर की संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का है, जबकि दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी चिंता लोगों के घर और आबादी का पलायन है.
ये भी पढ़ें: MP से छोड़ा गया पानी, बिहार में बढ़ी टेंशन : सोन नदी में 5.25 लाख क्यूसेक का रिकॉर्ड बहाव

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Mumbai Sea Level, UN Report Indian Groundwater, UN Report Latest Data, Climate Change
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com