बिहार में पहले से गंगा, गंडक और कोसी के बढ़ते जलस्तर से बनी बाढ़ की चुनौती के बीच अब सोन नदी ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. मध्य प्रदेश के बाणसागर बांध और सोन नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का असर अब बिहार में दिखने लगा है. बाणसागर से छोड़ा गया पानी बिहार पहुंचने के बाद सोन नदी का जलप्रवाह तेजी से बढ़ा है और मंगलवार को नदी में इस साल का सबसे बड़ा बहाव दर्ज किया गया.
रिपोर्टों के मुताबिक सोन नदी में जलप्रवाह करीब 5.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया. बढ़ते दबाव को देखते हुए इंद्रपुरी बैराज के गेट लगातार खोले गए. पहले 56 गेट खुलने की जानकारी दी गई, जबकि बाद में बढ़ते जलप्रवाह के कारण सभी 69 गेट खोलने पड़े.
#WATCH भागलपुर, बिहार: गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से शहरी इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। pic.twitter.com/Bc7SbQBrkc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 2, 2026
बाणसागर से बिहार तक पानी कैसे पहुंचता है?
मध्य प्रदेश के रीवा-शहडोल क्षेत्र में स्थित बाणसागर बांध सोन नदी पर बना है. जब बांध के गेट खोले जाते हैं तो पानी सीधे सोन नदी के प्राकृतिक प्रवाह में छोड़ा जाता है. इसके बाद यही पानी मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश और झारखंड के कुछ हिस्सों से गुजरते हुए बिहार में प्रवेश करता है. बिहार में सोन नदी का सबसे बड़ा नियंत्रण बिंदु रोहतास जिले का इंद्रपुरी बैराज है. बाणसागर से छोड़ा गया पानी पहले डेहरी-ऑन-सोन और इंद्रपुरी बैराज तक पहुंचता है, फिर आगे भोजपुर, पटना (मनेर क्षेत्र) की ओर बढ़ते हुए गंगा में मिल जाता है. यही वजह है कि बाणसागर से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने का असर सबसे पहले दक्षिण और मध्य बिहार के सोन तटीय इलाकों में दिखाई देता है.

बाणसागर से छोड़े गए पानी का बिहार पर असर
बिहार जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के अनुसार, बाणसागर बांध से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी रविवार को छोड़ने के बाद मंगलवार तक बिहार पहुंचा. इसके चलते सोन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और डाउनस्ट्रीम इलाकों पर दबाव बढ़ गया. रोहतास, डेहरी, नासरीगंज और सोन तटीय क्षेत्रों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 31 अगस्त को भी बाणसागर के अतिरिक्त गेट खोलकर लगभग 3277 क्यूमेक्स पानी छोड़े जाने की सूचना दी गई थी. उस समय ही प्रशासन ने संकेत दिया था कि पानी की मात्रा बढ़ने पर और डिस्चार्ज किया जा सकता है.
इंद्रपुरी बैराज पर बढ़ा दबाव
सोन नदी में अचानक बढ़े जलप्रवाह का सबसे ज्यादा असर रोहतास जिले के इंद्रपुरी बैराज पर दिखा. जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए बैराज के गेट चरणबद्ध तरीके से खोले गए. मंगलवार तक स्थिति ऐसी हो गई कि सभी 69 गेट खोलने पड़े. अधिकारियों का कहना है कि बैराज और नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है.रोहतास के जिलाधिकारी ने भी नदी किनारे बसे गांवों और दियारा क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की बात कही है. प्रशासन ने निचले इलाकों में लोगों को चेतावनी दी है और नदी के पास अनावश्यक रूप से नहीं जाने को कहा है.
दक्षिण बिहार में क्यों बढ़ गया खतरा?
सोन नदी का बढ़ा जलस्तर सिर्फ रोहतास तक सीमित नहीं है. भोजपुर, औरंगाबाद, अरवल, पटना और सोन के किनारे बसे दियारा इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है. रिपोर्टों के अनुसार मनेर क्षेत्र में सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे निचले इलाकों में पानी फैलने की आशंका बढ़ गई है.औरंगाबाद जिले में भी सोन समेत कई नदियों के जलस्तर बढ़ने से गांव प्रभावित होने लगे हैं. प्रशासन राहत और निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने में जुटा है.
बिहार में बाढ़ का दबाव कई दिशाओं से
विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार इस समय एक साथ कई जल स्रोतों के दबाव का सामना कर रहा है. एक तरफ नेपाल में भारी बारिश और ग्लेशियल झीलों से पानी आने का असर गंडक और कोसी पर दिख रहा है, दूसरी तरफ गंगा का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर है. अब बाणसागर से छोड़ा गया पानी सोन नदी में अतिरिक्त दबाव पैदा कर रहा है.यही वजह है कि राज्य के कई जिलों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है और जल संसाधन विभाग चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है.
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