Mumbai Municipal Corporation Scam: मुंबई महानगरपालिका (BMC) में करीब 1,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडरों को रद्द कर दिया गया है. दरअसल जब महानगरपालिका में पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने के बाद केवल अफसरों का राज चल रहा था, उस दौरान ये टेंडर निकाले गए थे.इन टेंडरों पर भ्रष्टाचार और हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है.भाजपा द्वारा पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाने और कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के दावों के बाद इन निविदाओं को वापस ले लिया गया है. इसमें सड़कों के निर्माण, भायखला चिड़ियाघर के विस्तार और स्कूली सामान जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स शामिल थे.
भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई हलचल
मुंबई महानगरपालिका में पिछले कुछ समय से जारी निविदा प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठ रहे थे. दरअसल, जब बीएमसी में कोई जनप्रतिनिधि नहीं था और सिर्फ अधिकारी ही सारा काम देख रहे थे, उस दौरान लगभग 1,000 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे. इनमें पारदर्शिता की कमी और नियमों की अनदेखी की बात सामने आई थी. भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया पर मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि महज एक महीने के भीतर इतनी बड़ी संख्या में टेंडर निकालना संदेह पैदा करता है. पार्टी का दावा था कि यह पूरी योजना कुछ खास ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए गुपचुप तरीके से तैयार की गई थी.

इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर गिरी गाज
रद्द किए गए टेंडरों में कई बड़े और महत्वपूर्ण नागरिक प्रोजेक्ट्स शामिल थे. इसमें सबसे बड़ी रकम भायखला चिड़ियाघर यानी रानी बाग के विस्तार के लिए रखी गई थी, जिसके लिए 490 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया था. इसके अलावा, फुटपाथ रेलिंग के काम के लिए 380 करोड़ रुपये, सड़क मरम्मत के लिए 150 करोड़ रुपये और स्कूली सामान की खरीद से जुड़े 150 करोड़ रुपये के टेंडरों को भी निरस्त कर दिया गया है. इन कार्यों में स्टॉर्म वाटर ड्रेन यानी बारिश के पानी की निकासी जैसे जरूरी प्रोजेक्ट भी शामिल थे, जो सीधे तौर पर मुंबई की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े हैं.
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पारदर्शिता के लिए उठाया गया सख्त कदम
इस फैसले को बीएमसी के कामकाज में पारदर्शिता लाने की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. मुंबई भाजपा अध्यक्ष ने महानगरपालिका प्रशासन को पत्र लिखकर इन संदिग्ध टेंडरों के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी. विपक्ष का तर्क था कि यदि इन टेंडरों पर समय रहते रोक नहीं लगाई जाती, तो जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के करोड़ों रुपये का बंदरबांट हो जाता. बढ़ते दबाव और जांच की मांग के बीच बीएमसी ने इन निविदाओं को रद्द करना ही बेहतर समझा.
अब नए सिरे से शुरू होगी प्रक्रिया
प्रशासन द्वारा इन टेंडरों को रद्द किए जाने के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि इन सभी विकास कार्यों के लिए दोबारा टेंडर निकाले जाएंगे. नई प्रक्रिया में नियमों को और अधिक सख्त बनाने और पूरी पारदर्शिता बरतने की उम्मीद है ताकि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे. फिलहाल, इस फैसले ने बीएमसी के भीतर ठेकेदारी प्रथा और प्रशासनिक निर्णयों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है. यह स्पष्ट हो गया है कि अब भविष्य में होने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स पर सरकार और विपक्ष दोनों की पैनी नजर रहेगी.
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