मुंबई सरकार ने लोगों से तीन महीने के भीतर एलपीजी से पाइप नेचुरल गैस (PNG) पर शिफ्ट होने को कहा है और चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर एलपीजी कनेक्शन काटे जा सकते हैं. हालांकि यह भी कहा गया है कि जिन इलाकों में पीएनजी का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, वहां यह नियम लागू नहीं होगा, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इस नीति से काफी अलग नजर आ रहे हैं.
घरेलू जरूरतों से छोटे व्यवसाय तक: एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर
सायन इसका एक अहम उदाहरण बनकर सामने आता है, जहां कई इलाकों में आज भी पीएनजी का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह विकसित नहीं है. यहां के लोग घरेलू जरूरतों से लेकर छोटे व्यवसाय तक एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं, लेकिन अब एलपीजी की सप्लाई भी अनियमित होती जा रही है, जिससे परेशानी बढ़ गई है.
'कमर्शियल सिलेंडर खरीदना मुश्किल'
सायन के एक स्थानीय होटल संचालक बताते हैं, 'यहां पीएनजी का सवाल ही नहीं है, इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है. हम पूरी तरह कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर हैं और अब उसे भी लेना मुश्किल हो गया है.' उनका कहना है कि सिलेंडर समय पर नहीं मिलने की वजह से कई बार होटल बंद रखने पड़ते हैं. हम लोग अब कोयले पर खाना बना रहे हैं.
इसी तरह एक अन्य व्यवसायी बताते हैं, 'कमर्शियल सिलेंडर के लिए फॉर्म भरने के बाद भी इंतजार करना पड़ रहा है. सप्लाई समय पर नहीं मिलती, और इससे काम पर असर पड़ रहा है.' स्थिति केवल सायन तक सीमित नहीं है. लोअर परेल जैसे इलाकों में भी लोग इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा सिलेंडर
एक निवासी बताते हैं, 'जब सोसायटी का रिडेवलपमेंट हुआ था, तब पीएनजी का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था. हाल की स्थिति देखकर हमने तुरंत अप्लाई किया, लेकिन अभी भी इंतजार करना पड़ रहा है.' घरेलू उपभोक्ता भी इस संकट से अछूते नहीं हैं. एक अन्य निवासी ने बताया, 'पिछले कुछ हफ्तों में हमें 15-20 दिन तक गैस नहीं मिली. जैसे-तैसे बाद में मिली, लेकिन दिक्कत बहुत हुई.' कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कम सप्लाई के चलते उन्हें महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़े.
पीएनजी कनेक्शन लेने में आ रही समस्याएं
कई लोगों ने पीएनजी कनेक्शन के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है, लेकिन उन्हें अब कनेक्शन नहीं मिला. एक आवेदक बताते हैं, 'हमने फरवरी में ही अप्लाई कर दिया था, मंत्री के कहने से पहले... अभी इंजीनियर ने कहा है कि बैकलॉग बहुत है. 1-2 हफ्ते का समय बता रहे हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर अभी तैयार नहीं है.' वो आगे कहते हैं, टलाइन एक्सपैंशन का काम चल रहा है, लेकिन इसमें समय लगेगा. अभी जल्दी कनेक्शन मिलना मुश्किल लग रहा है.'
वहीं एलपीजी सप्लाई को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं. एक अन्य व्यक्ति का कहना है, 'गैस की फ्रीक्वेंसी बहुत कम हो गई है. कई बार हमें इंतजार करना पड़ता है, और कुछ लोगों को ब्लैक में भी लेना पड़ा.' सरकार का उद्देश्य भले ही एलपीजी पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को बेहतर बनाना हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह दिखाती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह तैयार नहीं है. कहीं नेटवर्क ही नहीं है, तो कहीं प्रक्रिया अधूरी है और कहीं सप्लाई अनियमित है.
ये भी पढ़ें: मुंबई के जैन मंदिर से 1.75 करोड़ के गहने की चोरी, आरोपी MP से गिरफ्तार, नेपाल भागने की थी पूरी तैयारी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं