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केवल 45 दिन के लिए पानी मौजूद, BMC ने सप्लाई में की कटौती- क्या मुंबई जल संकट की ओर बढ़ रही है?

मॉनसून के लेट होने की वजह से मुंबई पर पानी की कमी का खतरा मंडरा रहा है. शहर को करीब 395 करोड़ लीटर पानी हर दिन चाहिए और जल भंडार केवल 45 दिनों का है. तो क्या मुंबई गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ी है?

केवल 45 दिन के लिए पानी मौजूद, BMC ने सप्लाई में की कटौती- क्या मुंबई जल संकट की ओर बढ़ रही है?
मुंबई में पानी किल्लत- केवल 45 दिनों के लिए ही मौजूद है पानी का भंडार
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  • मुंबई में पानी सप्लाई की लाइफलाइन वहां के सात जलाशय हैं.
  • इन्हीं जलाशयों में जमा बारिश के पानी से पूरे साल शहर को इस्तेमाल करने योग्य पानी सप्लाई किया जाता है.
  • ये जलाशय बारिश के पानी से ही रिचार्ज होते हैं. कम या देर से बारिश की वजह से यहां जल संकट का खतरा होता है.

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इन दिनों एक बार फिर पानी को लेकर चर्चा में है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई के आखिर तक मुंबई को पानी देने वाले सात जलाशयों में कुल जल भंडार उनकी क्षमता के लगभग 20 प्रतिशत के आसपास रह गया था. इसी वजह से शहर में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करनी पड़ी. अब यह जल भंडार घट कर 15% पहुंच गया है. मुंबई की करीब 1.3 करोड़ आबादी और विशाल औद्योगिक-व्यावसायिक गतिविधियों को चलाने के लिए रोजाना हजारों मिलियन लीटर पानी की जरूरत होती है.

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पानी की 10% कटौती के बाद बीएमसी ने क्या बताया?

बृहन्मुंबई नगर निगम ने 15 मई से पूरे मुंबई में 10 प्रतिशत पानी की कटौती की घोषणा की है, जैसा कि एक प्रेस रिलीज में बताया गया है. बीएमसी की इस प्रेस रिलीज में बताया गया है कि पानी की आपूर्ति करने वाली झीलों में जल स्तर काफी कम है.

अधिकारियों ने मुंबई के नागरिकों से घबराने की अपील न करते हुए पानी का समझदारी से उपयोग करने की सलाह दी.

बीएमसी ने रिलीज में कहा, "यह फैसला महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के अनुसार, और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के उस पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसमें अगले साल मॉनसून के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है. यह संभावना संभावित अल नीनो और इंडियन ओशन डाइपोल घटनाओं से प्रभावित है. मुंबई के नागरिकों के लिए घबराने का कोई कारण नहीं है. हालांकि, बीएमसी प्रशासन की ओर से सभी नागरिकों से विनम्र अपील की जा रही है कि वे पानी का समझदारी से और कम से कम उपयोग करें."

बीएमसी ने आंकड़े भी दिए और बताया कि सोमवार तक मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले जलाशयों में कुल मिलाकर 340,399 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध है. यानी 1,447,363 मिलियन लीटर की वार्षिक आवश्यकता की तुलना में, उपयोग के योग्य पानी का भंडार केवल 23.52 प्रतिशत ही मौजूद है.

मुंबई में पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से सात झीलों और जलाशयों पर निर्भर है

मुंबई में पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से सात झीलों और जलाशयों पर निर्भर है
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कहां से आता है मुंबई का पानी?

मुंबई की जलापूर्ति मुख्य रूप से सात झीलों और जलाशयों पर निर्भर है. भात्सा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा, तानसा, मोदक सागर, विहार और तुलसी. इन सातों जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता करीब 14.47 लाख मिलियन लीटर (1.447 बिलियन क्यूबिक मीटर के बराबर) है.
बीएमसी की जल आपूर्ति रिपोर्ट के अनुसार मुंबई को रोज करीब 395 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध कराया जाता है. इसमें सबसे बड़ा योगदान भात्सा परियोजना का है, जो शहर की कुल जलापूर्ति का लगभग आधा हिस्सा देती है. यानी मुंबई अपनी रोजाना की पानी की जरूरतों के लिए पूरी तरह से बारिश के पानी पर निर्भर है.

सोमवार को बीएमसी के उच्चाधिकारियों ने एक मीटिंग में 2027 की गर्मियों तक पीने के लिए पर्याप्त पानी की सप्लाई का प्लान बनाने पर चर्चा की. 

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क्या 45 दिनों बाद मुंबई में पानी आना बंद हो जाएगा?

मंगलवार को, मुंबई की सात झीलों में कुल स्टॉक कुल क्षमता का 15 प्रतिशत या 2.21 लाख तक पहुंच गया. बता दें कि झील के हर एक प्रतिशत स्टॉक का मतलब, तीन दिनों तक पानी मुहैया कराया जा सकता है. तो मौजूदा 15% का स्टॉक मुंबई में 45 दिनों के लिए इस्तेमाल करने योग्य पानी मुहैया करा सकता है.

अब जबकि आंकड़े ये बता रहे हैं कि शहर के पास 45 दिन का पानी बचा है, तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि 45 दिन बाद नलों में पानी आना बंद हो जाएगा.

इसका मतलब है कि मौजूदा खपत दर को देखते हुए जलाशयों में उपलब्ध पानी लगभग 45 दिनों तक पर्याप्त माना जा रहा है. यदि इस दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होती या मानसून में देरी होती है, तो पानी कटौती बढ़ाई जा सकती है.

दूसरी तरफ यदि मानसून समय पर आता है और जिन क्षेत्रों में ये जलाशय हैं वहां अच्छी बारिश होती है तो कुछ ही हफ्तों में झीलों का स्तर तेजी से बढ़ सकता है.

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मॉनसून पर मुंबई की निर्भरता

मुंबई की जल व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत भी मानसून है और सबसे बड़ी कमजोरी भी. शहर को मिलने वाला लगभग पूरा पेयजल बारिश से भरने वाले जलाशयों से आता है. जून से सितंबर के बीच होने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसूनी बारिश ही इन झीलों को अगले पूरे साल के लिए भरती है.

यदि मानसून सामान्य रहता है तो संकट टल जाता है. लेकिन बारिश में कमी, देरी या भौगोलिक असमानता सीधे जल संकट में बदल सकती है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता मुंबई जैसे शहरों के लिए भविष्य की बड़ी चुनौती है.

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क्या ग्राउंडवाटर मुंबई की मदद कर सकता है?

इस सवाल का जवाब है- बहुत सीमित रूप में. मुंबई का जल तंत्र दिल्ली, लखनऊ या कई अन्य भारतीय शहरों की तरह ग्राउंडवाट पर आधारित नहीं है.

इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं-

पहला, मुंबई एक तटीय महानगर है. बड़े पैमाने पर भूजल दोहन से समुद्री पानी भूजल भंडार में प्रवेश कर सकता है, जिससे पानी के खारा होने का खतरा रहता है.

दूसरा, शहर की भूगर्भ की संरचना चट्टानी है. जिसे बड़े स्तर पर भूजल संग्रहण के अनुकूल नहीं माना जाता है. 

तीसरा, जो मौजूदा ग्राउंडवाटर है वो मुंबई की पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

इसी वजह से मुंबई में इस्तेमाल करने योग्य पानी का मुख्य आधार वहां बनाए गए जलाशय हैं जो बारिश के पानी को इकट्ठा करते हैं, न कि ग्राउंडवाटर.

यही वजह है कि मुंबई में कुछ वैकल्पिक योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जैसे- मनोरी में समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने के लिए डीसैलिनेशन प्लांट प्रस्तावित है. पुराने पाइपलाइन नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर भी काम चल रहा है ताकि पानी कम से कम बर्बाद हो. साथ ही रिसाइकिल वाटर के उपयोग को बढ़ावा देने की भी योजना है और जल की आपूर्ति को लेकर नई परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है.

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