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मुंबई में मेगा साइबर फ्रॉड! कंपनी का बॉस बनकर उड़ाए ₹10 करोड़, गिरोह पर पुलिस का एक्शन

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह कंपनी की वेबसाइटों से सीनियर एग्जीक्यूटिव की तस्वीरें और जानकारी इकट्ठा करके, फाइनेंस कर्मचारियों का कॉन्टैक्ट नंबर हासिल करके बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को टारगेट करता था.

मुंबई में मेगा साइबर फ्रॉड! कंपनी का बॉस बनकर उड़ाए ₹10 करोड़, गिरोह पर पुलिस का एक्शन
व्हाट्सएप मैसेज के जरिए स्कैमर ने दिया चकमा! (Photo: NDTV)
मुंबई:

महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है. स्कैमर ने कॉर्पोरेट कंपनी का एक सीनियर एग्जीक्यूटिव बनकर डिप्टी जनरल मैनेजर के साथ धोखाधड़ी करके ₹10.40 करोड़ से ज्यादा रुपए ट्रांसफर करवा लिए. अपराधी ने फ्रॉड करने के लिए व्हाट्सएप पर मैसेज किया था. मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इस अंतर-राज्यीय साइबर क्राइम नेटवर्क के मास्टरमाइंड का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं.

मुंबई पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी वाली रकम का करीब 50 फीसदी हिस्सा फ्रीज कर दिया गया है. बाकी रकम वापस पाने और संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को 3 जून को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज मिला, जिसमें दावा किया गया कि यह मैसेज कंपनी के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव की तरफ से है. प्रोफाइल में एग्जीक्यूटिव का नाम और फोटो नजर आ रही थी, जिससे अकाउंट असली लग रहा था. धोखाधड़ी करने वाले ने यह भी कहा कि वह लगातार मीटिंग में है और कर्मचारी को निर्देश दिया कि वह वेरिफिकेशन के लिए कॉल न करे.

निर्देशों को असली मानकर, फाइनेंस एग्जीक्यूटिव ने 3 जून से 15 जून के बीच 63 ट्रांजैक्शन के जरिए कंपनी का 10 करोड़ 40 लाख रुपए से ज्यादा का फंड ट्रांसफर कर दिया. धोखाधड़ी का पता तब चला, जब पीड़ित ने पेमेंट के लिए इनवॉइस मांगे और असली एग्जीक्यूटिव ने किसी भी ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने से इनकार कर दिया.

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पुलिस ने बताया कि यह गिरोह कंपनी की वेबसाइटों से सीनियर एग्जीक्यूटिव की तस्वीरें और जानकारी इकट्ठा करके, फाइनेंस कर्मचारियों का कॉन्टैक्ट नंबर हासिल करके बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को टारगेट करता था. कुछ मामलों में, कर्मचारियों को .zip फाइल के रूप में मैलवेयर भेजा गया, जिससे हमलावरों को WhatsApp Web सेशन का एक्सेस मिल गया और वे सीनियर एग्जीक्यूटिव बनकर बात करने में कामयाब हो गए.

जांच करने वालों ने बताया कि गिरोह ने मनी-लॉन्ड्रिंग का एक एडवांस तरीका भी अपनाया. चोरी किए गए फंड को 'म्यूल अकाउंट्स' यानी दूसरे लोगों के नाम पर खुले अकाउंट के जरिए घुमाया गया, कई राज्यों में सोने के गहने खरीदे गए और बाद में उन पर गोल्ड लोन लिया गया. लोन से मिली रकम को नए बैंक अकाउंट्स के जरिए ट्रांसफर किया गया, जिससे पैसे के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो गया.

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