भारत में जापान की अगली पीढ़ी की हाईस्पीड बुलेट ट्रेन E10 शिंकानसेन चलेगी, जो अभी की E2 और E5 सीरीज की ट्रेनों से कहीं बेहतर होगी. E10 बुलेट ट्रेन का आगे का हिस्सा बतख की चोंच जैसे लंबा होता है. इससे तेज स्पीड में हवा के दबाव और रगड़ को ये आसानी से काबू में कर लेती है. जब ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की हाईस्पीड में सुरंग में प्रवेश करती है तो तेज धमाके जैसी आवाज को भी ये काबू में रखती है. इस तकनीक को चोंच वाली नाक जैसी तकनीक (Duckbill Nose Profile) कहते हैं. इस ट्रेन के बाहरी हिस्से को ब्रिटिश कंपनी टैंजराइन ने तैयार किया है. ये जापान के चेरी ब्लॉसम और तोहोकू के जंगलों के आधार पर खूबसूरत हरे रंगों के तालमेल से बनी है. भारत में अगले साल से मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का पहला रूट सूरत से बिलिमोरा के बीच खोला जाना है. लेकिन जापान के साथ मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट पर E10 2030 तक लॉन्च होगी.
भूकंप से पूरी सुरक्षा
E10 बुलेट ट्रेन बड़े से बड़े भूकंप को भी आसानी से झेल लेगी. जापान और भारत (मुंबई-अहमदाबाद रूट के कुछ हिस्से) में भूकंप के जोखिम की संभावनाओं को देखते हुए इसे तैयार किया गया है. ट्रेन के नीचे खास L आकार के सेक्शन लगाए गए हैं, जो भूकंप के तेज झटकों में भी ट्रेन को पटरी से उतरने नहीं देते. भूकंप के कंपन और हिलने-डुलने का खतरा भूकंप के दौरान नहीं होता है.
Visuals of the High-Speed Trainsets India will be getting from Japan "the E5 and E10 trainsets"
— Trains of India 🇮🇳 (@trainwalebhaiya) January 21, 2025
E5 Hayabusa: 320kmph
E10 Alfa-X: 400kmph
Video Credits: 鉄道だっちゃ! It's railway! https://t.co/YBQ7wVel13 pic.twitter.com/Gjyvx1SBD1
E10 बुलेट ट्रेन का एडवांस ब्रेक सिस्टम
E10 बुलेट ट्रेन में एडवांस ब्रेक सिस्टम है. इमरजेंसी या भूकंप के वक्त ट्रेन फुल स्पीड 320 किमी प्रति घंटा से सिर्फ 3.4 किमी में पूरी तरह रुक जाएगी. पुरानी E5 बुलेट ट्रेन को ठहरने में 4-5 किमी का समय लगता था. जैसे ही जमीन के भीतर भूकंप की शुरुआती तरंगें उठती हैं, रूट पर लगे सेंसर्स पलक झपकते ही मेन कंट्रोल रूम और E10 ट्रेन को सिग्नल भेज देते हैं. ट्रेन का ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम सक्रिय होकर उसे रोक देता है.

E10 बुलेट ट्रेन की सीटें कैसी होंगी
E10 बुलेट ट्रेन में यात्रियों के लिए ज्यादा लेग रूम है. ज्यादा आराम के लिए स्पेशल कोचों में 2-2 सीटिंग अरेजमेंट है. बिजनेस क्लास कोच में चौड़ी लेदर कुशन वाली आरामदायक सीटें होंगी. E10 ट्रेन में पुरानी ट्रेनों की जगह एडवांस ट्रेन डेस्क कार कोच (Gran Class) भी होगा. इससे सफर के दौरान लैपटॉप पर काम करना आसान होगा. कोच की सीटों के आगे डेस्क और ऑनबोर्ड वाई फाई भी होगा. ट्रेन की हर सीट पर पावर सॉकेट और USB चार्जिंग पोर्ट होंगे.
E10 बुलेट ट्रेन का इंटीरियर कैसा है?
बुलेट ट्रेन इंटीरियर में सॉफ्ट, इनडायरेक्ट वॉश लाइटिंग होगी, जो आंखों को चुभती नहीं है. व्हीलचेयर यूज करने वाले दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए कॉरिडोर को चौड़ा बनाया गया है. विंडो सीट उनके लिए रिजर्व रहेगी. ब्रेल-इंटीग्रेटेड साइनेज और दिव्यांग अनुकूल टॉयलेट भी होंगे. यात्रियों की सहूलियत के लिए बड़े सामान रखने के लिए कोच के अंदर ही काफी जगह होगी.
इस ट्रेन के कोच मॉड्युलर डिजाइन के हैं, यानी इसमें भारी सामान भी ढोया जा सकेगा. E10 बुलेट ट्रेन में बिना ब्लोअर वाली एडवांस इंडक्शन मोटर और हल्के सिलिकॉन कार्बाइड इनवर्टर लगे हैं, इसमें कम एनर्जी खपत के साथ शोर कम होता है. E10 ट्रेनों को ऐसे डिजाइन किया गया है कि बिना ड्राइवर भी भविष्य में चलाया जा सकेगा.

E10 शिंकानसेन ट्रेनें किस धातु से बनी हैं
E10 शिंकानसेन ट्रेनों की बॉडी अल्ट्रा लाइटवेट एल्युमीनियम अलॉय से बनी है. स्टील की तुलना में एल्युमीनियम बहुत हल्का होता है. इससे बुलेट ट्रेन को 320 किमी की रफ्तार में चलने में कम ऊर्जा लगती है. ट्रेनों के पैनलों को डबल स्किन तकनीक से जोड़ा जाता है. दो एल्युमीनियम शीट के बीच में मधुमक्खी के छत्ते जैसी खोखली जगह होती है. यह डिजाइन ट्रेन को हल्का रखने के साथ मजबूती देता है.
हादसे के समय कोच पिचकते नहीं हैं. डबल स्किन एल्युमीनियम स्ट्रक्चर के बीच सोनिक और थर्मल इंसुलेशन के खाली स्पेस में एडवांस साउंड प्रूफिंग मैटेरियल होता है. यह 320 की रफ्तार में भी बाहर की हवा की सां-सां जैसी आवाज नहीं आने देता. हवा से टकराव की आवाज कोच के अंदर नहीं जाती. एल्युमीनियम में जंग नहीं लगती, जो समुद्री इलाके वाले मुंबई-अहमदाबाद रूट के लिए सबसे बेस्ट है.

60 सालों में कभी पटरी से नहीं उतरी
जापान में शिंकानसेन पिछले 60 साल में कभी पटरी से नहीं उतरी. कभी किसी घटना में किसी यात्री की जान नहीं गई. ट्रेन के आगे और नीचे सेंसिंग कैमरे होते हैं, जो पटरी पर किसी भी गड़बड़ी या ऊपर की बिजली लाइनों में आई खराबी को पहले ही भांप लेते हैं.
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360 डिग्री AI CCTV कैमरे की नजर
ट्रेन के हर डिब्बे, एंट्री गेट और कॉमन एरिया में AI से लैस CCTV कैमरे होंगे. कोई लावारिस बैग काफी देर तक पड़ा रहे या किसी अन्य संदिग्ध हरकत को सिस्टम तुरंत ट्रेन ड्राइवर और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता है. ट्रेन के नोज और दो कोचों के बीच में विशेष एनर्जी एब्जॉर्बर होते हैं, जो अगर टक्कर होती भी है तो पूरे झटके को खुद सोख लेता है. यात्रियों को खरोंच तक नहीं आएगी.

भारत में बुलेट ट्रेन के रूट
1. दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन
865 किलोमीटर लंबा दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट नोएडा, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, और भदोही होते हुए वाराणसी तक जाएगा. इसमें जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी कनेक्टिविटी पाएगा. जबकि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स - BKC), ठाणे, विरार, बोइसर के बाद गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन होंगे.

2. दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट को आगे पटना से सिलीगुड़ी तक ले जाने का प्रस्ताव है. यह रूट करीब 1600 किलोमीटर लंबा होगा. यह भारत की सबसे लंबी बुलेट ट्रेन होगी जो दिल्ली से सिलिगुड़ी तक चलेगी.
3. मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन (Mumbai-Pune)
4. पुणे-हैदराबाद बुलेट ट्रेन (Pune-Hyderabad)
5. हैदराबाद-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन (Hyderabad-Bengaluru)
6. हैदराबाद-चेन्नई बुलेट ट्रेन (Hyderabad-Chennai)
7. चेन्नई-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन (Chennai-Bengaluru)
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