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6.25 लाख के साइबर फ्रॉड मामले में 3 राज्यों के DGP तलब, हाईकोर्ट ने कहा- ऐसे अपराध में हर सेकेंड कीमती

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के मामलों में जांच में देरी पर सख्त रुख अपनाया है. जबलपुर की 70 वर्षीय महिला से 6.25 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में कोर्ट ने असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी को तलब किया है.

6.25 लाख के साइबर फ्रॉड मामले में 3 राज्यों के DGP तलब, हाईकोर्ट ने कहा- ऐसे अपराध में हर सेकेंड कीमती
  • एमपी हाईकोर्ट ने 6.25 लाख रुपये की साइबर ठगी मामले में असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी को तलब किया है.
  • HC ने साइबर अपराधों में तेजी से कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय, RBI और दूरसंचार विभाग को पक्षकार बनाया.
  • जबलपुर की 70 वर्षीय चैताली मित्रा के बैंक खाते से 26 अप्रैल 2025 को 6.25 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई थी.

6.25 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में सुनवाई करते हुए एमपी हाईकोर्ट ने तीन राज्यों के डीजीपी को तलब किया है. जस्टिस हिमान्शु जोशी की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि साइबर अपराधों में समय सबसे अहम होता है और यदि जांच एजेंसियां तेजी से कार्रवाई नहीं करेंगी तो अपराधी आसानी से बच निकलेंगे. ऐसे मामलों में हर सेकेंड कीमती है. 

अदालत ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और दूरसंचार विभाग को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को 21 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच की स्थिति बताने का आदेश दिया है.

6.25 लाख की ठगी से जुड़ा है मामला

दरअसल, मामला जबलपुर की 70 वर्षीय चैताली मित्रा से हुई करीब 6.25 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है. 26 अप्रैल 2025 को उनके बैंक खाते से रकम निकाल ली थी. शिकायत दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले जबलपुर पुलिस अधीक्षक को भी तलब किया था.

समय पर सहयोग नहीं मिलता सहयोग- एसपी 

सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली के साथ जबलपुर एसपी सम्पत उपाध्याय, गोराबाजार थाना प्रभारी भूपेंद्र आर्मो और जांच अधिकारी संजीव कुमार त्रिपाठी अदालत में मौजूद रहे. एसपी ने कोर्ट को बताया कि बैंकिंग संस्थानों से शुरुआती तकनीकी जानकारी मिलने में कई दिन लग जाते हैं. वहीं टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म से आवश्यक डिजिटल जानकारी प्राप्त करना और दूसरे राज्यों की पुलिस से समय पर सहयोग नहीं मिल पाने के कारण जांच प्रभावित होती है. उन्होंने यह भी बताया कि मामले में संदिग्ध की लोकेशन असम में मिली है.

इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा प्रक्रिया के कारण साइबर अपराधी जांच एजेंसियों से आगे निकल जाते हैं. अदालत ने कहा कि साइबर ठगी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की मजबूत और एकीकृत व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है.

हाईकोर्ट ने तीन राज्यों के DGP को किया तलब

कोर्ट ने नए पक्षकार बनाए गए सभी विभागों और एजेंसियों से विस्तृत जवाब भी तलब किया है. मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जब असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी अदालत में उपस्थित होकर अंतरराज्यीय समन्वय, सूचना आदान-प्रदान और जांच की प्रगति पर अपना पक्ष रखेंगे. हाईकोर्ट की यह सुनवाई देश में साइबर अपराधों की जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 

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